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बिहार चुनाव से पहले मुसलमानों ने नीतीश कुमार को दिया बड़ा झटका! इफ्तार पार्टी से दूर रहेंगे मुस्लिम धार्मिक संगठन!

बता दें कि बिहार के मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने नीतीश कुमार के द्वारा हर साल ईद के मौके पर आयोजित होने वाले इफ्तार पार्टी का विरोध जताया है। इसके पीछे नीतीश कुमार द्वारा वक्फ बिल बोर्ड को लाने में केंद्र सरकार का समर्थन करना है।

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बीते दो दिनों से नीतीश कुमार की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही। हाल ही में राष्ट्रगान अपमान को लेकर विपक्षी दलों ने जमकर घेरा। लेकिन उस मामले के करीब 24 घंटे बाद ही बिहार के मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने नीतीश को बड़ा झटका दिया है। इस बार नीतीश के इफ्तार पार्टी से मुस्लिम संगठनों ने बायकॉट का ऐलान किया है। इसके पीछे की बड़ी वजह निकलकर सामने आई है। बता दें कि इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मुस्लिम धार्मिक संगठनों का नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का विरोध करना आने वाले चुनाव बड़ा झटका साबित हो सकता है।

बिहार के मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने किया नीतीश के इफ्तार पार्टी का विरोध 

बता दें कि बिहार के मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने नीतीश कुमार के द्वारा हर साल ईद के मौके पर आयोजित होने वाले इफ्तार पार्टी का विरोध जताया है। इमारत शरिया के जनरल सेक्रेटरी मुफ्ती सईदुर्रहमान ने आजतक से बातचीत में कहा कि "इफ्तार पार्टी में हमारे धार्मिक संगठन शामिल नहीं होंगे। केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए वक्फ संशोधन बिल पर जेडीयू ने समर्थन का फैसला लिया है। उस नजरिए से हमने मुख्यमंत्री की इफ्तार पार्टी का बायकॉट किया है।" वहीं जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने आरोप लगाया कि ये नेता सरकार के 'संविधान विरोधी कदमों' का समर्थन कर रहे हैं।" इसके अलावा प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद और इमारत ए शरिया ने भी इफ्तार, ईद मिलन और दूसरे कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इन प्रमुख संगठनों के साथ कई और संगठन भी शामिल है। जिसमें इमारत शरिया,जमात इस्लामी, जमात अहले हदीस, खान्काह मोजीबिया, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमियत उलेमा ए हिंद और खान्काह रहमानी हैं। इन संगठनों ने बाकी अन्य मुस्लिम संगठनों से भी दूरी बनाने की बात कही है। दरअसल, इसके पीछे जदयू द्वारा वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करना है। बिहार में एनडीए की सरकार है। इसमें जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू),भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी),हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) है। केंद्र में भी नीतीश की पार्टी का सरकार को समर्थन है। 

वक्फ संशोधन बिल का मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध 

केंद्र की मोदी सरकार वक्फ संशोधन बिल लाने की तैयारी में है। फरवरी 2025 में मोदी कैबिनेट ने संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) द्वारा प्रस्तावित 14 बिलों के संशोधन की मंजूरी दे दी है। इसमें वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के पंजीकरण,विवाद निपटान प्रक्रियाओं और वक्फ की संरचना से जुड़ा है। इस विधेयक पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है। 

राजद ने इस बायकॉट का समर्थन किया 

नीतीश द्वारा आयोजित इफ़्तार पार्टी का मुस्लिम धर्म संगठनों के विरोध का राजद ने स्वागत किया है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि "जेडीयू मुसलमानों के साथ दोहरा मापदंड अपना रही है। एक तरफ वक्फ बोर्ड का समर्थन तो दूसरी तरफ इफ्तार पार्टी। दोनों एक साथ नहीं चलेंगे। चाहे बीजेपी हो या जेडीयू,टीडीपी सब एक ही एजेंडे पर चलने वाले हैं। राजद ने अपनी तरफ से कहा कि " हम इफ्तार का आयोजन करें। तो वह निशाना साधते हैं। नीतीश कुमार की तरफ से हो तो वह चुप्पी साध लेते हैं। हम तो टोपी भी लगाते हैं, टीका भी लगाते हैं। हमारे नेता इफ्तार भी जाते हैं और मंदिर भी जाते हैं। 

जेडीयू ने राजद को दिया जवाब 
राजद द्वारा नीतीश कुमार को घेरने और मुसलमान की बॉयकॉट को लेकर जेडीयू प्रवक्ता नवल शर्मा ने कहा कि "बिहार में पिछले 20 साल से गरीबों के मान-सम्मान, रोटी-रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों की चिंता जितनी नीतीश कुमार ने की है। उसकी मिसाल है। नीतीश पिछले कई वर्षों से इफ्तार पार्टी दे रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है। बिहार में कब्रिस्तान की जमीनों पर कब्जा जमाने वाले,मदरसा शिक्षकों को भूख से मारने वाले,भागलपुर जैसे बड़े दंगे के आरोपियों को बचाने वाले किस मुंह से बोल रहे हैं।" 

मुस्लिम धार्मिक संगठनों का विरोध चुनाव में भारी पड़ सकता है 

मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने जिस तरीके से नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का विरोध किया है। ऐसे में आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में भी इन मुस्लिम संगठनों का विरोध देखने को मिल सकता है। इससे मुस्लिम वोटर्स जेडीयू को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
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