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विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच CM आतिशी को उम्मीद, AAP के साथ जनता का आशीर्वाद बना रहेगा
दिल्ली के लिए शनिवार का दिन बेहद ख़ास होने वाला है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के लिए वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। इस चुनाव में बीजेपी और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
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दिल्ली के लिए शनिवार का दिन बेहद ख़ास होने वाला है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के लिए वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। इस चुनाव में बीजेपी और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। इस बीच चुनाव परिणाम आने से पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा है कि मुझे पूरा भरोसा है कि दिल्ली की जनता का प्यार हम पर बना रहेगा।
जनता का आशीर्वाद बना रहेगा
कालकाजी विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधानसभा का चुनाव लड़ रही आतिशी ने शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "आम आदमी पार्टी का इतिहास देखें तो जब हमने शुरुआत की थी, तब हमारे पास कुछ भी नहीं था। कोई सोच भी नहीं सकता था कि आप राजनीति में सफल हो सकती है। हमारे पास न तो धनबल था, न ही बाहुबल, हम धार्मिक राजनीति नहीं करते थे, न ही हमने वोट बैंक की राजनीति की। लेकिन हमारे पास दिल्ली की जनता का प्यार और भगवान का आशीर्वाद था, जिसकी वजह से हम आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि दिल्ली का प्यार हम पर बना रहेगा।"कालकाजी विधानसभा सीट पर आतिशी को भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी से जोरदार टक्कर मिल रही है।
बीजेपी को वनवास खत्म होने का अनुमान
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना शनिवार सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है। दिल्ली विधानसभा की सभी 70 सीटों के लिए बुधवार (5 फरवरी) को मतदान हुआ था।बता दें कि दिल्ली की 70 सीट पर 5 फरवरी को वोटिंग के बाद आए एग्जिट पोल में 27 साल बाद दिल्ली में भाजपा की वापसी का अनुमान लगाया गया है। पार्टी आसानी से 36 सीटों के बहुमत के आंकड़े को छू सकती है और उससे 10-15 सीटें अधिक जीत सकती है। इस तरह वह अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आप को सत्ता से बाहर कर सकती है। हालांकि, कांग्रेस को अधिकतम 0-3 सीटें मिलने का अनुमान है।
ज्ञात हो कि दिल्ली का चुनावी परिणाम चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। दिल्ली में पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर ध्यान दें तो पता चलता है कि आप ने 2020 के चुनाव में 70 में से 62 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने आठ सीटें जीतीं। दिल्ली में 15 साल तक राज करने वाली कांग्रेस पिछले दो विधानसभा चुनावों में अपना खाता खोलने में विफल रही और इस बार भी उसका प्रदर्शन ऐसा ही रहने का अनुमान है। लेकिन, कांग्रेस का मानना है कि इस बार परिणाम बेहतर होंगे।
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