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WCL 2025: भारत-पाक लीजेंड्स मैच रद्द, शिखर धवन बोले- देश से बड़ा कुछ नहीं

वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स (WCL) में होने वाला भारत-पाक लीजेंड्स मैच विवादों के चलते रद्द कर दिया गया है. हरभजन सिंह, शिखर धवन, सुरेश रैना और यूसुफ पठान जैसे पूर्व भारतीय खिलाड़ियों ने इस मैच से अपना नाम वापस ले लिया. शिखर धवन ने साफ कहा, "देश से बढ़कर कुछ नहीं." WCL ने सफाई में कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ खेल और खुशी के पल देना था, लेकिन अनजाने में लोगों की भावनाएं आहत हो गईं. इसी कारण मैच को रद्द करने का निर्णय लिया गया.

File Photo
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वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स यानी WCL में जिस मुकाबले का दुनिया भर के फैंस बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, वह अब नहीं हो पाएगा. भारत और पाकिस्तान के लीजेंड्स खिलाड़ियों के बीच होने वाला यह हाईवोल्टेज मैच आयोजकों द्वारा रद्द कर दिया गया है. इस फैसले के साथ ही सोशल मीडिया से लेकर खेल पत्रकारिता के गलियारों तक एक नई बहस ने जन्म ले लिया है. आयोजन की घोषणा के साथ ही जिस तरह पूर्व भारतीय क्रिकेटरों ने इस मैच से दूरी बनाई और अपनी नाराजगी जताई, उससे साफ हो गया था कि यह मुकाबला अब सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि संवेदना का विषय बन चुका है.

शिखर धवन की पोस्ट से शुरू हुआ विवाद


इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट करते हुए साफ शब्दों में कहा कि "मेरा देश मेरे लिए सब कुछ है और देश से बढ़कर कुछ नहीं होता." इसके साथ ही हरभजन सिंह, सुरेश रैना और यूसुफ पठान जैसे भारत के कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों ने इस मैच से खुद को अलग कर लिया. इस एक कदम ने WCL आयोजकों को झकझोर कर रख दिया. जब लीजेंड्स ही खेलने को तैयार नहीं, तो आयोजन का औचित्य भी सवालों के घेरे में आ गया.

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आयोजकों की सफाई में भावनाओं की गूंज

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WCL की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि टूर्नामेंट का उद्देश्य केवल खेल को प्रमोट करना और दर्शकों को यादगार पल देना था. आयोजकों ने यह भी कहा कि हाल ही में पाकिस्तान की हॉकी टीम भारत दौरे पर आई थी और भारत-पाकिस्तान के बीच वॉलीबॉल समेत अन्य खेलों में भी मुकाबले हुए हैं. ऐसे में आयोजकों को लगा कि क्रिकेट में भी एक दोस्ताना माहौल तैयार किया जा सकता है. लेकिन वो शायद भूल गए कि क्रिकेट भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि एक भावनात्मक विषय भी है. बयान में आयोजकों ने स्वीकार किया कि इस आयोजन की घोषणा से वे अनजाने में कई लोगों की भावनाएं आहत कर बैठे. उन्होंने कहा कि उनकी मंशा कभी किसी को ठेस पहुंचाने की नहीं थी, लेकिन जिस तरह से खिलाड़ियों और दर्शकों ने प्रतिक्रिया दी, उससे उन्हें आत्ममंथन करना पड़ा. आयोजकों ने यह भी माना कि इस फैसले से कई ब्रांड्स और पार्टनर्स पर भी असर पड़ा, जो सिर्फ खेल के प्रति अपने प्रेम के कारण टूर्नामेंट से जुड़े थे. इसी कारण से WCL ने आधिकारिक रूप से इस बहुचर्चित मुकाबले को रद्द करने का निर्णय लिया.

क्या वाकई सिर्फ खेल था यह आयोजन?

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इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी स्तर पर होने वाला क्रिकेट मुकाबला सिर्फ बैट और बॉल का खेल नहीं रह गया है. यह दोनों देशों के बीच भावनात्मक, राजनीतिक और सामाजिक संबंधों का आइना बन जाता है. भले ही आयोजकों की मंशा सिर्फ खेल को बढ़ावा देने की रही हो, लेकिन जिस तरह से पूर्व भारतीय खिलाड़ी एक स्वर में इससे पीछे हटे, उससे यह भी साबित हो गया कि देश के सम्मान और संवेदना के सामने कोई टूर्नामेंट बड़ी बात नहीं.

वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में भारत-पाकिस्तान लीजेंड्स मुकाबले का रद्द होना एक साधारण खेल समाचार नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि खेल जब देशभक्ति और संवेदना से टकराता है, तो फैसले मैदान से बाहर लिए जाते हैं. पूर्व खिलाड़ियों की साफ सोच, जनता की भावना और आयोजकों की विनम्रता तीनों ने मिलकर इस फैसले को सही दिशा दी. हालांकि इससे फैंस को निराशा जरूर हुई है, लेकिन यह कदम यह भी साबित करता है कि जब बात देश की होती है, तो खिलाड़ी भी एक नागरिक की तरह सोचते हैं.

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