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पृथ्वी शॉ: शुरुआती सफलता के बाद गिरा ग्राफ, टीम इंडिया में वापसी की जंग जारी

17 साल 320 दिन की उम्र में शॉ ने दलीप ट्रॉफी में डेब्यू करते हुए शतक लगाया. वह ऐसा करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने. इससे पहले दलीप ट्रॉफी में शतक जड़ने वाले युवा खिलाड़ी में सचिन तेंदुलकर का नाम था.

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साल 2018 में बतौर कप्तान भारत को अंडर-19 विश्व कप खिताब जिताने वाले पृथ्वी शॉ को अगला 'सचिन तेंदुलकर' माना जा रहा था. अपनी पहली ही टेस्ट पारी में शतक लगाने वाले शॉ ने करियर की शुरुआत जितने शानदार तरीके से की, उतनी ही तेजी से इस खिलाड़ी का ग्राफ भी बिगड़ा.

शानदार शुरुआत से सुर्खियों में आए

9 नवंबर 1999 को महाराष्ट्र के ठाणे में जन्मे पृथ्वी शॉ महज 14 साल की उम्र में ही चर्चा में आ गए थे. साल 2013 में हैरिस शील्ड में उन्होंने अपने स्कूल रिजवी स्प्रिंगफील्ड की ओर से खेलते हुए 330 गेंदों में 85 चौकों और 5 छक्कों के साथ 546 रन बनाए. यह उस दौर में स्कूल क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर था.

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तेजी से रन बनाने में माहिर पृथ्वी शॉ साल 2016 में भारत की उस अंडर-19 टीम का हिस्सा थे, जिसने श्रीलंका में यूथ एशिया कप जीता. करीब 2 महीनों बाद ही उन्होंने रणजी ट्रॉफी में मुंबई की ओर से डेब्यू किया और तमिलनाडु के खिलाफ दूसरी पारी में शतक जड़कर टीम को जीत दिलाई.

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रिकॉर्ड तोड़ने वाले सबसे युवा बल्लेबाज

17 साल 320 दिन की उम्र में शॉ ने दलीप ट्रॉफी में डेब्यू करते हुए शतक लगाया. वह ऐसा करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने. इससे पहले दलीप ट्रॉफी में शतक जड़ने वाले युवा खिलाड़ी में सचिन तेंदुलकर का नाम था.

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साल 2018 में पृथ्वी शॉ ने अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 विश्व कप विजेता बनाया. इसी साल आईपीएल फ्रेंचाइजी दिल्ली डेयरडेविल्स ने 1.2 करोड़ रुपये में शॉ को अपने साथ जोड़ा. अपने पहले ही सीजन में शॉ ने 9 मैचों में 27.22 की औसत के साथ 245 रन बनाते हुए हेड कोच रिकी पोंटिंग को प्रभावित किया.

टेस्ट क्रिकेट में धमाकेदार आगाज

साल 2018 में दाएं हाथ के इस सलामी बल्लेबाज को वेस्टइंडीज के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू का मौका मिला. उन्होंने अपनी पहली ही पारी में 154 गेंदों का सामना करते हुए 19 चौकों की मदद से 134 रन बनाए. इसी के साथ सचिन तेंदुलकर के बाद भारत के लिए दूसरे सबसे कम उम्र के टेस्ट शतकवीर बने. टीम इंडिया ने यह मैच पारी और 272 रन से जीता. अगले मुकाबले में उन्होंने 70 और 33* रन की पारी खेली.

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डोपिंग, फिटनेस और अनुशासन के आरोप

शुरुआती सफलता के बाद पृथ्वी शॉ का करियर कई कारणों से प्रभावित हुआ. साल 2019 में डोपिंग के कारण उन्हें आठ महीनों का प्रतिबंध झेलना पड़ा, लेकिन साल 2020 में उन्हें वनडे फॉर्मेट में डेब्यू का मौका मिल गया. अगले ही साल उन्होंने टी20 क्रिकेट में भी पदार्पण कर लिया.

इसके बाद पृथ्वी शॉ को चोट और फिटनेस की समस्या का सामना करना पड़ा. उन पर अनुशासनहीन होने का भी आरोप लगाया गया. धीरे-धीरे उनकी फॉर्म में गिरावट आने लगी, जिसका असर चयन पर भी पड़ा. प्रदर्शन में अस्थिरता के चलते वह टीम इंडिया से बाहर हो गए.

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घरेलू क्रिकेट में वापसी की कोशिश

खराब फिटनेस के चलते कुछ साल बाद उन्हें मुंबई की टीम ने भी टीम से बाहर कर दिया. इसके बाद शॉ ने महाराष्ट्र की टीम में शामिल होने का फैसला किया.

शॉ ने वापसी के लिए कड़ी मेहनत की. अक्टूबर 2025 में रणजी ट्रॉफी मुकाबले में चंडीगढ़ के खिलाफ खेलते हुए 222 रन की पारी खेलते हुए महाराष्ट्र को जीत दिलाई. इससे पिछले मुकाबले में उन्होंने केरल के खिलाफ 75 रन बनाए थे.

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करियर के आंकड़े

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत करने वाले शॉ अब तक सिर्फ 5 ही टेस्ट खेल सके हैं, जिसमें 42.37 की औसत के साथ 339 रन बनाए. इसके अलावा, उन्होंने 6 वनडे मुकाबलों में 31.50 की औसत के साथ 189 रन बनाए हैं.

पृथ्वी शॉ के फर्स्ट क्लास करियर को देखें, तो उन्होंने 61 मुकाबलों में 14 शतक और 19 अर्धशतक के साथ 4,881 रन जुटाए, जबकि 65 लिस्ट-ए मुकाबलों में 10 शतक और 14 अर्धशतक के साथ 3,399 रन बनाए.

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आईपीएल करियर को देखा जाए, तो दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेलते हुए शॉ ने 79 मुकाबलों में 23.94 की औसत के साथ 1,892 रन अपने नाम किए हैं.

क्या टीम इंडिया में वापसी कर पाएंगे शॉ?

फिलहाल शॉ टीम इंडिया में वापसी की कोशिश कर रहे हैं. घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन ही इस खिलाड़ी की वापसी को मुमकिन बना सकता है, लेकिन इसके लिए उनकी फिटनेस भी अहम होगी.

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