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संघर्षों से भरी है मनु की कहानी, कभी किराये की पिस्टल से खेला और अब Olympic में इतिहास रच दिया

Olympic Games Paris 2024 में मनु भाकर ने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया।उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में ब्रॉन्ज़ मेडल पदक जीता और भारत की झोली में पहला मेडल डाला। मन्नू की इस उपलब्धि के पीछे कई संघर्ष हैं कड़ी मेहनत है।

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मनु भाकर का नाम आज पूरे भारत में गूंज रहा है हर तरफ इस भारतीय एथलीट की बात की जा रही है और करें भी क्यों ना।मनु भाकर ने Paris Olympic में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और भारत की झोली में पहला मेडल डाला। मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया और अपने नाम के साथ देश का नाम भी रोशन कर दिया। मनु की इस ऐतिहासिक जीत ने उन्हें वर्ल्ड शूटिंग में एक बड़े चमकते सितारे के रूप में नई पहचान दे दी लेकिन उनका ये सफर इतना आसान नहीं रहा। उन्होंने कई संघर्ष किये कड़ी मेहनत की तब जाकर ये मुकाम हांसिल कर पायी। 

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हरियाणा के झज्जर की रहने वाली मनु का जन्म 18 फरवरी 2002 को हुआ था। उन्होंने बचपन से ही खेल के प्रति रूचि दिखाई और कई खेलों में हाथ आजमाया। वो बॉक्सिंग, जिम्नास्टिक्स, मार्शल आर्ट और क्रिकेट भी खेल चुकी हैं ।सिर्फ इतना ही नहीं शूटिंग से पहले मनु भाकर क्रिकेट की ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं।वो भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग की झज्जर क्रिकेट एकडेमी में क्रिकेट सीख चुकी हैं। लेकिन मनु के समाने अन्य खेल और शूटिंग चुनना पड़ा तो उन्होंने शूटिंग को चुना। और एक स्थानीय शूटिंग रेंज में उनके पिता ने उनका दाखिला करवा दिया। 

मनु हमेशा से एक मेहनती खिलाड़ी रही है। उन्होंने पहले ही ठान लिया था कि मुझे शूटिंग करनी है और देश के लिए खेलना है। एक वक़्त ऐसा भी था जब मनु को  किराए की पिस्तौल लेनी पड़ी थी। और वो भी तब जब वो अपना पहला इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने गई थी। तब उन्हें किराये के पिस्टल से खेलना पड़ा था। जिसका ज़िक्र उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान किया था और कहा था - "मेरे करियर के शुरुआती दौर में जब मेरे पास मेरी खुद की पिस्टल नहीं थी तब मैंने विनीत सर की पिस्टल किराए पर ली थी और  मुझे यह भी नहीं पता था कि ट्रिगर कितना अंदर दबाना होता है तब मुझे ग्रिप बनाने में भी काफी दिक्कत होती थी।" लेकिन मनु ने हार नहीं मानी और ठान लिया कि मुझे निशानेबाजी ही करनी है उसके लिए वो कुछ भी कर सकती है बस जरुरत है तो उस जुनून की जो उसे सफलता दिला सकती है और वो जूनून मनु के अंदर पहले से था। 

हालांकि मनु भाकर को पिस्टल लाइसेंस के लिए भी काफी मेहनत करनी पड़ी थी। जिसके लिए उनके पिता राम किशन भाकर ने उनका साथ दिया वो मनु के लिए पिस्टल लाइसेंस लेने के लिए हर रोज 45 किलोमीटर जाते थे।लेकिन उन्हें हर दिन निराशा हाथ लगती थी उस बीच एशियन युथ गेम्स भी काफी नजदीक थे और मनु को प्रैक्टिस के लिए एक पिस्टल की सख्त जरूरत थी।खबरों के मुताबिक कहा ये भी जाता है कि आखिरी में मनु के पिता ने थक - हार कर हरियाणा के शिक्षा मंत्री से गुहार लगाई और साथ ही CMO और खेल मंत्री को सोशल मीडिया के सहारे साथ देने की गुहार लगाई। और उनकी ये मेहनत रंग भी लाई मनु को आख़िरकार लाइसेंस मिल ही गया।

10 मीटर एयर पिस्टल में मनु भाकर की उपलब्धियां -
साल 2017 में नैशनल चैंपियनशिप में 9 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच चुकी हैं। 
साल 2017 में ही जूनियर चैंपियनशिप में मनु ने रजत पदक अपने नाम किया। 
साल 2018 में मैक्सिको के गुआदालाजरा में वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय बन चुकी हैं। 
साल 2018 में ही ISSF जूनियर वर्ल्ड कप में भी डबल गोल्ड मेडल जीत चुकी है। 
साल 2018 में ही एक बार फिर कॉमनवेल्थ गेम्स में वो उन्होंने फिर गोल्ड मेडल जीता। 
साल 2018 में युवा ओलंपिक खेल का भी वो हिस्सा रह चुकी हैं जहाँ उन्होंने स्वर्ण पदक और रजत पदक जीता। 
साल 2019 में म्यूनिख ISSF वर्ल्ड कप में चौथे स्थान पर रहने के साथ उन्होंने 2021 टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। 
अगस्त 2020 में मनु भाकर को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वाराअर्जुन पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। 

इसके अलावा वो कई ऐसे मेडल जीत चुकी हैं। इस बीच उन्हें असफलताओं का सामना भी करना पड़ा लेकिन वो अपने लक्ष्य पर डटी रही मेहनत करती रही और आज वो दिन भी आ गया जब उन्होंने पेरिस ओलिंपिक में इतिहास रच दिया। मनु की ये सफलता इस खेल के प्रति उनकी मेहनत और लगन को  दर्शाती है। उन्होंने अपने करियर में बेशक कई बड़े से बड़े टूर्नामेंट्स खेले और मेडल्स भी जीते लेकिन पेरिस ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतना उनके करियर का एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है इस बात को झुटलाया नहीं जा सकता ।

आज मनु ना सिर्फ भारत बल्कि उन सभी लड़कियों को इंस्पायर करती है जो कुछ करना चाहती हैं खुली आसमान में उड़ना चाहती हैं। यही वजह है कि आज हर तरफ मनु भाकर की चर्चा हो रही है। 

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