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'कैप्टन कूल' अब कोई दूसरा नहीं बन पाएगा, धोनी का यह नाम बना 'ब्रांड', क्रिकेटर ने लिया बड़ा फैसला

भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तान पूर्व क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी का निकनेम 'कैप्टन कूल' अब एक 'ब्रांड' बन गया है. उन्होंने इस नाम का ट्रेडमार्क करवा लिया है. जिसकी मंजूरी भी मिल गई है. ऐसे में अब कोई दूसरा 'कैप्टन कूल' नहीं बन सकता है.

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भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी के चाहने वाले करोड़ों में है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद आज भी उनकी फैन फॉलोइंग इतनी ज्यादा है कि वर्तमान में खेल रहा कोई अन्य खिलाड़ी भी उनके सामने फीका नजर आता है. आईपीएल के मुकाबले में धोनी जैसे ही मैदान में आते हैं. वैसे ही टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यूअरशिप अपने आप बढ़ जाती है. क्रिकेट के मैदान पर हमेशा शांत और कूल रहने वाले महेंद्र सिंह धोनी को फैंस 'कैप्टन कूल' के नाम से भी पुकारते हैं. यही वजह है कि यह निकनेम इतना पॉप्युलर हो गया कि अब महेंद्र सिंह धोनी ने खुद इस नाम का ट्रेडमार्क करा लिया है. यानी अब कोई दूसरा 'कैप्टन कूल' नहीं बन पाएगा. चाहे वह क्रिकेट का मैदान हो या कोई और फील्ड. यह नाम अब धोनी का खुद का एक 'ब्रांड' बन चुका है. बता दें कि 'कैप्टन कूल' नाम को धोनी ने कानूनी तौर पर रजिस्टर्ड करा लिया है. पिछले कई वर्षों से यह नाम धोनी की टैगलाइन बनी हुई है. 

अब कोई दूसरा नहीं बन पाएगा 'कैप्टन कूल'

बता दें कि पूर्व भारतीय कप्तान ने खेल प्रशिक्षण, कोचिंग सेवाओं और प्रशिक्षण केंद्रों के लिए अपने निकनेम 'कैप्टन कूल' का ट्रेडमार्क करवा लिया है. ट्रेडमार्क रजिस्ट्री पोर्टल के अनुसार, 'उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया है और इसका विज्ञापन आधिकारिक ट्रेडमार्क जर्नल में 16 जून, 2025 को प्रकाशित किया गया था.'

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धोनी के ट्रेडमार्क पर क्या बोली उनकी वकील मानसी अग्रवाल?

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क्रिकेटर धोनी की वकील मानसी अग्रवाल ने 'कैप्टन कूल' निकनेम का ट्रेडमार्क को लेकर बताया कि 'यह मामला दर्शाता है कि पर्सनल ब्रांडिंग और पहचान से जुड़ी विशिष्टता कानूनी तौर पर किस तरह से किसी के काम आती है. वह भले ही पहले से कोई समान ट्रेडमार्क में मौजूद हो.' उन्होंने खुलासा किया कि धोनी जैसे दिग्गज के लिए भी यह आसान नहीं था. 'कैप्टन कूल' ट्रेडमार्क के लिए रजिस्ट्री ने ट्रेडमार्क्स अधिनियम की धारा 11(1) के तहत आपत्ति जताई थी. क्योंकि यह ट्रेडमार्क पहले से ही इस नाम से रजिस्टर था और नया ट्रेडमार्क लोगों को भ्रमित कर सकता था.'

आखिर कैसे मिला 'कैप्टन कूल' ट्रेडमार्क 

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'कैप्टन कूल' निकनेम को ट्रेडमार्क बनवाने के लिए धोनी की टीम को कई अड़चनों का भी सामना करना पड़ा. धोनी ने इस नाम के इस्तेमाल के लिए आपत्ति जताई थी. वहीं उनकी कानूनी टीम ने तर्क दिया कि 'कैप्टन कूल' का उनसे एक संबंध है. जो उनके नाम से कई सालों से जुड़ा हुआ है. यह ऐसा निकनेम है, जिसने उन्हें अलग पहचान दिलाई है. टीम की तरफ से यह भी कहा गया है कि इस ट्रेडमार्क का इस्तेमाल सिर्फ खेल और मनोरंजन की सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इसलिए किसी भी तरह से भ्रमित होने की संभावना नहीं है.

धोनी को कैसे मिला 'कैप्टन कूल' निकनेम 

क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने अपने क्रिकेट करियर में जहां कहीं भी मुकाबला खेला है, चाहे वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हो या घरेलू क्रिकेट वह हमेशा मैदान पर कूल ही नजर आते हैं. टीम की परिस्थिति चाहे जैसी हो, वह हमेशा खिलाड़ियों से शांत और नम्र व्यवहार करते दिखाई देते हैं. उनके चेहरे पर कभी भी झुंझलाहट या कोई शिकन नजर नहीं आती है. टीम की चाहे हार हो या जीत हो वह हमेशा शांत होकर ही उस पल को जीते हैं. यही वजह है कि क्रिकेट फैंस ने उन्हें 'कैप्टन कूल' नाम दिया, जो धीरे-धीरे उनके नाम का एक 'ब्रांड' बन गया. आप कहीं भी किसी भी जगह कैप्टन कूल का नाम पुकारे, तो लोगों के जेहन में महेंद्र सिंह धोनी की तस्वीर उभरती हुई नजर आती है. ऐसे में धोनी का यह फैसला अनायास नहीं है. ऐसे में 'कैप्टन कूल' कोई सामान्य उपनाम नहीं रहा, यह उनकी स्टाइल, माइंडसेट और विरासत का प्रतिनिधि बन गया है. धोनी ने अपने कूल माइंड से ही टीम इंडिया को 2007 में पहले T20 वर्ल्ड कप में चैंपियन बनाया. उसके बाद साल 2011 में वनडे वर्ल्ड कप का दूसरी बार चैंपियन बनाया. फिर 2 साल बाद 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जिताया. ऐसे में उन्होंने हर एक मौके पर शांति और सूझबूझ का परिचय दिया. आज यही वजह है कि उनका निकनेम अब एक 'ब्रांड' बन गया है.

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