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10 साल, 1 मिशन, लाखों नौकरियां... खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा- सरकार का लक्ष्य भारत को खेल का पावरहाउस बनाना है
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में खेल क्षेत्र को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ते हुए अगले दशक के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव रखा. खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इसे भारत को वैश्विक खेल पावरहाउस बनाने और खेल के जरिए रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा कदम बताया.
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है. वित्त मंत्री ने खेल क्षेत्र को रोजगार, कौशल विकास और नौकरी के दृष्टिकोण से अहम माना है. उन्होंने अगले एक दशक में भारत के खेल क्षेत्र को बदलने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव दिया है. खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बजट में खेलो इंडिया मिशन के तहत लाए गए प्रस्तावों का स्वागत किया है.
दरअसल, निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में कहा, 'खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल विकास और नौकरी के अनेक अवसर प्रदान करता है. खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से शुरू की गई खेल प्रतिभाओं के व्यवस्थित पोषण को आगे बढ़ाते हुए, मैं अगले दशक में खेल क्षेत्र को रूपांतरित करने के लिए एक खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं.'
डॉ. मनसुख मांडविया ने शेयर किया पोस्ट
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डॉ. मनसुख मांडविया ने एक्स प्लेटफॉर्म पर खेलो इंडिया मिशन के तहत बजट में अगले एक दशक के लिए लाए गए प्रस्तावों की प्रशंसा की.उन्होंने लिखा, 'चैंपियंस का निर्माण, विकसित भारत का निर्माण, खेलो इंडिया मिशन का मकसद खेल प्रतिभाओं को सही तरीके से आगे बढ़ाना और अगले 10 सालों में भारत को दुनिया भर में खेल की दुनिया में पावरहाउस बनाना है.' खेल मंत्री ने उन पांच बिंदुओं का जिक्र किया है जिनके माध्यम से सरकार खेलो इंडिया मिशन के तहत देश में खेल के साथ ही रोजगार सृजन पर भी काम करेगी.
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सरकार का अगले दस साल का लक्ष्य निर्धारित
सरकार अगले दस साल में भारत को दुनिया के खेल मानचित्र पर एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करेगी. खेलो इंडिया मिशन को सरकार सिर्फ खेल, मनोरंजन या सेहत तक सीमित न रखकर इसे देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का मुख्य जरिया बनाने जा रही है। इस फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर होगा. खेलो इंडिया मिशन के तहत खिलाड़ियों को खोजने, उन्हें प्रशिक्षित कर बड़े मंचों के लिए तैयार करने, सर्टिफाइड कोच, हाई-परफॉरमेंस डायरेक्टर और स्काउट्स को बड़े पैमाने पर तैयार किया जाएगा. इससे कोचिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की चाह रखने वाले खिलाड़ियों के लिए रोजगार का रास्ता खुलेगा. सरकार खिलाड़ियों को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए प्रोफेशनल टीम तैयार करना चाहती है. इस वजह से फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक) और डाइट एक्सपर्ट्स की मांग बढ़ेगी। स्पोर्ट्स मेडिसिन के क्षेत्र में भी रोजगार बढ़ेगा.
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बताते चलें कि बड़े स्तर पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और इवेंट आयोजन करने वाली कंपनियों और युवाओं को साथ जोड़ेगा। इससे स्टेडियम के रखरखाव और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे. ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अब भारत दुनिया के लिए खेल का सामान बनाएगा। बेहतरीन क्वालिटी के बैट और जूते तैयार किए जाएंगे. इससे इस क्षेत्र में भारी निवेश होगा और नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे. सरकार का लक्ष्य 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन है.