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कौन हैं C. Sadanand Master जिन्हें राष्ट्रपति ने संसद भेजा तो चारों ओर हुई खूब तारीफ?

नब्बे के दशक से वामपंथियों के गढ़ केरल में बीजेपी के लिए जमीन तैयार करने में लगे संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता सी. सदानंद मास्टर के दोनों पैर काट दिये गये… लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी… बीजेपी के लिए काम करते रहे और अब भेजे गये राज्य सभा तो सुनिये क्या कहा ?

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केरल… दक्षिण भारत का ये एक ऐसा राज्य है… जिसे वामपंथियों का गढ़ कहा जाता है... जहां की सत्ता पर भगवा लहराना आज भी देश की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के लिए सपना ही रहा है… लेकिन इसके बावजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कभी हिम्मत नहीं हारी… अटल आडवाणी के जमाने से ही बीजेपी कार्यकर्ता केरल में पार्टी के लिए जमीन तलाशने के लिए मेहनत करते रहे हैं… जिनमें एक नाम RSS के वरिष्ठ कार्यकर्ता सी. सदानंद मास्टर का भी है... जिन्हें बीजेपी के लिए लड़ने की कीमत अपने दोनों पैर कटवा कर चुकानी पड़ी… क्योंकि वामपंथियों को ये बात बर्दाश्त नहीं थी कि सी. सदानंद मास्टर केरल में बीजेपी के लिए जमीन तैयार करें... इसीलिये कथित तौर पर वामपंथियों ने उनके दोनों पैर काट दिये...

नब्बे के दशक से वामपंथियों के गढ़ केरल में बीजेपी के लिए जमीन तैयार करने में लगे संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता सी. सदानंद मास्टर के दोनों पैर काट दिये गये… लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी… बीजेपी के लिए काम करते रहे… जिसका ईनाम उन्हें अब जाकर मिला जब मोदी राज में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य सभा के लिए मनोनीत किया... जिस पर पीएम मोदी ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा... ‘सी. सदानंद मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे न झुकने की प्रतिमूर्ति है, हिंसा और धमकी भी राष्ट्र विकास के प्रति उनके जज्बे को डिगा नहीं सकी, एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनके प्रयास सराहनीय हैं, युवा सशक्तिकरण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता है, राष्ट्रपति जी द्वारा राज्य सभा के लिए मनोनीत होने पर मैं उन्हें बधाई देता हूं, सांसद के रूप में उनकी भूमिका के लिए शुभकामनाएं’

बीजेपी सांसद डॉ. राधामोहनदास अग्रवाल तो सी. सदानंद को राज्यसभा भेजे जाने पर इतने खुश हैं कि उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा… भाजपा और RSS के करोड़ों कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी जी आपके आभारी हैं कि आपने जनसभा में ही सी. सदानंद मास्टर के संघर्ष को सम्मानित नहीं किया बल्कि उन्हें राज्य सभा का सदस्य नामित करके कार्यकर्ताओं को बहुत बड़ा संदेश भी दिया है

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संघ समर्थक राज पुष्प अवस्थी ने मोदी सरकार के इस कदम की तारीफ करते हुए लिखा… केरल में वामपंथी संघर्ष के विरुद्ध राष्ट्रवादी विचार के संघर्ष के प्रतीक सदानंद मास्टर जी का राज्यसभा के लिए नामांकन एक अभिनन्दन योग्य निर्णय है, अब जब वो राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ेंगे तो सारे भारत को पता चलेगा कि वामपंथ का असली चेहरा क्या है ?

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वामपंथियों की नफरत के शिकार सी सदानंद मास्टर को राज्य सभा भेजा गया तो सोशल मीडिया पर कुछ इसी तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं तो वहीं उनके सियासी सफर की बात करें तो…

कौन हैं सी. सदानंद मास्टर ?दक्षिण राज्य केरल के कन्नूर जिले के रहने वाले हैं सी. सदानंद मास्टर. सदानंद मास्टर ने असम की गुवाहाटी विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया. कालीकट विश्वविद्यालय से सदानंद मास्टर ने बी.एड. की पढ़ाई की है. हायर सेकेंडरी स्कूल में 1999 से सामाजिक विज्ञान के शिक्षक हैं. केरल में राष्ट्रीय अध्यापक संघ के उपाध्यक्ष भी हैं सी. सदानंद मास्टर. 25 जनवरी 1994 में जब 30 साल के थे उनके घर पर हमला हुआ था. इसी हमले में उनके दोनों पैर काट दिये गये आरोप CPI(M) पर लगा! CPI(M) कार्यकर्ताओं को उनका वामपंथी विरोधी होना बर्दाश्त नहीं था! दोनों पैर काटे जाने के बावजूद सी. सदानंद मास्टर ने हिम्मत नहीं हारी. 2016 में कन्नूर की कुथुपरंभा सीट से BJP ने चुनाव लड़ाया लेकिन हार गये. शैक्षिक सुधारों के साथ ही वैचारिक जागरुकता का भी प्रचार-प्रसार करते हैं. सी. सदानंद की पत्नी वनीता रानी शिक्षिका और बेटी बीटेक की छात्रा हैं.

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पुराने संघी सी सदानंद मास्टर ने केरल जैसे वामपंथियों के गढ़ में बीजेपी के लिए जमीन तैयार करने की कीमत उन्हें अपने दोनों पैर गंवा कर चुकानी पड़ी… लेकिन इसके बावजूद सदानंद मास्टर हिम्मत नहीं हारे… बीजेपी के लिए काम करते रहे… यहां तक कि साल 2016 में खुद पीएम मोदी उनके लिए चुनाव प्रचार करने केरल भी गये थे... लेकिन इसके बावजूद सदानंद मास्टर चुनाव जीत कर केरल विधानसभा तो नहीं पहुंच सके... लेकिन हां… अब देश की संसद में जरूर उनकी आवाज गूंजेगी… और डंके की चोट पर संसद के जरिये पूरे देश को बताएंगे वामपंथी राजनीति की पूरी हकीकत... पार्टी के इस कदम की तारीफ करते हुए सी सदानंद मास्टर ने कहा…


यह गर्व का क्षण है क्योंकि पार्टी ने मुझ पर अपना विश्वास और भरोसा दिखाया है, केरल की राजनीति के संदर्भ में यह बहुत महत्वपूर्ण है, पार्टी अब विकसित केरल और विकसित भारत के विचार को बढ़ावा दे रही है, इस दृष्टिकोण को साकार करने में मदद करने के लिए मुझे और भी अधिक मेहनत करनी होगी, केरल में हमें राजनीतिक विरोधियों से, विशेष रूप से कन्नूर जिले में कई अत्याचारों का सामना करना पड़ा है, कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, उनके परिवार आज कष्ट झेल रहे हैं। उनका उत्थान करना और उनका विश्वास बहाल करना मेरा कर्तव्य है

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बीजेपी के लिए समर्पित भाव के साथ काम करने वाले सी सदानंद जैसे नेता को संसद भेजे जाने पर आपका क्या कहना है अपनी राय हमें कमेंट कर जरूर बताएं.

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