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20 हजार कारीगर, 22 साल… ताजमहल को बनाने में आया कितना खर्च, कौन है असली वास्तुकार? राज से उठा पर्दा

असल में शाहजहां की ताज की परिकल्पणा को किसने धरातल पर उतारा, डिजाइन किसने तैयार किया और कुल खर्चा कितना था. इन तमाम सवालों का जवाब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहासकार ने दिया है. जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं

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‘कितने हाथों ने तराशे ये हसीं ताज-महल 
झांकते हैं दर-ओ-दर से क्या-क्या चेहरे’ 

मोहब्बत की निशानी ताजमहल का जब जिक्र होता है तो साथ में एक कहानी भी सुनाई जाती है. कहानी वही होती है कि, शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले कारीगर के हाथ ही काट दिए थे. ताकि दुनिया में कोई दूसरा ताज न बना सके. लेकिन इस दावे में सच कितना है आज तक साबित नहीं हो पाया. मशहूर शायर जमील मलिक का ये शेर भी इसी ओर इशारा करता है 

ताज किसी एक कारीगर के हाथों का कमाल नहीं है. इसकी चमकती दीवारों, खूबसूरत नक्काशी और शानदार झरोखों को अनगिनत चेहरों ने तराशा है. लेकिन असल में शाहजहां की ताज की परिकल्पणा को किसने धरातल पर उतारा, डिजाइन किसने तैयार किया था और कुल खर्चा कितना था. इन तमाम सवालों का जवाब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहासकार ने दिया है. 

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शाहजहां ने किससे ली थी सलाह? 

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर एमके पुंडीर ने हाल ही में ताजमहल के कारीगरों और इसके आइडिया पर बात की. इतिहासकार एमके पुंडीर ने बताया कि मुगल बादशाह शाहजहां ने ताजमहल की नींव रखने से पहले दरबारियों तक से सलाह ली थी. 

ताजमहल बनाने में कितने रुपए खर्च हुए? 

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जहां तक ताजमहल के बजट का सवाल है, इतिहासकार एमके पुंडीर बताते हैं कि, मुगल काल में शाहजहां के पास अकूल संपत्ति थी. खजाने का भंडार था ताजमहल बनाने के लिए शाहजहां ने पानी की तरह पैसा बहाया. एमके पुंडीर ने ताजमहल का अनुमानित खर्चा करीब 22 करोड़ रुपए बताए हैं. मुगल काल में इस राशि की वैल्यू कितनी ज्यादा होगी. इसका अंदाजा भलि-भांति लगाया जा सकता है. 

कौन था ताजहमल का आर्किटेक्ट? 

इतिहासकार एमके पुंडीर ऐतिहासिक संग्रहों के आधार पर बताते हैं कि, ताजमहल का कोई एक आर्किटेक्ट नहीं था. हालांकि आसिफ खान और इनायत खान का जिक्र सबसे ऊपर होता है. किसी ने सजावट, किसी ने पेंटिंग तो किसी ने कैलीग्राफी में अपना योगदान दिया. इतिहासकार एमके पुंडीर बताते हैं कि सही मायनों में तो ताजमहल के वास्तुकार शाहजहां ही थे. उन्होंने डिजाइनिंग से लेकर निर्माण सामग्री और सजावट तक के फैसले खुद लिए हैं. एमके पुंडीर ने बताया कि, ताजमहल के लिए दिन रात काम हुआ. करीब 20 हजार मजदूर 22 साल तक इसके निर्माण में लगे रहे. 

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मकराना के नायाब पत्थरों से बना ताज 

मुगल काल में कुछ ऐसे भी राजा रहे हैं जिनके मुगल शासकों के साथ घनिष्ठ संबंध रहे. यहां तक कि ताजमहल के निर्माण में राजपूत राजाओं ने भी खास भूमिका निभाई थी. इतिहासकार एमके पुंडीर ने बताया कि, उस समय राजपूत राजा मिर्जा जय सिंह ने शाहजहां को मकराना पत्थर के बारे में बताया था. इसी पत्थर से ताजमहल बना गया था. मिर्जा जय सिंह ने बताया था, मकराना क्षेत्र में सफेद संगमरमर पत्थर मिला है. इतना सुनते ही शाहजहां ने कहा, सारा संगमरमर आगरा भिजवा दो. 

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हजारों श्रमिकों की मेहनत, शाहजहां की मोहब्बत और बेहिसाब दौलत ने इस ऐतिहासिक इमारत को बनाया. ताज महल की दीवारें सिर्फ मोहब्बत की चमक ही नहीं बल्कि उन गरीब मजदूरों की कहानी भी बयां करती हैं जो दिन रात इसके निर्माण में सालों साल लगे रहे. 

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