×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

दुनिया के वो देश जहां आज भी विदेशी सामान का होता है बहिष्कार, खुद बनाते हैं कार, फोन और खाने का सामान

उत्तर कोरिया और क्यूबा जैसे देश विदेशी सामानों का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? जानिए उनकी स्वदेशी व्यवस्था और आत्मनिर्भरता के अनोखा मॉडल के बारें में सब कुछ.

दुनिया के वो देश जहां आज भी विदेशी सामान का होता है बहिष्कार, खुद बनाते हैं कार, फोन और खाने का सामान
Google.com
Advertisement

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात की एक रैली में देशवासियों से अपील की कि वे विदेशी उत्पादों का कम से कम उपयोग करें और देशी वस्तुओं को अपनाएं. उनका यह संदेश आत्मनिर्भर भारत के विचार से जुड़ा हुआ है, लेकिन एक सवाल स्वाभाविक है, क्या वास्तव में कोई देश ऐसा है जो विदेशी वस्तुओं से लगभग पूरी तरह बचा रहता है? इसका उत्तर है हाँ. दुनिया में दो देश ऐसे हैं, जो विदेशी सामानों पर बेहद सख्त नियंत्रण रखते हैं. ये देश हैं उत्तर कोरिया और क्यूबा. इनके अलावा कुछ अन्य देश जैसे ईरान, भूटान और तुर्कमेनिस्तान भी इस पथ पर चलते हैं, लेकिन सबसे सख्त प्रणाली उत्तर कोरिया और क्यूबा में देखने को मिलती है.

उत्तर कोरिया 

उत्तर कोरिया को दुनिया का सबसे बंद देश माना जाता है. वहां की सरकार न केवल देश की अर्थव्यवस्था बल्कि जनता के जीवन के हर पहलू पर सीधा नियंत्रण रखती है. विदेशी वस्तुओं का वहां आना लगभग असंभव है. सीमित मात्रा में केवल चीन और रूस से कुछ चीजें आती हैं, वो भी विशेष अनुमति और निगरानी में. मोबाइल फोन, कार, कपड़े, दवाइयां, यहां तक कि टूथपेस्ट और साबुन तक देश में ही बनाए जाते हैं.
यहां के नागरिक “सोसियलिस्ट फैशन” के अनुसार एक जैसे कपड़े पहनते हैं, ताकि समाज में किसी भी तरह का भेदभाव न हो. टीवी और इंटरनेट पूरी तरह नियंत्रित हैं. देश में इंटरनेट की जगह इंट्रानेट होता है, जो केवल सरकारी वेबसाइट्स तक ही सीमित रहता है. उत्तर कोरिया की पूरी अर्थव्यवस्था सेंट्रलाइज्ड है. हर फैक्ट्री, खेत, स्टोर और सेवा सरकारी नियंत्रण में है. यहां निजी व्यापार की कोई अवधारणा नहीं है. किसान जो भी उगाते हैं, वह सरकार को देना होता है और सरकार उसे राशनिंग सिस्टम के तहत जनता में बांटती है. ग्रामीण इलाकों में लोग घर पर उगाई गई सब्जियों से काम चलाते हैं और लोकल मार्केट्स से जरूरी चीजें जुटाते हैं.

क्यूबा 

क्यूबा का सिस्टम उत्तर कोरिया जितना सख्त नहीं है, लेकिन इसमें भी विदेशी वस्तुओं की भारी कमी है. 1960 के दशक की अमेरिकी कारें आज भी क्यूबा की सड़कों पर धड़ल्ले से चलती हैं. क्यूबाई लोग पुरानी चीजों को रिपेयर करके सालों तक इस्तेमाल करते हैं. इंटरनेट अब आना शुरू हुआ है लेकिन महंगा और सीमित है. वहां आज भी रेडियो, टीवी और फ्रिज के पुराने मॉडल चलन में हैं.
यहां अधिकतर उत्पादन और सेवाएं सरकार द्वारा नियंत्रित हैं. विदेशी उत्पाद केवल चीन, रूस और वेनेज़ुएला से सीमित रूप में आते हैं. अमेरिका से आयात लगभग पूरी तरह बैन है.

Advertisement

ईरान

ईरान पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण ‘मेड इन ईरान’ अभियान चला रहा है. वहां घरेलू ब्रांड्स को बढ़ावा दिया जाता है. कार, मोबाइल, और इलेक्ट्रॉनिक्स तक देश में ही बनते हैं. विदेशी कंपनियों की घुसपैठ बेहद कम है.

भूटान 

भूटान सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विदेशी प्रभावों पर नियंत्रण रखता है. वेस्टर्न प्रोडक्ट्स वहां बहुत कम हैं. भारत से ज़रूरी वस्तुएं आती हैं, लेकिन फिर भी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाता है.

तुर्कमेनिस्तान 

Advertisement

यह देश भी कंट्रोल्ड इकॉनॉमी की मिसाल है. वहां की सरकार मीडिया, इंटरनेट, मोबाइल सेवा, सभी कुछ पर नियंत्रण रखती है. विदेशी ब्रांड्स के लिए यहां कोई विशेष स्थान नहीं है.

यह भी पढ़ें

दुनिया जहां ग्लोबलाइजेशन की तरफ भाग रही है, वहीं कुछ देश ऐसे हैं जो आज भी अपने आत्मनिर्भर मॉडल पर अडिग हैं. उत्तर कोरिया और क्यूबा जैसे देश अपनी सीमित लेकिन संगठित अर्थव्यवस्था के जरिए यह दिखाते हैं कि स्वदेशी जीवनशैली भी एक विकल्प हो सकती है. हालांकि इन देशों की नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी होती है, लेकिन इनका स्वावलंबन का तरीका उन देशों के लिए एक उदाहरण बन सकता है, जो विदेशी निर्भरता से छुटकारा पाना चाहते हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें