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दुनिया में हिजाब को लेकर सख्त नियम, जानें कौन सा देश है सबसे कठोर
ईरान ने हाल ही में एक नया हिजाब कानून लागू किया है, जिसमें हिजाब न पहनने पर महिलाओं को 15 साल की जेल से लेकर सजा-ए-मौत तक की सख्त सजा का प्रावधान है। यह कानून 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद लागू सख्त नियमों का विस्तार है।
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हिजाब, जो कि इस्लाम धर्म में महिलाओं के लिए पहनावे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, आज के समय में केवल धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक भर नहीं रह गया है। यह कई देशों में राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन चुका है। कुछ देशों में इसे अनिवार्य किया गया है, तो कुछ में यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है। लेकिन हाल ही में ईरान में लागू किए गए नए हिजाब कानून ने एक बार फिर महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया था। हाल ही में, सरकार ने इस कानून को और सख्त बना दिया है। 13 दिसंबर से लागू हुए नए नियम के तहत, अनुच्छेद 60 के अंतर्गत सार्वजनिक नैतिकता के उल्लंघन, यानी हिजाब न पहनने पर 15 साल की जेल से लेकर सजा-ए-मौत तक का प्रावधान किया गया है।
साल 2022 में, ईरान में इस्लामी नैतिकता पुलिस द्वारा महसा अमिनी नामक एक महिला की हिरासत में मौत ने पूरे देश को आंदोलित कर दिया था। लाखों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर इस कानून का विरोध किया। कई जगहों पर महिलाएं अपने हिजाब जलाते हुए और खुले बालों के साथ प्रदर्शन करती नजर आईं। लेकिन ईरान सरकार ने इन आवाज़ों को कुचलने के लिए कानूनों को और सख्त बना दिया।
अफगानिस्तान: ईरान के बाद अफगानिस्तान में भी महिलाओं के लिए नियम अत्यंत सख्त हैं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद, महिलाओं के लिए हिजाब या बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया। अगर कोई महिला सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब के दिखाई देती है, तो उसे सार्वजनिक तौर पर कोड़े मारे जाते हैं। यह नियम न केवल महिलाओं की स्वतंत्रता पर चोट करता है, बल्कि उनके मनोबल और समाज में उनकी स्थिति को भी कमजोर करता है।
सऊदी अरब: सऊदी अरब में हिजाब पहनने को लेकर नियम लागू हैं, लेकिन हाल के वर्षों में महिलाओं को थोड़ी ढील दी गई है। हालांकि, सऊदी महिलाओं के लिए यह आजादी सीमित है और सार्वजनिक स्थानों पर उन्हें पारंपरिक पहनावे का पालन करना पड़ता है।
इंडोनेशिया: इंडोनेशिया में, जहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, हिजाब पहनना अनिवार्य है। अगर कोई महिला इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उसे जुर्माना देना पड़ता है।
पश्चिमी देश: दूसरी ओर, पश्चिमी देशों में हिजाब को लेकर नियम विपरीत हैं। फ्रांस, इटली और जर्मनी जैसे देशों में सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने पर प्रतिबंध है। फ्रांस में यह बहस काफी पुरानी है और इसे धर्मनिरपेक्षता और महिला अधिकारों के नाम पर लागू किया गया है।
हिजाब पहनने के लिए बनाए गए ये कठोर कानून सवाल खड़े करते हैं कि क्या यह महिलाओं की धार्मिक आजादी है या उनके अधिकारों का दमन? जहां एक तरफ मुस्लिम बहुल देशों में हिजाब को संस्कृति और परंपरा के नाम पर अनिवार्य किया जा रहा है, वहीं पश्चिमी देशों में इसे धर्मनिरपेक्षता के नाम पर प्रतिबंधित किया जा रहा है। दुनिया के विभिन्न देशों में हिजाब को लेकर चल रही बहस महिलाओं के अधिकारों की नई परिभाषा की मांग करती है। यह सवाल उठाना जरूरी है कि महिलाओं के पहनावे को लेकर कोई भी कानून आखिर क्यों बनाया जाए? क्या महिलाओं को यह स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए कि वे अपने कपड़े खुद चुन सकें?
ईरान और अफगानिस्तान जैसे देशों में हिजाब को लेकर बनाए गए कठोर कानून महिलाओं के अधिकारों पर गहरा प्रहार हैं। वहीं, पश्चिमी देशों में इसे प्रतिबंधित करना भी धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट करता है। हिजाब का मुद्दा महिलाओं के लिए एक व्यक्तिगत निर्णय होना चाहिए, न कि किसी देश की राजनीति या संस्कृति के नियंत्रण का।
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