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रूस-यूक्रेन से घट रहा भारतीय छात्रों का रुझान, मेडिकल शिक्षा के लिए नया डेस्टिनेशन बनकर उभरा यह देश, PAK भी चल रहा खतरनाक चाल

रूस-यूक्रेन जंग और मेडिकल की पढ़ाई में बिचौलियों की घुसपैठ और ठगी से परेशान भारतीय छात्रों के लिए एक नया देश मेडिकल डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है. दूसरी तरफ पाकिस्तान इन स्टूडेंट्स को अपने निवेश वाले कॉलेजों में फंसाने के लिए खतरनाक चाल चल रहा है.

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एक वक्त था जब मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए ज्यादातर भारतीय छात्र रूस या यूक्रेन जैसे देशों का रुख करते थे. लेकिन पिछले कई सालों से दोनों देशों के बीच जंग जारी है. और ये जंग कब थमेगी कुछ कहा नहीं जा सकता. यही वजह है कि बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र रूस और यूक्रेन छोड़कर भारत लौट आए. लेकिन अब ये छात्र फिर से पढ़ाई के लिए वापस लौट रहे हैं. लेकिन इसमें बड़ा बदलाव आया है. अब ऐसा लगता है कि भारतीय छात्र रूस या यूक्रेन नहीं जाना चाहते हैं क्योंकि उनकी पहली पसंद किर्गिस्तान बन कर उभर रहा है.


कभी युद्ध का साया तो कभी एजेंटों और बिचौलियों के झूठे वादे, लगातार हो रही परेशानी और ठगी की वजह से भारतीय मेडिकल छात्रों का मोह यूक्रेन और रूस जैसे देशों से टूटने लगा है. अब लोग चीन की सीमा से सटे किर्गिस्तान जैसे छोटे से देश को मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्राथमिकता देने लगे हैं. रूस-यूक्रेन की समस्या से सीख लेते हुए किर्गिस्तान जाने वाले छात्रों को भी सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि पाकिस्तान ने भी यहां के कई मेडिकल कॉलेजों में निवेश किया हुआ है और कम फीस में मेडिकल पढ़ाई कराने का दावा करते हुए छात्रों को भरमाने की कोशिश में लगा रहता है.

ऐसे में किर्गिस्तान में मेडिकल कॉलेजों के चयन में भी भारतीय छात्रों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. क्योंकि पाकिस्तानी निवेश वाले संस्थानों में ना तो ढंग की पढ़ाई होती है और ना ही इंटर्नशिप या क्लीनिकल एक्सपोजर दिया जाता है. इनका मकसद सिर्फ वाणिज्यिक लाभ लेना होता है. लेकिन इसके बावजूद किर्गिस्तान में कुछ ऐसे संस्थान भी हैं जो वाकई मेडिकल छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. ऐसा ही एक कॉलेज है बिश्केक स्थित इंटरनेशनल हायर स्कूल ऑफ मेडिसिन यानी IHSM, जो इन दिनों भारतीय मेडिकल छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है. इस मेडिकल संस्थान में भारतीय छात्रों को एक ऐसा माहौल दिया जाता है जिससे उन्हें अहसास ही नहीं होता कि वो विदेश में रह कर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं. क्योंकि उनके लिए पढ़ाई का बेहतर वातारण देने के साथ ही मेस में भारतीय खाना भी दिया जाता है. यहां भाषायी सहायता के साथ ही सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए कार्यक्रम भी समय-समय पर आयोजित किये जाते हैं.

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Indian मेडिकल कॉलेजों को मैच करने की IHSM की कोशिश

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एक IHSM बिश्केक की छात्रा ने बताया कि भारत में मैंने 20 अंकों से अपनी सीट खो दी और यकीन मानिए, मैं पूरी तरह से सदमे में चली गई थी लेकिन मेरे पिता बेहतर मेडिकल कॉलेज की तलाश में लगे रहे और IHSM को चुना. उन्होंने ये कॉलेज इसलिए चुना क्योंकि यह पूरी तरह से भारतीय वातावरण प्रदान करता है, जैसे भारतीय त्योहार मनाना, भारतीय मेस होना और सबसे महत्वपूर्ण बात, पढ़ाई, जो किसी भी भारतीय मेडिकल कॉलेज की तरह ही है.

किर्गिस्तान के इंटरनेशनल हायर स्कूल ऑफ मेडिसिन में पढ़ाई करने वाले एक और भारतीय छात्र मोहियुद्दीन अरमान खान ने भी इस मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि यहां मुझे पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास का भी बेहतरीन माहौल मिला. हमारे शिक्षक हमें अपने सबसे मूल्यवान कौशल और अपने सबसे मूल्यवान अनुभव प्रदान करते हैं. इस प्रकार यह हमें सभी विषयों के बारे में बहुत अच्छी स्थिति और बहुत अच्छी यादें और ज्ञान विकसित करने में मदद करता है, यहां हमें USMLE, CLAB के साथ-साथ भारत में नेशनल एग्जिट टेस्ट के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया है, साथ ही हमारे पास अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग परिसर हैं, डीन ऑफिस के लिए, हमारे पास इंटीग्रल पार्क में हमारी बिल्डिंग है, इसके अलावा हमारे पास सिमुलेशन सेंटर हैं, हमारे पास मॉर्फोलॉजिकल कैंपस हैं, हमारे पास वेदांत अस्पताल भी है जहां हम अपने क्लिनिकल कोर्स कर सकते हैं.

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कॉलेज के इनवायरमेंट के बारे में भारतीय छात्र मोहियुद्दीन अरमान खान ने बताया यहां बेहतर पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेटर, फुटबॉल, कबड्डी जैसी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का भी आयोजन किया जाता है. हमारे कॉलेज में अतिरिक्त गतिविधियाँ भी होती हैं जिनमें क्रिकेट टूर्नामेंट, फुटबॉल टूर्नामेंट, कबड्डी टूर्नामेंट और कुश्ती टूर्नामेंट शामिल हैं. इसके अलावा हमारे पास एक संपूर्ण सेंसेशन बैंड है जो सांस्कृतिक समूहों के लिए है. जिन छात्रों के पास नृत्य, गायन का उचित कौशल है या इस क्षेत्र में रुचि है, वे सेंसेशन समूह से संपर्क कर सकते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं, इसके अलावा हमारे पास ISM टुंडुक और स्टूडेंट काउंसिल जैसे और भी छात्र समूह हैं. हम यहाँ बहुत ही शांत, बहुत अध्ययनशील और बहुत ही आनंददायक वातावरण में रहे हैं. इसलिए यहाँ रहना और पढ़ाई करना वाकई बहुत बढ़िया है.

किर्गिस्तान में भी पाकिस्तानी साजिश को मिल रही भारतीय निवेशकों से चुनौती
 
शिक्षा विशेषज्ञ भी ये बात मानते हैं कि विदेशों में पढ़ाई के लिए कॉलेज का चुनाव करते वक्त एजेंटों या बिचौलियों से संपर्क साधने से बेहतर है कि इंटरनेट के दौर में खुद ही कॉलेजों के बारे में छानबीन की जाए. और हो सके तो सीधे कॉलेज से संपर्क साध कर पूरी जानकारी जुटाएं और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दाखिला लेना चाहिए. क्योंकि किर्गिस्तान में कई मेडिकल संस्थान अब इसी पद्धति पर काम कर रहे हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका भी सीमित हो रही है और छात्रों को बेहतर अनुभव भी मिल रहा है. 

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यही वजह है कि किर्गिस्तान में भारतीय निवेशकों की ओर से स्थापित किये गये संस्थान भारतीय मेडिकल छात्रों की पहली पसंद बन रहे हैं. क्योंकि ऐसे संस्थानों में बेहतर अकादमिक सुविधाओं के साथ ही सांस्कृतिक और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग की सुविधाएं भी दी जा रही हैं, जिसकी वजह से पाकिस्तानी निवेशकों की ओर से कम फीस में मेडिकल की पढ़ाई कराने के वादे के बावजूद भारतीय छात्र इंटरनेशनल हायर स्कूल ऑफ मेडिसिन जैसे मेडिकल संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं. ये बात वो भी जानते हैं कि पाकिस्तानी निवेशकों का कम फीस में मेडिकल की पढ़ाई कराने का दावा महज एक झांसे से कम नहीं है. इसलिए छात्रों और अभिभावकों को सावधानी और समझदारी से रास्ता चुनना होगा और तभी विदेश में मेडिकल शिक्षा एक सुरक्षित, किफायती और उपयोगी विकल्प साबित हो सकेगी.

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