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इन चेहरों के पीछे छुपा है अखिलेश की जीत का राज

समाजवादी पार्टी इस वक्त चार मजबूत संत्भों पर खड़ी है, जो उसे मजबूती दे रहे है ।जिनमें पहला नाम है डिंपल यादव, दुसरा नाम है शिवपाल यादव, तीसरा नाम धर्मेंद्र यादव और चौथा नाम है अनुराग भदौरिया ।अनुराग भदौरिया अखिलेश यादव की बात को मजबूती के साथ जनता के सामने रखने का काम करते है ।

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उत्तरप्रदेश की सियासत ने तीस साल पहले उस वक्त करवट ली थी, जब समाजवाद की विचारधारा को धारण कर एक पार्टी का जन्म हुआ। उस पार्टी का नाम था समाजवादी पार्टी और उससे मुखिया थे पद्म विभूषण से सम्मानित मुलायम सिंह यादव। मुलायम सिंह ने दबे-कुचले, पिछडे समाज के लिए दिन-रात एक कर अपने खून-पसीने से जिस पार्टी को सींचा था। उस पार्टी ने यूपी की सियासत पर कई दफा शासन किया । मुलायम के मजबूत साथी उनका साथ देते रहे। पार्टी का कारवां बढ़ता गया।और आज पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के उस कारवां को उनके बेटे और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगे बढ़ा रहे। अखिलेश यादव भी मुलायम सिंह यादव के नक्शेकदम पर चलते हुए, शहर से लेकर गांव तक । हर जरूरतमंद को अपने साथ लेकर आगे बढ़ रहे है। लेकिन इस कारवां में अखिलेश यादव अकेले नहीं है। कुछ ऐसे लोग है जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे है ।और इन लोगों को अगर आज इस पार्टी की जड़, या फिर इस पार्टी के मजबूत स्तंभ कहा जाए तो गलत नहीं होगा ।और स्तंभों में सबसे पहले नाम आता है उनकी पत्नी डिंपल यादव का। जो हर वक्त चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रही । वक्त बदला लेकिन डिंपल यादव का अखिलेश यादव पर अटूट विश्वास नहीं डगमगाया ।और 2024 के चुनाव में डिंपल परिवार की विरासत को बचाने के लिए मैनपुरी के ताल ठोक रहती है। डिंपल की ही तरह इस पार्टी के दूसरे स्तंभ है शिवपाल यादव।  शिवपाल यादव इस बार लोकसभा चुनाव में तो नहीं उतरे है। लेकिन पार्टी को चुनाव कैसे जिताना है वो इस रणनीति पर जरुर काम कर रहे है। अखिलेश के मार्गदर्शक साबित हुए शिवपाल यादव अक्सर भतीजे की ढाल बनकर खड़े दिखाई देते है। जब भी अखिलेश किसी मुश्किल में फंसते है तो उन्हें बस एक ही नाम याद आता है, और वो नाम है शिवपाल यादव।

समाजवादियों की इस लंबी श्रृंखला को मजबूती से जोड़ने के लिए एक और कड़ी है। जिसका नाम है धर्मेंद्र यादव ।अखिलेश के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले धर्मेंद्र यादव तीन बार लोकसभा के सदस्य रह चुके है । 2014 में तो मोदी लहर के बावजूद धर्मेंद्र यादव अडिग खड़े रहे और जीत कर ही दम लिया ।इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में भी धर्मेंद्र यादव आज़मगढ़ से चुनावी मैदान में है। और जनता का समर्थन देख ऐसा लगता है कि बस इंतजार चार जून का है ।


तो चलिए अब आपको बताते है इस पार्टी की बुलंद आवाज के बारे मे ।जो दिल्ली के शोर को चीरती हुई बड़े बड़े शहरों में, शहरों से कस्बों में, और कस्बे से गांव के जन जन तक पहुंचती है । और वो आवाज है समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की ।गांव की पृष्ठभूमि से आने वाले भदौरिया को आपने अक्सर टीवी पर समाजवादियों की आवाज को बुलंद करते देखा होगा । सत्ताधारी दल से सवाल पूछते देखा होगा । युवाओं और पिछड़ों की आवाज बनते देखा होगा ।सवाल कैसा भी हो, अनुराग भदौरिया जवाब सटीक देते है ।मुद्दा कोई भी हो बड़ी ही चतुराई से सामने वाले निशब्द कर देते है । और शायद यहीं कारण है कि अनुराग भदौरिया अखिलेश के सबसे खास नेताओं की लिस्ट में सबसे उपर स्थान रखते है । बिना किसी लालसा के पिछडों, दलितों , आदिवासियों के उत्थान के लिए काम कर रहे है। अखिलेश यादव की बात को अगर ईमानदारी से जनता तक कोई पहुंचा सकता है तो वो नाम है अनुराग भदौरिया ।परिवार के बाहर अगर किसी पर अखिलेश को सबसे ज्यादा भरोसा है तो वो नाम भी अनुराग भदौरिया ही हैं।
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