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अंग्रेजों ने भारत को गुलाम बनाया, लेकिन गोवा ब्रिटिश हुकूमत से बचा रहा?

अंग्रेजों ने लगभग 200 साल तक भारत पर राज किया, लेकिन उनकी एक बड़ी ख्वाहिश कभी पूरी नहीं हो सकी – गोवा पर कब्ज़ा। जब अंग्रेज भारत आए, तब गोवा पहले से ही पुर्तगालियों के कब्जे में था। ब्रिटिश हुकूमत ने कई बार इसे जीतने की कोशिश की, लेकिन हर बार नाकाम रही। 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन गोवा अभी भी पुर्तगाल के अधीन था।

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भारत पर लगभग 200 साल तक शासन करने वाले अंग्रेजों ने देश के हर कोने को अपनी सत्ता के अधीन किया। बंगाल से लेकर पंजाब तक, दक्षिण के राज्यों से लेकर उत्तर की पहाड़ियों तक, अंग्रेजों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। लेकिन इस विशाल साम्राज्य में एक राज्य ऐसा भी था, जिसकी जमीन पर अंग्रेज कभी अपना झंडा नहीं फहरा सके। यह राज्य था गोवा।

गोवा अंग्रेजों की नाकाम हसरत

जब अंग्रेज भारत में आए, तब गोवा पर पुर्तगालियों का शासन था। पुर्तगाली, 1510 से ही गोवा पर राज कर रहे थे और उन्होंने इसे अपने एशियाई साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना रखा था। अंग्रेजों ने गोवा पर कब्जा करने की कई बार कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें असफलता ही हाथ लगी। अंग्रेजों ने 18वीं और 19वीं शताब्दी में कई बार पुर्तगालियों से संघर्ष किया। 1808-1811 के दौरान, जब नेपोलियन युद्धों के चलते पुर्तगाल कमजोर हो गया था, अंग्रेजों ने मौके का फायदा उठाते हुए गोवा पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। हालांकि, यह प्रयास केवल अस्थायी रूप से सफल रहा और पुर्तगाली वहां अपनी सत्ता बनाए रखने में सफल रहे।

पुर्तगाली हुकूमत का गढ़

जहां एक ओर अंग्रेज पूरे भारत में अपनी सत्ता जमा चुके थे, वहीं गोवा पुर्तगालियों के शासन में बना रहा। अंग्रेजों के पास मजबूत सेना और बेहतर संसाधन थे, लेकिन फिर भी वे गोवा पर कब्जा नहीं कर सके। इसकी कुछ प्रमुख वजहें थीं।

पुर्तगालियों की रणनीतिक स्थिति: पुर्तगाली पहले से ही समुद्री मार्गों पर मजबूत पकड़ रखते थे। उनका नौसैनिक बेड़ा मजबूत था, जिससे अंग्रेजों को गोवा पर हमला करने में कठिनाई होती थी।

यूरोपीय गठबंधन: पुर्तगाल और ब्रिटेन दोनों यूरोपीय शक्तियां थीं और कई बार उनके बीच राजनीतिक समीकरण ऐसे बने कि अंग्रेजों को पुर्तगाल पर खुलकर हमला करना मुश्किल हो गया।

स्थानीय समर्थन: गोवा के कई व्यापारी और स्थानीय समुदाय पुर्तगाली शासन को स्वीकार कर चुके थे, जिससे वहां अंग्रेजों के लिए विद्रोह को बढ़ावा देना मुश्किल था।

भारत की आज़ादी के बाद भी गोवा रहा पराया

1947 में जब भारत को अंग्रेजों से आज़ादी मिली, तब भी गोवा पुर्तगाल के कब्जे में था। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पुर्तगालियों से बातचीत के जरिए गोवा को भारत में मिलाने की कोशिश की, लेकिन पुर्तगाली सरकार इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुई। उन्होंने गोवा को अपना अभिन्न अंग मानते हुए इसे भारत को सौंपने से इनकार कर दिया।

भारत सरकार ने 1961 में गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त कराने के लिए सैन्य कार्रवाई करने का फैसला किया। 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' के तहत गोवा में प्रवेश किया और मात्र 36 घंटे में पुर्तगालियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही, 450 सालों के लंबे पुर्तगाली शासन का अंत हुआ और गोवा भारत का हिस्सा बन गया।

अंग्रेजों ने भारत के हर हिस्से को अपने नियंत्रण में लिया, लेकिन गोवा हमेशा उनकी पहुंच से बाहर रहा। वे चाहते थे कि गोवा उनकी व्यापारिक और नौसैनिक गतिविधियों का हिस्सा बने, लेकिन पुर्तगालियों ने उन्हें कभी ऐसा करने नहीं दिया। आज, गोवा भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है और पर्यटन के लिए मशहूर है। लेकिन इतिहास के पन्नों में यह दर्ज है कि यह वही जगह थी, जो अंग्रेजों की हुकूमत के नक्शे पर कभी नहीं आई। यही वजह है कि गोवा, ब्रिटिश साम्राज्य की सबसे अधूरी हसरतों में से एक बना रहा।
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