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'टकराव नहीं, सहयोग से हुआ उदय', इस्लामिक देश की मीडिया ने माना भारत का लोहा, बताया 21वीं सदी का ग्लोबल लीडर

इस्लामिक देशों की एक बड़ी शक्ति UAE की मीडिया ने भी भारत के उदय को मान लिया है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वो 21वीं सदी की सबसे प्रभावशाली उभरती ताकतों में से एक बन गया है. इसमें बताया गया है कि कैसे हिंदुस्तान ने टकराव की जगह सहयोग की नीति को अपनाकर पूरी तस्वीर पलट दी है.

PM Modi (File Photo)
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भारत दुनिया की तेजी से उभरती हुए आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक शक्ति के तौर पर उभर रहा है. उसने पहले ब्रिटेन को पछाड़ा और फिर जापान को, फिर बन गया दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी. इतना ही नहीं वो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने और विकास करने वाला देश है. वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका भी बढ़ गई है. उसे ग्लोबल साउथ का लीडर भी कहा जाने लगा है. मल्टीपोलर वर्ल्ड में पावर बैलेंस के लिए दुनिया अब भारत के साथ हाथ मिलाना चाह रही हैं. इसलिए तो ट्रंप की बुली से परेशान अमेरिकी अलायंस के पार्टनर मसलन कि ब्रिटेन, ईयू सहित कई देशों ने भारत के साथ ट्रेड डील किए और ना सिर्फ अपने लिए विकल्प की तलाश की बल्कि ट्रंप को बताया कि वो अब अकेला नहीं है, उसे दबाया नहीं जा सकता है. 

इसी का नतीजा है कि ट्रंप को भारत के साथ टैरिफ पर हार्डलाइन से पीछे हटना पड़ा और उन्हें 50% की पेनाल्टी वाली टैरिफ को घटाकर 18% करना पड़ा. अब इस डील की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. कहा जा रहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील में अमेरिका की कमजोरी साफ दिखी है. इतना ही नहीं दुनियाभर की मीडिया इंडिया को क्लियरकट विनर करार दे रही है. 

आपको बताएं कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं की लिस्ट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम टॉप पर है. पीएम मोदी की ये लोकप्रियता भारत को लेकर उनके दृष्टिकोण और नेतृत्व की वजह से है. इसका ताजा उदाहरण संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट से साफ जाहिर है. पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत जिस रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है, दुनिया के तमाम देश इसकी गवाह हैं. 

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इस्लामिक देश की मीडिया में बजा भारत का डंका!

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यूएई के खलीज टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत ने आर्थिक और सामाजिक बदलाव देखा है. भारत में आए इस बदलाव ने देश को 21वीं सदी की सबसे प्रभावशाली उभरती ताकतों में से एक बना दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के विकास की कहानी सिर्फ कुछ मेट्रोपॉलिटन शहरों या क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि यह कई राज्यों में फैली हुई है. गुजरात ने पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश का फायदा उठाकर एक इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर अपनी भूमिका को मजबूत करना जारी रखा है.

भारत के ग्रोथ की दुनियाभर में चर्चा

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रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि तमिलनाडु ने ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में ऊंचाई हासिल की है. इसके साथ ही तमिलनाडु ने स्किलिंग और एक्सपोर्ट्स में भी निवेश किया है. रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई वित्तीय सेवाओं के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और नवाचार से चलने वाले उद्यम के साथ देश के विकास के रास्ते पर सबसे आगे है.

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि देश के जिन राज्यों को कभी आर्थिक रूप से पिछड़ा माना जाता था, वे भी विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं. इसमें सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश का है. उत्तर प्रदेश ने एक्सप्रेसवे, औद्योगिक क्षेत्र और शहरी अवसंरचना में भारी निवेश किया है, जिससे शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और निवेश के नए रास्ते खुले हैं.

क्षेत्रवार, सेक्टरवाइज राज्यों का ग्रोथ फोकस!

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खलीज टाइम्स ने कहा कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने कृषि से जुड़े उद्योगों, क्लीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स पर फोकस किया है. इसके अलावा, ओडिशा मेटल्स, मिनरल्स और विनिर्माण के लिए एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. इसे बेहतर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से समर्थन मिला है.

IT, टेक, AI में साउदर्न स्टेट्स आगे!

यूएई की मीडिया रिपोर्ट्स में आगे कहा गया कि दक्षिणी राज्यों में, कर्नाटक, खासकर बेंगलुरु ने आईटी सर्विस से आगे बढ़कर स्टार्टअप रिसर्च और नई तकनीकों में टेक्नोलॉजी और नावचार के हब के तौर पर अपनी वैश्विक पहचान मजबूत की है. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल सर्विस में अपनी क्षमताएं मजबूत की हैं. इसकी वजह से एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी हुई और रोजगार में मदद मिली है.

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रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पिछले दशक के सबसे बड़े बदलावों में भारत का संस्थागत और सामाजिक अवसंरचना में निवेश भी शामिल है. मजबूत बाल कल्याण प्रणाली ने राज्यों में मानव पूंजी निर्माण को मजबूती दी है.

भारत के घरेलू बदलावों की वजह से दुनिया में उसकी पहचान मज़बूत हुई है. देश ने नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ पार्टनरशिप गहरी की है. उसे अब ट्रेड, टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट एक्शन, हेल्थकेयर और मानवीय सहायता में एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर देखा जाता है. भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों, डिजिटल गवर्नेंस के अनुभव और वेलफेयर पर आधारित ग्रोथ मॉडल ने ग्लोबल मंच पर उसकी विश्वसनीयता बढ़ाई है.

टकराव नहीं सहयोग से हुआ भारत का उदय

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रिपोर्ट में सबसे ज़रूरी बात यह बताई गई है कि भारत का उदय दुनिया के साथ टकराव के बजाय सहयोग से संभव हुआ है. विकास, इनोवेशन और पार्टनरशिप पर ज़ोर देकर भारत ने खुद को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित किया है जो साझा विकास और आपसी फायदे चाहता है. लोकतांत्रिक शासन, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक महत्वाकांक्षा को एक साथ लाने की इसकी क्षमता ने तेज़ी से बदलती दुनिया में इसकी स्थिति को मज़बूत किया है.

चुनौती मौजूद लेकिन दिशा स्पष्ट!

हालांकि रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि चुनौतियां अभी भी हैं, जैसा कि किसी भी बड़े और जटिल देश के लिए होता है. रोज़गार सृजन, शहरी प्रबंधन और सामाजिक समानता पर लगातार ध्यान देने की ज़रूरत होगी. फिर भी, पिछले दशक को जो बात अलग बनाती है, वह है दिशा की स्पष्टता. एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का उदय किसी एक नीति या क्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि राज्यों, क्षेत्रों, संस्थानों और समुदायों में संचयी प्रगति का परिणाम है.

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कदम दर कदम भारत आकांक्षा से क्षमता की ओर बढ़ा है. जैसे-जैसे अगला दशक सामने आएगा, इसका प्रभाव न केवल आकार या पैमाने से, बल्कि इसके विकास की निरंतरता, समावेशिता और विश्वसनीयता से भी तय होगा.

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