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‘हिंदुओं का नरसंहार, चुप रहे गांधी…’ गोडसे का वो भाषण जिसे सुन भावुक हो गए थे जज!

गांधीजी की हत्या के इतने सालों बाद भी गोडसे को लेकर समाज में दो तरह के विचार हैं. एक जो गोडसे को हत्यारा मानता है दोषी मानता है गलत मानता है. दूसरा वो वर्ग है जो गोडसे के विचारों को सही ठहराता है. इसकी वजह गोडसे का वो स्पीच है जो उन्होंने दोष साबित होने के बाद कोर्ट में दिया था.

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जब पूरा देश 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती मना रहा उस समय गांधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का जिक्र होना भी स्वभाविक है. गांधीजी की हत्या के इतने सालों बाद भी गोडसे को लेकर समाज में दो तरह के विचार हैं. एक जो गोडसे को हत्यारा मानता है दोषी मानता है गलत मानता है. दूसरा वो वर्ग है जो गोडसे के विचारों को सही ठहराता है. इसकी वजह गोडसे का वो स्पीच है जो उन्होंने दोष साबित होने के बाद अदालत में दिया था. 

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी को गोली मारी गई थी. गांधी की हत्या के आरोप में नाथूराम गोडसे सहित 17 अभियुक्तों पर मुकदमा चला था. सुनवाई के दौरान नाथूराम गोडसे ने अदालत में अपना पक्ष रखा था. उस समय गोडसे ने जो स्पीच दी थी उसे सुनकर जज भी भावुक हो गए थे. पढ़िए नाथूराम गोडसे का वो पूरा स्पीच

‘मुसलमान मनमानी कर रहे थे’

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सम्मान ,कर्तव्य और अपने देशवासियों के प्रति प्यार कभी-कभी हमें अहिंसा के सिद्धांत से हटने के लिए बाध्य कर देता है. मैं कभी यह नहीं मान सकता कि किसी आक्रामण का सशस्त्र प्रतिरोध करना कभी गलत या अन्याय पूर्ण भी हो सकता है. प्रतिरोध करना और अगर संभव हो तो ऐसे शत्रु को बलपूर्वक वश में करना, मैं एक धार्मिक और नैतिक कर्तव्य मानता हूं. मुसलमान अपनी मनमानी कर रहे थे या तो कांग्रेस उनकी इच्छा के सामने आत्मसर्पण कर दे और उनकी सनक, मनमानी और आदिम रवैये के स्वर में स्वर मिलाए या उनके बिना काम चलाए. गांधी अकेले ही हर चीज और व्यक्ति के निर्णायक थे. वह जूरी और जज दोनों थे.

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गांधी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदी भाषा के सौंदर्य और सुन्दरता के साथ बलात्कार किया। गांधी के सारे प्रयोग केवल और केवल हिंदुओं की कीमत पर किए जाते थे. जो कांग्रेस अपनी देशभक्ति और समाजवाद का दंभ भरा करती थी, उसी ने गुप्त रूप से बंदूक की नोक पर पकिस्तान को स्वीकार कर लिया और जिन्ना के सामने नीचता से आत्मसमर्पण कर दिया. मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के कारण भारत माता के टुकड़े कर दिए गए और 15 अगस्त 1947 के बाद देश का एक तिहाई भाग हमारे लिए ही विदेशी भूमि बन गई.  नेहरू और उनकी भीड़ की स्वीकृति के साथ ही एक धर्म के आधार पर राज्य बना दिया गया? जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने गांधी की सहमति से इस देश को काट डाला, जिसे हम पूजा की वस्तु मानते हैं तो मेरा मस्तिष्क भयंकर क्रोध से भर गया. मैं साहस पूर्वक कहता हूं कि गांधी अपने कर्तव्य में असफल हो गए थे. 

‘हिंदुओं को बर्बाद किया’

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नाथूराम गोडसे ने कहा था, मेरी गोलियां एक ऐसे व्यक्ति पर चलाई गई थीं, जिसकी नीतियों और कार्यों से करोड़ों हिंदुओं को केवल बर्बादी और विनाश ही मिला. क्योंकि उनके अपराधों की सजा के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी. इसलिए मैंने इस घातक रास्ते का अनुसरण किया. मैं अपने लिए माफ़ी की गुजारिश नहीं करूंगा, जो मैंने किया उस पर मुझे गर्व है. मुझे कोई संदेह नहीं है कि इतिहास के ईमानदार लेखक मेरे कार्य का वजन तोलकर भविष्य में किसी दिन इसका सही मूल्यांकन करेंगे. 

जलियांवाला से लेकर भगत सिंह की फांसी तक

नाथूराम गोडसे ने कहा था, अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड से देशवासी आक्रोश में थे. वह चाहते थे इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए. गांधी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया. भगत सिंह और उसके साथियों के मृत्युदंड के निर्णय से सारा देश हताश था और गांधी की ओर देख रहा था कि वह इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, लेकिन जनसामान्य की इस मांग को अस्वीकार कर दिया.

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गोडसे ने कहा, मोहम्मद अली जिन्ना जैसे मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में गांधी ने खिलाफत आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की. केरल के मोपला में मुसलमानों ने वहां के हिंदुओं के साथ मारकाट की. जिसमें लगभग 1500 हिन्दू मारे गए और दो हजार से ज्यादा लोगों को मुसलमान बना लिया गया. गांधी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया।

नाथूराम गोडसे के भाषण पर लगी थी रोक 

नाथूराम गोडसे ने कोर्ट में लंबा भाषण दिया था. जो एक हफ्ते चला और बाद में सरकार ने इस पर रोक लगा दी. साल 1968 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इससे रोक हटा ली थी. इसके लिए नाथूराम गोडसे के छोटे भाई गोपाल गोडसे ने लंबी लड़ाई लड़ी. उनका पूरा बयान नाथूराम गोडसे की किताब Why I Assassinated Gandhi में शामिल किया गया है. 

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नाथूराम गोडसे ने कोर्ट में ये भी कहा था कि, मैंने दूसरे भारतीय देशभक्तों और नेताओं के चरित्र भी पढ़े हैं. जिन्होंने गांधीजी से ज्यादा बलिदान किए हैं. 

फैसला सुनाने वाले जज ने क्यों कहा- निर्दोष होते नाथूराम 

नाथूराम गोडसे पर फैसला सुनाने वाले जज जीडी खोसला ने अपनी किताब  The Murder of the Mahatma में बड़ा खुलासा किया था. उन्होंने कहा था, जिस दिन गोडसे ने अपना पक्ष अदालत में रखा था. उस दिन वहां मौजूद लोगों की आंखों मे आंसू थे और अगर अदालत में दर्शकों को जूरी का दर्जा दिया जाता तो नाथूराम गोडसे निर्दोष करार दिए जाते.

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गोडसे ने गांधीजी की नीतियों को देश के लिए हानिकारक बताया था. उन्होंने कहा था उन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण भारत को कमजोर किया था. उन्होंने हत्या को एक धार्मिक और नैतिक कर्तव्य बताया, जो देश के लिए जरूरी था. गोडसे ने स्वीकार किया था कि गांधीजी की हत्या का पूरा दोष केवल उसी का है और उसके किसी साथी की इसमें कोई भूमिका नहीं थी. 



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