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रुद्राभिषेक से सुंदरकांड तक…आचार्य आशीष सेमवाल के जन्मदिन पर वैदिक मंत्रों से गूंजा Punarnava Resort का परिसर, दुनिया को दिया बड़ा संदेश

सावन के पवित्र महीने में पुनर्नवा रिज़ॉर्ट एंड वेलनेस सेंटर के संस्थापक आचार्य आशीष सेमवाल जी का जन्मदिन रुद्राभिषेक, सुंदरकांड, वृक्षारोपण और 'प्रकृति आरती' जैसे आध्यात्मिक आयोजनों के साथ मनाया गया. यह जन्मदिन केवल उत्सव नहीं, एक संदेश था संस्कृति, प्रकृति और धर्म से जुड़ने का. दिखावे से हटकर सनातन मूल्यों को अपनाते हुए उन्होंने समाज को एक नई दिशा दी.

रुद्राभिषेक करते हुए आचार्य आशीष सेमवाल
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जीवन का सच्चा उत्सव तब है, जब हम उसे दिखावे से नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और खुद को खुद से जोड़ने का प्रयास करते हैं. 5 अगस्त 2025 को पुनर्नवा रिज़ॉर्ट एंड वेलनेस सेंटर के संस्थापक आचार्य आशीष सेमवाल जी का जन्मदिन संस्कृति का उत्सव बन गया एक ऐसा दिन बन गया, जो केवल एक व्यक्ति के जन्म का उत्सव नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गया.

जहां आज इस समाज का एक बड़ा वर्ग अपने जन्मदिवस को वेस्टर्न कल्चर के प्रभाव में DJ पार्टियों, महंगी पार्टीज़ और दिखावे के साथ मनाता है, ऐसे में आचार्य सेमवाल जी ने अपने जन्मदिन पर एक ऐसा उदाहरण पेश किया जो करोड़ों लोगों को ना सिर्फ प्रेरणा देता है बल्कि एक नई राह भी दिखाता है, वो भी अपनी जड़ों की तरफ और अपनी संस्कृति की तरफ. 

रुद्राभिषेक का आयोजन: देहरादून की वादियों में महादेव की महिमा 

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पुनर्नवा वेलनेस रिसोर्ट में आयोजित रुद्राभिषेक एक ऐसा अवसर था, जिसने यहाँ मौजूद हर व्यक्ति के हृदय को शिव भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि जब श्रद्धा, प्रकृति, और संस्कृति एक साथ आते हैं, तो वह स्थान स्वयं एक तीर्थ बन जाता है.  

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जन्मदिन से एक दिन पूर्व, देहरादून के पुनर्नवा रिज़ॉर्ट की शांत वादियों में सावन के पवित्र महीने को समर्पित रुद्राभिषेक का आयोजन हुआ. इस आयोजन में आचार्य आशीष सेमवाल जी ने शिवलिंग का विधिवत जलाभिषेक किया गया. जिसमें गंगा जल, बेलपत्र, भस्म और वैदिक मंत्रों की ध्वनि से सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया.

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रुद्राभिषेक केवल एक कर्मकांड नहीं था, यह प्रकृति और पर्यावरण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का भी माध्यम था. पुनर्नवा की भूमि पर महादेव का यह पूजन मानो यह दर्शा रहा था कि जब हम प्रकृति से जुड़ते हैं, तभी जीवन में सच्ची शांति और उन्नति आती है.

सुंदरकांड का आयोजन: भक्ति में डूबीं पुनर्नवा की वादियाँ

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रुद्राभिषेक के बाद आचार्य आशीष सेमवाल ने अपने जन्मदिन पर सुंदरकांड का आयोजन भी किया. जिसमें कई श्रद्धालु, परिवार और सनातन प्रेमी इस आयोजन में एकत्रित हुए. जैसे ही रामचरितमानस का सुंदरकांड आरंभ हुआ, पूरा वातावरण भक्तिरस से डूब गया.  "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर..." की गूंज जब गूंजती तो हृदय स्वतः झुक जाता, और जब जय श्रीराम के जयकारे उठते, तो ऐसा प्रतीत होता मानो प्रभु श्रीराम, सीता माता और हनुमानजी स्वयं उस वातावरण में उपस्थित हों.

सुंदरकांड केवल पाठ नहीं था बल्कि यह एक सामूहिक ध्यान, एक भावनात्मक शुद्धिकरण और संस्कारों का संचार था. बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों जो भी वहां मौजूद थे सभी की आँखों में भक्ति की चमक साफ़ झलक रही थी.

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दुनिया को दिया बड़ा संदेश

इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में भी ऐसे आयोजन लोगों को आत्मिक शांति और दिशा प्रदान कर सकते हैं. अपने जन्मदिन को एक आध्यात्मिक उत्सव में बदलने का आचार्य आशीष सेमवाल जी का यह संकल्प आज के समय में अद्भुत्त है. अपने जन्मदिन पर उन्होंने पूरी दुनिया को यह सीख दी कि हम चाहे कितनी भी ऊँचाइयों को छू लें, लेकिन हमारी संस्कृति, धर्म और प्रकृति के प्रति निष्ठा बनी रहनी चाहिए.

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सिर्फ इतना ही नहीं ये सिलसिला यहाँ नहीं रुका, आचार्य आशीष सेमवाल के जन्मदिन पर PM मोदी और उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी की मुहिम 'एक पेड़ माँ के नाम' के तहत वृक्षारोपण का आयोजन भी किया, जिसके तहत सैकड़ों पेड़ लगाए गए. और सबसे ख़ास बात इस ख़ास मौके पर 'गंगा आरती' के तर्ज पर बानी 'प्रकृति आरती' का भी आयोजन भी किया गया. जो वास्तव में एक अनोखी और सुंदर आरती थी.

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