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झुंझलाहट से इनोवेशन तक: दो भाइयों की नई सोच से बदलेगा वैश्विक व्यापार

जब सागर चौहान और हर्ष चौहान एक दुकानदार से दूसरे तक पहुंचे तो एक पैटर्न साफ़ होता गया कि उत्पाद कई बिचौलियों के हाथों से गुजरते थे, जो कीमत बढ़ाते थे. जो कारीगर इन सामानों को बनाते थे, उन्हें सबसे कम मिलता था.

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जब सागर चौहान और हर्ष चौहान एक साइड प्रोजेक्ट के लिए फर्नीचर खोजने निकले, तो उन्होंने नहीं सोचा था कि यही तलाश उनकी अगली बड़ी शुरुआत की वजह बन जाएगी. भारत के सबसे बड़े थोक बाजारों में से एक में खरीदारी करते हुए उन्हें एक सच्चाई ने झकझोर दिया और झुंझला भी दिया.

जैसे-जैसे वे एक दुकानदार से दूसरे तक पहुंचे तो एक पैटर्न साफ़ होता गया कि उत्पाद कई बिचौलियों के हाथों से गुजरते थे, जो कीमत तो बढ़ाते थे. जो कारीगर इन सामानों को बनाते थे, उन्हें सबसे कम मिलता था, जबकि ग्राहक सबसे अधिक भुगतान करता था. यही असंतुलन दोनों भाइयों को चुभ गया.

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बाजार में भटकने का अनुभव बना 'सेतु स्टोर' की नींव

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कुछ महीनों बाद, यही अनुभव 'सेतु स्टोर' की नींव बना. एक ऐसा स्टार्टअप जो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का नया रास्ता तलाश रहा है. ‘सेतु’, जिसका अर्थ है ‘पुल’, उनके उद्देश्य को दर्शाता है: निर्माता और खरीदारों को सीधे जोड़ना और प्रक्रिया को सरल बनाना.

छुपी प्रतिभा को सामने लाना मकसद

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सागर चौहान कहते हैं-“इन बाजारों में एक शांत-सी प्रतिभा छुपी है, जो अक्सर अनदेखी रह जाती है. हम उस प्रतिभा को सामने लाना चाहते हैं, लेकिन शोर से नहीं, बल्कि स्पष्टता और पहुंच से.” 

वैश्विक व्यापार की जटिलता का तकनीक-सक्षम समाधान

उन्होंने बताया कि अपने समाधान को आकार देते समय, एक बात बार-बार सामने आती रही कि वैश्विक व्यापार टूटा हुआ नहीं है, बल्कि बस अनावश्यक रूप से जटिल है. “हम एक टेक-सक्षम समाधान बना रहे हैं जो वैश्विक व्यापार में मौजूद घर्षण को कम करे. एक ऐसी परेशानी जिसे हमने खुद महसूस किया है,”

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हर्ष चौहान ने बताया- “यह उत्पाद अभी शुरुआती चरण में है, जिसे हमने असली खरीदारों, विक्रेताओं और लॉजिस्टिक्स भागीदारों से बातचीत के आधार पर आकार दिया है.” 

उनकी इसी सोच को पहचान मिली है IIT बॉम्बे के ‘IDEAS प्रोग्राम’ में जगह मिलकर. यह प्रतिष्ठित इनक्यूबेशन पहल संस्थान के पूर्व छात्रों द्वारा समर्थित है. यह कार्यक्रम मेंटरशिप, शुरुआती मार्गदर्शन और एक संरचित प्रक्रिया में विचारों को परखने का मौका देता है. हर्ष के लिए, जो IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं, यह एक ‘फुल सर्कल’ पल है. वहीं सागर, जो इकोनॉमिक्स में स्नातक हैं और दूसरी बार उद्यमिता की राह पर हैं, अपने संचालन अनुभव को एक बड़े उद्देश्य में ढाल रहे हैं.

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नए प्रयासों का हिस्सा है ‘सेतु स्टोर’

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हालांकि ‘सेतु स्टोर’ अभी शुरुआती सफ़र में है, लेकिन यह उन नए प्रयासों का हिस्सा है जो व्यक्तिगत अनुभवों से जन्मे हैं. ऐसे बिज़नेस जो कॉरपोरेट बोर्डरूम से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की चुनौतियों से प्रेरित हुए हैं. नोएडा की संकरी दुकानों से लेकर विदेशी खरीदारों से डिजिटल मुलाकातों तक, ये दोनों भाई साबित कर रहे हैं कि अगर दृष्टि स्पष्ट हो, तो एक थकाऊ दोपहर भी एक बड़े सपने की शुरुआत बन सकती है.

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