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क्या डीजे के तेज गानों से बढ़ता है हार्ट अटैक का जोखिम? जानें कितनी आवाज दिल के लिए है खतरनाक?

क्या आपको पता है कि डीजे की तेज आवाज हमारे दिल के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है? हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें कहा गया कि डीजे की तेज आवाज से लोगों के ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। क्या ये सच में मुमकिन है? चलिए इस मुद्दे पर गहराई से समझने की कोशिश करते हैं।

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क्या तेज आवाज में बजते डीजे से दिल का दौरा पड़ सकता है? हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में यह सवाल उठाया गया है। जबलपुर के कुछ वरिष्ठ नागरिकों द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया कि डीजे की तेज आवाज से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और इससे हृदयाघात का जोखिम भी बढ़ सकता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपील की है कि सरकारें और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाएं।
DJ की तेज आवाज और दिल पर असर
हम जब भी किसी पार्टी या समारोह में जाते हैं, तो डीजे की तेज ध्वनि हम सभी का ध्यान खींचती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये तेज आवाज हमारी सेहत पर कितना असर डाल सकती है? विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ध्वनि का स्तर 75 डेसीबल से ज्यादा होता है, तो ये इंसान के लिए खतरनाक हो सकता है। यही वजह है कि अत्यधिक तेज आवाज सुनने से कुछ लोगों को सिर दर्द, ब्लड प्रेशर बढ़ना, और यहां तक कि दिल का दौरा तक हो सकता है।
वैज्ञानिक प्रमाण क्या कहते हैं?
ध्वनि प्रदूषण पर कई शोध हो चुके हैं, जिनमें यह साबित हुआ है कि लगातार तेज आवाज के संपर्क में आने से दिल पर दबाव बढ़ता है। मस्तिष्क में तनाव पैदा होता है, जिससे दिल की धड़कनें अनियमित हो सकती हैं। एक अध्ययन के अनुसार, ध्वनि का स्तर जितना ज्यादा होगा, उतनी ही ज्यादा दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। खासकर 85 डेसीबल से अधिक की आवाज लंबे समय तक सुनने पर हृदयाघात का खतरा 20-30% तक बढ़ सकता है।
हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
मध्य प्रदेश के कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर डीजे के अत्यधिक उपयोग पर रोक लगाने की मांग की। याचिका में यह बताया गया कि कैसे तेज आवाज से लोग शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। नवरात्र के दौरान भोपाल में एक 13 साल के बच्चे की मौत का मामला भी सामने आया, जिसका कारण डीजे की तेज ध्वनि मानी जा रही है। इस याचिका के जवाब में, एमपी हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस गंभीर मुद्दे पर प्रतिवादियों से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है, और अगली सुनवाई चार हफ्तों बाद निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश की गई विशेषज्ञों की रिपोर्ट में बताया गया है कि किस प्रकार अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण न केवल हृदय रोग बल्कि अन्य बीमारियों का भी कारण बन सकता है। दुनिया के कई देशों ने ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून बनाए हैं, और भारत में भी इस दिशा में कदम उठाने की मांग की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और कानून

भारत में ध्वनि प्रदूषण से निपटने के लिए कई नियम बनाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में ध्यान देते हुए कहा कि रात 10 बजे के बाद डीजे या तेज आवाज वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध होना चाहिए। इसके बावजूद, इन नियमों का पालन सख्ती से नहीं हो रहा है। खासकर धार्मिक त्योहारों और शादियों के दौरान, डीजे का अत्यधिक उपयोग होता है, जिससे लोग परेशान होते हैं।

अब सवाल उठता है कि क्या हम खुद को इस ध्वनि प्रदूषण से बचा सकते हैं? इसके लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे ईयर प्लग्स का इस्तेमाल करना। अधिक शोर-शराबे वाली जगहों से दूर रहना। ध्वनि नियंत्रण नियमों का पालन करना और दूसरों को भी जागरूक करना।

वर्तमान में देश के कई हिस्सों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में डीजे का अत्यधिक उपयोग देखा जाता है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर ध्यान देना जरूरी है। यह जनहित याचिका इस बात पर जोर देती है कि नियमों का उल्लंघन न केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा है, बल्कि यह सीधे लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही, यह मामला भी उठाया गया कि अगर इस ध्वनि प्रदूषण पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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