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BJP का अनोखा फॉर्मूला, कम चर्चित नेताओं को CM बनाने की क्या है वजह?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) अक्सर नए और कम चर्चित नेताओं को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका देती है। यह रणनीति सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है। योगी आदित्यनाथ, देवेंद्र फडणवीस, भूपेंद्र पटेल और त्रिवेंद्र सिंह रावत जैसे कई नेताओं को बीजेपी ने तब मुख्यमंत्री बनाया, जब वे ज्यादा चर्चित नहीं थे।

BJP का अनोखा फॉर्मूला, कम चर्चित नेताओं को CM बनाने की क्या है वजह?
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक दिलचस्प राजनीतिक रणनीति अपनाई है, जो इसे अन्य दलों से अलग बनाती है। बीजेपी अक्सर नए और कम चर्चित चेहरों को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपती है। यह प्रवृत्ति हाल के वर्षों में कई राज्यों में देखने को मिली है, जहां अनुभवी नेताओं की जगह पार्टी ने अपेक्षाकृत नए चेहरों को मौका दिया है।
BJP की यह रणनीति क्यों खास है?
जब कोई नया चेहरा मुख्यमंत्री बनता है, तो उसमें प्रशासनिक अनुभव की कमी हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद बीजेपी ऐसा क्यों करती है? इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। 
एंटी-इन्कंबेंसी फैक्टर से बचाव: लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ सकता है। नए चेहरों को आगे लाकर बीजेपी जनता को बदलाव का संकेत देती है।
स्वच्छ छवि और नई ऊर्जा: कम चर्चित चेहरों की छवि आमतौर पर बेदाग होती है, जिससे पार्टी को नैतिक बढ़त मिलती है।
संगठन पर नियंत्रण: बीजेपी एक कैडर-बेस्ड पार्टी है, जहां शीर्ष नेतृत्व का प्रभाव रहता है। नए मुख्यमंत्री हाईकमान के प्रति अधिक वफादार होते हैं।
जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन: अलग-अलग समुदायों को साधने के लिए बीजेपी रणनीतिक रूप से नए नेताओं का चयन करती है।
युवा और नए नेतृत्व को मौका: बीजेपी अपने युवा नेताओं को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है, ताकि पार्टी भविष्य के लिए मजबूत हो सके।
13 राज्यों में BJP ने कैसे बनाए नए मुख्यमंत्री?
1. दिल्ली: रेखा गुप्ता (2025) - महिला सशक्तिकरण पर जोर
बीजेपी ने दिल्ली में एक बड़ा राजनीतिक प्रयोग किया और रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया। पहली बार विधायक बनीं गुप्ता को सीएम बनाकर पार्टी ने महिला सशक्तिकरण और जातिगत संतुलन को प्राथमिकता दी। यह बीजेपी की एक नई रणनीति थी, जिससे महिला मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके।
2. उत्तर प्रदेश: योगी आदित्यनाथ (2017) - हिंदुत्व और विकास का मेल
जब 2017 में यूपी में बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया, तो यह सभी के लिए एक चौंकाने वाला फैसला था। वे न कभी मंत्री रहे, न ही किसी प्रशासनिक पद पर थे। लेकिन बीजेपी ने उन्हें हिंदुत्व के पोस्टर बॉय के रूप में पेश किया और विकास को भी उनका मुख्य एजेंडा बनाया।
3. उत्तराखंड: त्रिवेंद्र सिंह रावत (2017) - संगठन की प्राथमिकता
उत्तराखंड में बीजेपी ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को चुना, जो संगठन के मजबूत स्तंभ थे। वे वर्षों तक बीजेपी के साथ जुड़े रहे, लेकिन जनता के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे। पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर संगठनात्मक अनुभव को महत्व दिया।
4. महाराष्ट्र: देवेंद्र फडणवीस (2014) - युवा नेतृत्व की परीक्षा
2014 में बीजेपी ने महाराष्ट्र में एक बड़ा दांव खेला और नागपुर के देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बना दिया। इससे पहले, वह सिर्फ विधायक थे और सीएम बनने की दौड़ में नाम भी नहीं था। लेकिन बीजेपी ने युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दी और फडणवीस ने खुद को एक सक्षम नेता के रूप में स्थापित किया।
5. हरियाणा: मनोहर लाल खट्टर (2014) - पहली बार विधायक से मुख्यमंत्री
मनोहर लाल खट्टर को 2014 में हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि वे पहली बार विधायक बने थे। यह एक ऐतिहासिक निर्णय था, जिससे बीजेपी ने साफ संदेश दिया कि संगठन के प्रति निष्ठावान नेता भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
6. झारखंड: रघुबर दास (2014) - गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री की रणनीति
झारखंड में बीजेपी ने पहली बार किसी गैर-आदिवासी नेता रघुबर दास को मुख्यमंत्री बनाया। यह एक बड़ा राजनीतिक बदलाव था, क्योंकि झारखंड में आमतौर पर आदिवासी मुख्यमंत्री ही बनते आए थे।
7. त्रिपुरा: बिप्लब कुमार देब (2018) - पूर्वोत्तर में नया नेतृत्व
2018 में बीजेपी ने पहली बार त्रिपुरा में सरकार बनाई और बिप्लब कुमार देब को मुख्यमंत्री बनाया। इससे पहले वे ज्यादा चर्चित नहीं थे, लेकिन बीजेपी ने पूर्वोत्तर में एक नया नेतृत्व तैयार करने के लिए उन्हें यह जिम्मेदारी दी।
8. हिमाचल प्रदेश: जयराम ठाकुर (2017) - क्षेत्रीय संतुलन साधने की चाल
2017 में बीजेपी ने हिमाचल में जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाया, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते थे। पार्टी ने उन्हें सीएम बनाकर क्षेत्रीय संतुलन स्थापित किया और जमीनी नेताओं को महत्व दिया।
9. कर्नाटक: बसवराज बोम्मई (2021) - लिंगायत समुदाय को साधने की कोशिश
बीजेपी ने कर्नाटक में बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया, जो लिंगायत समुदाय से आते थे। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि लिंगायत समुदाय का समर्थन पार्टी के साथ बना रहे।
10. गुजरात: भूपेंद्र पटेल (2021) - पहली बार विधायक से मुख्यमंत्री तक
गुजरात में भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने पाटीदार समुदाय को साधने की कोशिश की। इससे पहले वे पहली बार विधायक बने थे, लेकिन पार्टी ने उन पर भरोसा जताया।
11. असम: हिमंत बिस्वा सरमा (2021) - पूर्व कांग्रेस नेता से बीजेपी का चेहरा
हिमंत बिस्वा सरमा पहले कांग्रेस में थे, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। 2021 में उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ और मजबूत की।
12. मणिपुर: एन. बीरेन सिंह (2017) - एक फुटबॉलर से मुख्यमंत्री तक का सफर
मणिपुर में बीजेपी ने पूर्व फुटबॉलर और पत्रकार एन. बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री बनाया। इससे पार्टी ने यह दिखाया कि राजनीति में विविध पृष्ठभूमि के नेताओं का भी स्वागत है।
13. गोवा: प्रमोद सावंत (2019) - युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की नीति
गोवा में बीजेपी ने प्रमोद सावंत को मुख्यमंत्री बनाया, जो युवा थे और मनोहर पर्रिकर के बाद पार्टी के लिए एक नया चेहरा थे। इससे बीजेपी ने संकेत दिया कि युवा नेतृत्व को भी मौका दिया जाएगा।
क्या यह रणनीति आगे भी जारी रहेगी?
बीजेपी की यह रणनीति राज्यों के सामाजिक, जातिगत और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर तय होती है। अगर यह सफल होती रही, तो भविष्य में भी बीजेपी नए चेहरों को प्राथमिकता देती रहेगी। बीजेपी का नया मुख्यमंत्री चुनने का तरीका उसे बाकी दलों से अलग बनाता है। पार्टी ने बार-बार दिखाया है कि वह युवा, नए और अपेक्षाकृत अनजान नेताओं को मुख्यमंत्री बनाने में झिझकती नहीं है। इसका फायदा यह होता है कि बीजेपी एंटी-इन्कंबेंसी से बच पाती है, संगठन पर नियंत्रण रखती है और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करती है।
अब सवाल यह है कि क्या आगे भी बीजेपी इसी रणनीति पर काम करेगी? या फिर कोई नया राजनीतिक फॉर्मूला अपनाएगी? 

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