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बजाज चेतक: भारत के सबसे आइकॉनिक स्कूटर की अनसुनी कहानी!

बजाज चेतक, 1970 के दशक से लेकर आज तक भारतीय सड़कों पर एक प्रतिष्ठित नाम रहा है। यह सिर्फ एक स्कूटर नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। 'हमारा बजाज' टैगलाइन से मशहूर यह स्कूटर हर घर की पसंद बन गया था। समय के साथ चेतक का सफर बदलता गया।

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भारत में दोपहिया वाहनों की बात की जाए तो बजाज चेतक का नाम किसी विरासत से कम नहीं। एक दौर था जब भारतीय परिवारों के लिए यह स्कूटर सिर्फ एक साधारण गाड़ी नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का प्रतीक था। शादी-ब्याह में दहेज के रूप में इसकी मांग होती थी और इसे पाने के लिए लोगों को सालों तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्कूटर, जो कभी भारतीय सड़कों का राजा था, अचानक बाजार से गायब कैसे हो गया? आइए इस ऐतिहासिक स्कूटर की कहानी को विस्तार से जानते हैं।

बजाज चेतक की शुरुआत

बजाज चेतक की कहानी 1972 में शुरू होती है, जब बजाज ऑटो ने इसे भारतीय बाजार में पेश किया। यह स्कूटर पियाजियो कंपनी के वेस्पा मॉडल से प्रेरित था, जिसका उत्पादन भारत में बजाज ऑटो कर रही थी। लेकिन जब इंदिरा गांधी सरकार ने विदेशी कंपनियों के साथ करारों को नवीनीकरण करने से इनकार कर दिया, तो बजाज ने अपनी खुद की पहचान बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद कंपनी ने महाराणा प्रताप के प्रसिद्ध घोड़े 'चेतक' के नाम पर इस स्कूटर का नाम रखा।

10 साल का इंतजार और ब्लैक मार्केट

1970 और 80 के दशक में बजाज चेतक इतना लोकप्रिय था कि इसे खरीदने के लिए लोगों को 8 से 10 साल तक इंतजार करना पड़ता था। यदि किसी ग्राहक को स्कूटर का आवंटन हो जाता था, तो वह खुद को सौभाग्यशाली मानता था। इस भारी मांग का फायदा उठाकर डीलर और दलाल इसे ब्लैक में बेचने लगे। स्कूटर की आधिकारिक कीमत लगभग 18,000 रुपये थी, लेकिन ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत 30,000 रुपये तक पहुंच जाती थी। शादी के समय दहेज में देने के लिए परिवार इसे महंगे दामों पर खरीदने को भी तैयार रहते थे।

'हमारा बजाज' और भारतीय मध्यवर्ग का सपना

बजाज चेतक केवल एक वाहन नहीं था, यह भारतीय मध्यवर्ग की पहचान बन गया था। 'हमारा बजाज' विज्ञापन अभियान ने इसे घर-घर तक पहुंचा दिया। यह स्कूटर भरोसेमंद था, रखरखाव का खर्च कम था, और पूरे परिवार को एक साथ सफर करने का आनंद देता था। यही वजह थी कि यह स्कूटर गांवों से लेकर शहरों तक हर जगह छाया रहा। 1990 के दशक के अंत तक भारतीय बाजार में तकनीकी बदलाव होने लगे। नए युग के स्कूटर और मोटरसाइकिलें अधिक ईंधन कुशल और पर्यावरण अनुकूल होने लगीं। बजाज चेतक में इस्तेमाल होने वाला दो-स्ट्रोक इंजन सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त प्रदूषण मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। कंपनी ने 2002 में इसका चार-स्ट्रोक संस्करण पेश किया, लेकिन तब तक भारतीय उपभोक्ता गियरलेस स्कूटरों की ओर आकर्षित हो चुके थे।

होंडा ने 2001 में 'एक्टिवा' लॉन्च किया, जिसने भारतीय दोपहिया बाजार में क्रांति ला दी। यह गियरलेस स्कूटर महिलाओं और युवाओं के लिए अधिक सुविधाजनक था। इसकी सफलता ने चेतक की लोकप्रियता को धीरे-धीरे कम कर दिया। बजाज ने बाजार के रुख को भांपते हुए 2005 में स्कूटर निर्माण बंद करने और मोटरसाइकिलों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला लिया।

चेतक का इलेक्ट्रिक अवतार

भले ही बजाज ने 2005 में चेतक का उत्पादन बंद कर दिया, लेकिन 2020 में इसे इलेक्ट्रिक स्कूटर के रूप में दोबारा लॉन्च किया गया। बजाज चेतक इलेक्ट्रिक आज के जमाने के अनुरूप डिजाइन और आधुनिक फीचर्स के साथ आया, लेकिन इसे वह लोकप्रियता नहीं मिल पाई जो पुराने चेतक को मिली थी।

बजाज चेतक भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास का एक ऐसा हिस्सा है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। यह न सिर्फ एक वाहन था, बल्कि एक भावना थी जो भारतीय परिवारों के साथ जुड़ी हुई थी। समय के साथ तकनीकी विकास और उपभोक्ता की बदलती जरूरतों के कारण यह स्कूटर बाजार से गायब हो गया, लेकिन आज भी जब कभी सड़क पर कोई पुराना चेतक दिखाई देता है, तो लोगों की यादें ताजा हो जाती हैं।
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