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राजनीति ही नहीं अर्थशास्त्र के भी माहिर…जो कहते थे कि संन्यासी शासन नहीं कर सकता, उन्हें मिल गया होगा भगवाधारी CM का जवाब

भगवाधारी योगी ने जब 2017 में पहली बार UP जैसे बड़े राज्य की सत्ता संभाली थी तब पूरे देश में BJP के फैसले का विरोध हो रहा था और कि एक संन्यासी भला देश के सबसे बड़े UP में क्या सरकार चलाएगा अब उन्हें जवाब मिल गया है.

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मठ-मंदिरों में पूजा-पाठ करने वाले भगवाधारी योगी आदित्यनाथ ने जब साल 2017 में पहली बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की सत्ता संभाली थी तब यूपी ही नहीं पूरे देश में बीजेपी के फैसले का विरोध हो रहा था. बीजेपी के विरोधी ही नहीं, कैडर में भी एक संशय का भाव था कि एक भगवा पहना व्यक्ति कैसे सीएम पीएम हो सकता है. ऐसा इसलिए था क्योंकि हिंदुओं को ये आदत नहीं थी देखने कि भगवा वस्त्र पहने किसी राज्य की सत्ता संभाली हो या फिर उसे बखूबी चलाया भी हो.

हां, ऐसा धर्म विशेष की टोपी-क्रॉस के बारे में नहीं कहा जाता था, क्योंकि लोगों के मन में ये भाव पैदा किया गया कि ये तो आम बात है. टोपी-क्रॉस वाला सरकार भी चला सकता है और शिक्षा-हॉस्पिटल भी, लेकिन एक भगवाधारी ऐसा कर ही नहीं सकता. हालांकि जब बीजेपी ने ये फैसला लिया कि योगी यूपी की सत्ता संभालेंगे तो, उन पर सवाल उठाए जाने लगे कि एक संन्यासी भला देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश में क्या सरकार चलाएगा. खैर समय बदला, साल बदला, सरकार बदली और आज पूरी दुनिया देख रही है कि एक भगवाधारी सीएम भी बन सकता है और बेहतर सीएम बन सकता है.

खैर दिन प्रतिदिन ये साबित हुआ कि योगी क्या कर सकते हैं और क्या नहीं. हैरान नहीं होनी चाहिए जब योगी के बारे में जनता ने कहना शुरू कर दिया कि उन्हें भी अपने राज्य में योगी जैसा ही सीएम चाहिए. इसी दौरान आप एक महिला की बात सुननी चाहिए कि वो एक संन्यासी सीएम को लेकर लग रहे आरोपों पर क्या जवाब देती है.

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तो ये सिर्फ एक स्कूल की प्रिंसिपल के विचार नहीं थे. ऐसे कई लोग थे जो साल 2017 में पहली बार सीएम बने योगी आदित्यनाथ के बारे में कुछ ऐसा ही सोचते थे. क्योंकि उनकी नजर में 21वीं सदी वाले यूपी की सत्ता संभालना किसी साधु-संन्यासी के बस की बात नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे वक्त बदला और वक्त के साथ-साथ यूपी भी बदलता नजर आया.

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कहा था माफियाओं को ‘मिट्टी’ में मिला देंगे, मिला भी दिया!

जिस यूपी में कभी अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं को सपा-बसपा चुनाव लड़ाया करती थीं. सबसे पहले उन माफियाओं के अवैध साम्राज्य को बाबा के बुलडोजर ने मिट्टी में मिलाया. जिसने यूपी वालों के दिलों से माफियाओं के खौफ को खत्म करने का काम किया. इसका फायदा प्रदेश में सुरक्षा, निवेश, विकास, शिक्षा और पर्यटन, हर क्षेत्र में मिला.

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योगी ने कैसे बदली यूपी की छवि!

बेहतर हुए लॉ एंड ऑर्डर का फायदा सुस्त पड़ी यूपी को रफ्तार देने में मिला. यूपी धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश से उत्तम प्रदेश की कतार में शामिल होने लगा. इसने यूपी में सरकार का विश्वास बढ़ाया. फिर यूपी में योगी सरकार ने इन्वेस्टर समिट का आयोजन करवाया जिसमें देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों को बुलाया गया जिन्होंने योगी सरकार पर भरोसा किया. और बड़ी संख्या में यूपी में निवेश भी किया, जिसका सबूत है सिर्फ 18 महीने में ही यूपी की राजधानी लखनऊ में बनकर तैयार हुआ अशोक लेलैंड का इलेक्ट्रिक व्हिकल प्लांट. जहां एक से बढ़कर एक हाइटेक वाहन बन रहे हैं और यूपी वालों को रोजगार भी मिल रहा हैं. 

यूपी आज देश का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरर

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इतना ही नहीं आज यूपी ना सिर्फ देश के 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य में अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है. सीएम योगी ने 1 ट्रिलियन डॉलर की यूपी की इकोनॉमी का लक्ष्य रखा है. यूपी में लाखों करोड़ों के निवेश प्रस्ताव आ रहे हैं. आज जहां यूपी भारत का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरर राज्य है, रक्षा उत्पादन के लिए डिफेंस कॉरिडोर बन रहा है, वहीं अत्याधुनिक ब्रम्होस मिसाइल और AK-203 का भी निर्माण हो रहा है.

‘राजनीति के ही माहिर नहीं, अर्थशास्त्र में भी माहिर हैं योगी’

योगी राज में एक तरफ जहां यूपी में सनातन धर्म का परम वैभव लौट रहा है तो वहीं दूसरी तरफ यूपी विकास के रास्ते पर रफ्तार भी भर रहा है. यही वजह है कि कुछ ही दिनों पहले अशोक लेलैंड के प्लांट का उद्घाटन करने गये यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सीएम योगी की तारीफ करते हुए यहां तक कह दिया था कि “मैं योगी जी के बारे में कह सकता हूं, मैं समझता था कि आप राजनीति के ही माहिर हैं, लेकिन मैं तो इस नतीजे पर पहुंच गया कि आप तो अर्थशास्त्र में भी माहिर हैं. कैसे मुनाफा कमाया जा सकता है इसकी कला आपको अच्‍छी तरह मालूम है.”

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राजनाथ सिंह खुद यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. और राजनीति में भी उन्हें अच्छा-खासा अनुभव है, जिसके दम पर उन्होंने डंके की चोट पर ये दावा किया कि योगी ने 2030 तक वन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का जो लक्ष्य रखा है उसे योगी जी हासिल करके ही रहेंगे. और एक विकसित राष्ट्र का रास्ता कहीं से जाएगा तो विकसित यूपी से होकर ही जाएगा.

विकसित राष्ट्र का रास्ता यूपी से गुजरेगा!

जिस उत्तर प्रदेश के बारे में कभी कहा जाता था कि देश की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है, उस यूपी के बारे में अब कहा जा रहा है कि एक विकसित राष्ट्र का रास्ता कहीं से जाएगा तो विकसित यूपी से होकर ही जाएगा, जो पूरे यूपी के लिए जहां गर्व की बात है. तो वहीं इस बात का भी सबसे बड़ा सबूत है कि तन पर भगवा धारण करने वाले योगी आदित्यनाथ के राज में सनातन धर्म की ध्वजा गौरव के साथ लहरा रही है तो वहीं यूपी का विकास भी तेजी के साथ हो रहा है, शायद यही वजह है कि जो लोग कभी सोचते थे कि एक संन्यासी क्या सरकार चलाएगा, अब वही लोग योगी सरकार की तारीफ कर रहे हैं.

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योगी विरोधियों को मिला जवाब!

योगी सरकार पर बढ़ता जनता का ये विश्वास बता रहा है कि सीएम योगी ने इस बात को साबित करके दिखा दिया कि एक भगवाधारी साधु मठ-मंदिरों का विकास करा सकता है तो यूपी जैसे बड़े राज्य की सत्ता भी संभाल सकता है. और ये बात लगता है अब यूपी की जनता भी अच्छी तरह से समझ गई है. इसलिए साल 2022 में दोबारा यूपी की सत्ता सौंपी और अब 2027 के चुनाव से पहले जिस तरह से योगी लहर चल रही है उसे देख कर लग रहा है कि सपा और कांग्रेस मिलकर भी योगी को सत्ता की हैट्रिक लगाने से नहीं रोक पाएंगे. 

क्या पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद आप भी कहेंगे कि; एक संन्यासी सत्ता नहीं संभाल सकता? खैर जब कोई संन्यासी बड़े राज्य की सत्ता संभालता है तो मठ-मंदिर भी बनाए जाते हैं और विकास भी होता है, ये एक भगवाधारी CM योगी ने साबित करके दिखा दिया है.

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रिपोर्ट: धीरेंद्र रावत

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इनपुट+एडिट + केशव झा

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