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आत्मनिर्भर, वैश्विक महाशक्ति के भारत के सामने दिखी अमेरिकी कमजोरी...India-US ट्रेड डील पर बोले अर्थशास्त्री जैफरी सैक्स

दिग्गज अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने India-US ट्रेड डील, जिसमें ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को कम करने का ऐलान किया उसे अमेरिका के लिए कोई बड़ी उपलब्धि नहीं बल्कि उसका पीछे हटना करार दिया. उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर, ग्लोबल लीडर भी बताया.

Jeffery Sachs (File Photo)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों, बड़बोलेपन और दबाव की रणनीति के बावजूद भारत डिगा नहीं. अब इसके सकारात्मक परिणाम साफ़ तौर पर सामने आने लगे हैं. अमेरिकी 50% टैरिफ की धमकी से घबराने के बजाय नई दिल्ली ने अपने लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशे और ऐसी रणनीति अपनाई कि खुद ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया. जो ट्रंप भारत पर ट्रेड डील को लेकर दबाव बना रहे थे और यह धमकी दे रहे थे कि समझौता उनकी शर्तों पर ही होगा, उन्हें अंततः झुकना पड़ा.

यूरोपीय संघ के साथ भारत की ‘मदर ऑफ ऑल डील’ के बाद ट्रंप ने न सिर्फ टैरिफ घटाकर 18% कर दिया, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर उनके सुर भी बदल गए. यही मानना है दिग्गज अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स का.

आत्मनिर्भर भारत के सामने उजागर हुई अमेरिका की कमजोरी: जेफरी सैक्स

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प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने हालिया अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए इसे महीनों तक चली नाकाम दबाव नीति के बाद वाशिंगटन की स्पष्ट हार करार दिया है. सैक्स के मुताबिक, टैरिफ घटाना और जल्दबाज़ी में समझौते का दावा करना अमेरिका की ताकत नहीं, बल्कि एक अधिक आत्मनिर्भर भारत से निपटने में उसकी कमजोरी को दर्शाता है.

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सैक्स ने भारत द्वारा दी गई कथित रियायतों, जैसे शून्य प्रतिशत ड्यूटी और 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान की खरीद को लेकर अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिका के पास अब कोई ठोस बार्गेनिंग पॉइंट नहीं बचा था. उनके अनुसार, नई दिल्ली की विविध वैश्विक व्यापार साझेदारियों ने अमेरिकी प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया है. सैक्स ने भारत की उस रणनीतिक पहुंच को श्रेय दिया, जिसके तहत उसने पारंपरिक सहयोगियों से आगे बढ़कर नए साझेदारों के साथ संबंध मजबूत किए और नेगोशिएशन टेबल पर शक्ति-संतुलन बदल दिया.

सैक्स के मुताबिक, यह व्यापार समझौता भारत के लिए आर्थिक और कूटनीतिक, दोनों ही स्तरों पर फायदेमंद साबित हुआ है. इससे भारत एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में और अधिक मजबूत होकर उभरा है, जो एकतरफा दबाव का विरोध करने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है.

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'अमेरिका का पीछे हटना, कोई बड़ी उपलब्धि नहीं'

अर्थशास्त्री जेफरी डी. सैक्स ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने और डील का दावा किए जाने को किसी बड़ी उपलब्धि के बजाय अमेरिका का पीछे हटना बताया. एक निजी भारतीय चैनल से बातचीत में सैक्स ने कहा कि अमेरिका ने महीनों तक भारत पर दबाव बनाया, लेकिन उसे कोई ठोस लाभ नहीं मिला. इसके बाद उसने उन “अतार्किक कदमों” से पीछे हटना शुरू किया, जिनसे न सिर्फ व्यापार बाधित हुआ बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में भी तनाव बढ़ा.

सैक्स ने कहा कि अमेरिका का व्यवहार अस्थिर और गैर-जिम्मेदाराना रहा है. कुछ महीनों पहले इस सरकार ने जो अतिशयोक्तिपूर्ण कदम उठाए थे, अब उनसे पीछे हटना पड़ रहा है. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका का पिछला रुख बिल्कुल तर्कहीन था और उसने भारत को अनावश्यक रूप से नाराज़ किया. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी सरकार के किसी भी बयान को शब्दशः सच नहीं मानना चाहिए. उनके इसे सब कुछ तात्कालिक Improvisation, बकवास और झूठी बयानबाज़ी करार दिया.

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'अमेरिका को डिल से कुछ भी नहीं हुआ हासिल'

सैक्स ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को इस डील से कुछ भी हासिल नहीं हुआ. वॉशिंगटन की रणनीति पर उनका आकलन बिल्कुल साफ था. उन्होंने कहा, “कुछ भी नहीं. आज जो कुछ तय हुआ है, वह पहले भी तय किया जा सकता था. कोई लाभ नहीं हुआ.” उनके मुताबिक, अमेरिकी रणनीति इस भ्रम पर आधारित थी कि अमेरिकी बाज़ार तक पहुंच का लालच दिखाकर देशों को झुकाया जा सकता है, जबकि पिछले एक साल में यह धारणा बार-बार गलत साबित हुई है. 

अमेरिकी दादागिरी के खिलाफ दुनिया ने किया अच्छा प्रदर्शन: सैक्स

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सैक्स ने कहा, “यह ट्रंप का भ्रम है कि अमेरिकी बाज़ार इतना बड़ा और अहम है कि वह हर देश को लाइन में लगा सकते हैं. लेकिन इस मायने में अमेरिकी बाज़ार उतना महत्वपूर्ण नहीं है.” उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी बयानबाज़ी के बावजूद वैश्विक व्यापार लगातार बढ़ता रहा और देशों ने वॉशिंगटन से परे अपने रिश्ते मजबूत किए. उनके अनुसार, “दुनिया ने पिछले साल अच्छा प्रदर्शन किया. देशों ने आपस में ज़्यादा व्यापार किया.”

भारत के रुख और रणनीति से नरम पड़ा अमेरिका

सैक्स ने भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी को अमेरिका के नरम रुख का एक अहम कारण बताया. भारत ने चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाए, यूरोपीय संघ के साथ बड़ा व्यापार समझौता किया, अफ्रीका के साथ संबंध मजबूत किए और बहुपक्षीय मंचों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई.

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'भारत ने बेहद अच्छे से संभाली स्थिति'

वहीं भारत की भूमिका पर सैक्स ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत ने इस पूरे घटनाक्रम को आर्थिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद कुशलता से संभाला है.” उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीति में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत रही और उसकी कूटनीतिक पहुंच और व्यापक हुई. “भारत ने दुनिया भर के देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं, जो भारत के लिए बहुत अच्छा है.”

'BRICS में बढ़ी भारत की भूमिका'

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उन्होंने ब्रिक्स में भारत की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. सैक्स ने कहा, “अमेरिका दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 14% है, जबकि ब्रिक्स 40% से भी अधिक है.” उन्होंने इस समूह को किसी के द्वारा “धमकाए जाने” के खिलाफ सामूहिक शक्ति करार दिया.

'अमेरिका से बड़ी होगी भारत की इकोनॉमी'

अमेरिकी दिग्गज ने इस विचार को भी सिरे से खारिज कर दिया कि भारत को अमेरिका के साथ किसी रणनीतिक गठबंधन की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यह पूरी अवधारणा ही हास्यास्पद है, भारत को अमेरिका के साथ किसी रणनीतिक गठबंधन की जरूरत नहीं है. भारत की क्षमता और भविष्य की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत जनसंख्या के लिहाज़ से दुनिया का सबसे बड़ा देश है और सदी के मध्य से पहले उसकी अर्थव्यवस्था का आकार अमेरिका से बड़ा हो जाएगा.”

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भारत एक वैश्विक महाशक्ति: सैक्स

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उनके अनुसार, भारत के हित खुले व्यापार और संतुलित वैश्विक संबंधों में हैं, न कि किसी ऐसे साझेदार के साथ गठबंधन में, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता. सैक्स ने निष्कर्ष के तौर पर कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति और मजबूत हुई है. उन्होंने ये भी कहा कि “भारत एक ग्लोबल लीडर है, यह एक महाशक्ति है. यह तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है.

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