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7,000 मुस्लिम और एक भी मस्जिद, जानिए क्या है इस देश में धार्मिक स्थल को लेकर नियम?
भूटान, जिसे "लैंड ऑफ थंडर ड्रैगन" के नाम से जाना जाता है, अपनी बौद्ध संस्कृति और शांतिपूर्ण समाज के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इस देश में एक ऐसी खास बात है जो इसे चर्चा का विषय बनाती है—यहां करीब 7,000 मुस्लिम रहते हैं, लेकिन एक भी मस्जिद नहीं है।
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दुनिया के हर देश में धार्मिक स्थलों की मौजूदगी वहां की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। मगर क्या आपने सोचा है कि एक ऐसा देश भी हो सकता है, जहां मुस्लिम समुदाय मौजूद है, लेकिन वहां मस्जिदें नहीं हैं? यह अनोखी सच्चाई भारत के पड़ोसी देश भूटान की है।
भूटान, भारत का पड़ोसी देश, अपने शांतिपूर्ण माहौल, बौद्ध संस्कृति और "सकल राष्ट्रीय खुशी" (Gross National Happiness) की नीति के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन धार्मिक विविधता के बावजूद, यह देश अपनी अनूठी धार्मिक संरचना के कारण एक विशेष चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां लगभग 7,000 मुस्लिम रहते हैं, लेकिन पूरे देश में एक भी मस्जिद नहीं है। यह तथ्य अपने आप में अद्वितीय और चर्चा योग्य है।
भूटान, जिसे "ड्रुक युल" (ड्रैगन की भूमि) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी जनसंख्या लगभग 8 लाख है, और इसकी 75% आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है। हिंदू धर्म दूसरा सबसे बड़ा धर्म है, जिसे मुख्य रूप से दक्षिणी भूटान के नेपाली मूल के लोग मानते हैं। इसके अलावा, यहां इस्लाम, ईसाई धर्म और बोन जैसे अल्पसंख्यक धर्मों के अनुयायी भी मौजूद हैं। लेकिन मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थल यानी मस्जिदों का यहां अभाव है। यह स्थिति धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता पर एक दिलचस्प दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
भूटान में मस्जिद क्यों नहीं?
भूटान का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। हालांकि, इसमें धर्म परिवर्तन पर सख्त पाबंदी है। सरकार गैर-बौद्ध धार्मिक भवनों और त्योहारों की अनुमति नहीं देती है। मुस्लिम समुदाय को अपने धार्मिक आयोजनों के लिए अक्सर अपने घरों में या सामुदायिक स्थानों का सहारा लेना पड़ता है। 2008 में, भारतीय सीमा के पास जयगांव में एक मस्जिद बनाई गई, जो भूटान में रहने वाले मुसलमानों के लिए एकमात्र विकल्प बन गई।
धार्मिक स्वतंत्रता और सीमाएं
भूटान का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लेकिन यह स्वतंत्रता पूरी तरह से खुली नहीं है। भूटान सरकार ने धर्म परिवर्तन पर सख्त रोक लगा रखी है। सरकार गैर-बौद्ध धार्मिक स्थलों के निर्माण की अनुमति नहीं देती। यही कारण है कि भूटान में मस्जिदें नहीं हैं।
भूटान में धार्मिक सहिष्णुता और विविधता अद्वितीय है। भूटानी संस्कृति में धर्म का गहरा प्रभाव है। बौद्ध धर्म यहां का राष्ट्रीय धर्म है, लेकिन सरकार ने धार्मिक विविधता को सम्मान देने का प्रयास किया है। धार्मिक भवनों के निर्माण पर रोक के बावजूद, किसी भी धर्म का पालन करने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता मौजूद है।
मस्जिदों का न होना: फायदे और चुनौतियां
अगर इसके फायदे की बात करें तो मस्जिदों के अभाव में भी मुस्लिम समुदाय अन्य धर्मों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रहता है। भूटान के लोग धार्मिक सौहार्द और मिलनसारिता के लिए जाने जाते हैं। वहीं चुनौतियां पर गौर किया जाए तो1 मुस्लिम समुदाय को अपनी धार्मिक गतिविधियों के लिए पड़ोसी देश भारत का सहारा लेना पड़ता है। मस्जिद न होने से समुदाय को अपनी पहचान को बचाए रखने में कठिनाई हो सकती है।
भूटान का उदाहरण दिखाता है कि धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक एकता का संतुलन कैसे बनाए रखा जा सकता है। हालांकि, धार्मिक स्थलों का अभाव किसी भी समुदाय के लिए चुनौती हो सकता है, लेकिन भूटान ने यह दिखाया है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए पारस्परिक सम्मान जरूरी है। भूटान का मस्जिद रहित मुस्लिम समुदाय यह साबित करता है कि धार्मिक विविधता और सहिष्णुता के साथ भी एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। हालांकि, मस्जिदों के निर्माण की अनुमति देकर सरकार धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति और बड़ा कदम उठा सकती है। इससे मुस्लिम समुदाय को अपनी परंपराओं को खुलकर जीने का अवसर मिलेगा।
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