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26 January 2025: गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल रिवाजों का ब्रिटिश कनेक्शन
भारत हर साल 26 जनवरी को अपना गणतंत्र दिवस मनाता है। इस दिन होने वाली परेड देश की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक धरोहर, और विविधता का प्रदर्शन करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परेड की कई परंपराएं ब्रिटिश युग से प्रेरित हैं?
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भारत का गणतंत्र दिवस न सिर्फ देश की ताकत, गौरव और एकता का प्रतीक है, बल्कि यह अतीत से जुड़ी कुछ खास परंपराओं का भी प्रतिबिंब है। 26 जनवरी को हर साल देशभर में इस दिन को पूरे धूमधाम और गर्व के साथ मनाया जाता है। कर्तव्य पथ (पूर्व का राजपथ) पर होने वाली परेड इस उत्सव का सबसे आकर्षक हिस्सा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परेड की कुछ परंपराएं ऐसी भी हैं, जो सीधे ब्रिटिश साम्राज्य के दौर से जुड़ी हुई हैं? इन परंपराओं की हकीकत जानकर आप हैरान रह जाएंगे।
परेड का ऐतिहासिक महत्व
गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सेना, वायुसेना, और नौसेना अपनी ताकत का प्रदर्शन करती हैं। इस परंपरा का मूल ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ा है। ब्रिटिश साम्राज्य के समय, परेड का आयोजन अपनी सैन्य शक्ति और शौर्य को दिखाने के लिए किया जाता था। यह परेड उन देशों के लिए एक संदेश होती थी, जो ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन थे। आजादी के बाद, भारत ने इस परंपरा को जारी रखा, लेकिन इसे अपने तरीके से ढाल लिया। भारतीय गणतंत्र दिवस परेड न सिर्फ सैन्य ताकत का प्रदर्शन है, बल्कि इसमें हमारी सांस्कृतिक विविधता, वैज्ञानिक प्रगति और देश की ऐतिहासिक धरोहर का भी झलक मिलती है।
21 तोपों की सलामी: ब्रिटिश युग की परंपरा
गणतंत्र दिवस परेड का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है 21 तोपों की सलामी। यह परंपरा भी ब्रिटिश शासन से आई है। ब्रिटिश काल में, शाही परिवार या किसी विशेष आयोजन पर 21 तोपों की सलामी दी जाती थी। यह परंपरा भारत में भी अपनाई गई, और आजादी के बाद इसे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे खास मौकों पर जारी रखा गया। पहले, इस सलामी के लिए अंग्रेजों द्वारा निर्मित 25 पाउंडर आर्टलरी गन का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन समय के साथ, इसे भारतीय स्वदेशी तोपों से बदल दिया गया। 21 तोपों की सलामी एक खास पैटर्न में दी जाती है, जिसमें हर 2.25 सेकंड के अंतराल पर गोला दागा जाता है।
परेड, ब्रिटिश अनुशासन की झलक
गणतंत्र दिवस परेड में शामिल सैनिकों की परेड और उनकी कदमताल, ब्रिटिश सैन्य अनुशासन की याद दिलाती है। ब्रिटिश काल में, सैनिकों को सख्त अनुशासन के तहत ट्रेनिंग दी जाती थी, और परेड में उनकी समर शक्ति का प्रदर्शन किया जाता था। आज भारतीय सेना ने इस परंपरा को अपनी पहचान के साथ जारी रखा है। हालांकि परंपराएं ब्रिटिश काल से आई हैं, लेकिन भारतीय गणतंत्र दिवस परेड में आज देश की सांस्कृतिक और सैन्य ताकत का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। परेड में राज्यों की झांकियां, लोकनृत्य, और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम देश की विविधता और समृद्धि को दर्शाते हैं।
गणतंत्र दिवस परेड भले ही ब्रिटिश रिवाजों से प्रेरित हो, लेकिन इसमें भारतीयता की झलक स्पष्ट रूप से नजर आती है। यह परेड न केवल हमारी ताकत और क्षमता का प्रदर्शन करती है, बल्कि यह इस बात का संदेश भी देती है कि भारत ने अपने औपनिवेशिक अतीत को पीछे छोड़ते हुए अपनी पहचान को संजोया और मजबूत किया है।
26 जनवरी की परेड महज एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी विरासत, ताकत और गौरव का प्रतीक है। यह परंपराएं हमें याद दिलाती हैं कि कैसे हमने अपने इतिहास से सीखते हुए वर्तमान को गढ़ा है। जब आप इस बार गणतंत्र दिवस की परेड देखें, तो उन परंपराओं और उनके पीछे की कहानियों को जरूर याद करें, जिन्होंने इसे इतना खास बनाया है।
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