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इस्तीफ़े के बाद क्या Kejriwal को ख़ाली करना होगा शीशमहल ?, क्यों संकट में घिरे सीएम !

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बड़ा सियासी संकट आ गया है। क्योंकि सीएम पद से इस्तीफ़ा देते ही केजरीवाल को अपना शीशहमल भी छोड़ना पड़ेगा। नियमों के मुताबिक इस्तीफ़े के 15 दिन बाद ही घर ख़ाली करना होता है।

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Kejriwal पर बहुत बड़ी आफत आ गई है ।और ये आफ़त है बेघर होने की। कुर्सी के साथ साथ केजरीवाल परिवार के साथ बेघर होने वाले हैं। शीशमहल केजरीवाल से छिनने वाला है। वही शीशहमल जिसे उन्होंने जनता को झूठ के जाल में फंसाकर मन्नतों से तैयार करवाया है। जिसको बनवाने में 45 करोड़ रुपये खर्च आया। 8-8 लाख रुपये के 23 पर्दे लगवाए गए जो टोटल 1 करोड़ रुपये के थे। वियतनाम से मार्बल मंगवाकर लगवाया गया। टॉयलेट कमोड के लिए भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए।


केजरीवाल ने अपने सपनों का महल ने तैयार किया। इस शीशहमल की वजह से जाँच एजेंसियों के निशाने पर भी आ गए।  लेकिन अब हालत देखिये केजरीवाल का ये शीशमहल उनसे छिनने जा रह रहा है। उन्हें घर ख़ाली कर यूपी में लौटना होगा।  क्यों बेघर होंगे केजरीवाल चलिए बताते हैं। दरअसल सीएम पद से इस्तीफ़ा देते ही नियमों के मुताबिक़ केजरीवाल को 15 दिन के अंदर सीएम हाउस खाली करना होगा।

अब सवाल ये है कि क्या आसानी से केजरीवाल सीएम हाउस छोड़ देंगे। और छोड़ेंगे तो कहां जाएंगे। नियमों के अनुसार अगर केजरीवाल अपनी जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाते हैं। तो सीएम हाउस खुदको छोड़कर जो मुख्यमंत्री बनेगा उसे ही देना होगा। तो उसके बाद तो केजरीवाल के पास पुराने घर पर लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। यानी की केजरीवाल अपने परिवार के साथ ग़ाज़ियाबाद के कौशांबी में पुराने घर वापस लौट सकते हैं। क्योंकि वो घर उनकी पत्नी के नाम पर अलॉट है।

 बता दें कि केजरीवाल ने ये घर जनवरी 2014 में दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद ख़ाली कर दिया था। और सीएम हाउस में परिवार संग शिफ़्ट हो गए थे। अब दोबारा उनपर घर ख़ाली करने का संकट मंडरा गया है। वहीं दूसरी तरफ़ ये भी कहा जा रहा है कि अगर इस्तीफ़ा देने के बाद केजरीवाल अपनी जगह किसी और को मुख्यमंत्री नहीं बनाते। कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर काम करते हैं जल्द चुनाव कराने की मांग उठाते हैं तो वो अपना शीशमहल आसानी से नहीं छोड़ेंगें। लेकिन ऐसा नहीं है। क्योंकि गेंद एलजी के पाले में चली जाएगी। बात दिल्ली के उपराज्यपाल पर निर्भर रहेगी।  क्योंकि केजरीवाल के इस्तीफ़ा देते ही दूसरा मुख्यमंत्री बनने तक सीएम हाउस एलजी के अंडर आ जाएगा।  और उसके बाद मीडिया को भी सीएम हाउस के अंदर जाने की अनुमति होगी। 

अगर ऐसा होता है तो जिस शीशमहल को लेकर केजरीवाल जांच के घेरे में हैं। उनकी पूरी असलियत भी सामने आ सकती है। क्योंकि ये शीशमहल उसी दिल्ली के मुख्यमंत्री का है जो सत्ता में आने पर जनता से चीख चीखकर वादे करते थे। कि ना गाड़ी लेंगे ना बंगला। ना वीआईपी कल्चर अपनाएंगे। ना गाड़ियों पर बत्ती लगाएंगे। लेकिन आज देखिये। घर नहीं केजरीवाल आलीशान बंगले में रहते हैं। जिसकी मरम्मत पर ही करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं। सिक्योरिटी के साथ गाड़ियों के काफीले में घूमते हैं। केजरीवाल ने झूठ की राजनीति में जनता को ऐसा फंसाया। आज उसी झूठ की वजह से ख़ुद ही तबाह हो गए।  क्योंकि जिस झूठ पर आलीशान महल खड़ा किया। अब ना तो वो महल केजरीवाल के पास बचेगा। ना ही गाड़ियों का क़ाफ़िला। अब देखना ये होगा की केजरीवाल एलजी से मुलाक़ात के बाद इस्तीफ़ा देते हैं।  या फिर कुछ और खेल करेंगे। केजरीवाल के बाद आख़िर कौन दिल्ली का मुख्यमंत्री बनेगा। क्योंकि सियासी खेल में कई नाम सामने आ रहे हैं।

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