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उत्तराखंड में UCC लागू करने की तैयारी तेज़, नियमावली में किया जा रहा संशोधन

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू करने का काम तेज़ हो गया है. कानून को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के लिए शासन द्वारा तैयार की जा रही नियमावली के प्रारूप में बदलाव किए जा रहे हैं. 424 पेजों की इस नियमावली में कई ऐसे प्रावधान पाए गए हैं, जो केंद्रीय कानूनों का दोहराव करते हैं. इन्हें हटाने और आवश्यक संशोधन करने पर मंथन जारी है.

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एक तरफ़ मोदी सरकार नए नए कानून लाकर संसद में विपक्ष की हालत ख़राब कर रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के फ़ैसलों से विपक्ष हैरान परेशान है। इस बार विपक्षी नेताओं को झटका लगा है उत्तराखंड में। जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UCC यानी समान नागरिक संहिता को लागू करने पर खेल कर दिया है। जल्द ही बड़ी बदलाव के साथ उत्तराखंड में UCC लागू होने जा रहा है।बता दें की उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा से इसे पारित कर राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी प्राप्त कर ली है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक़ ।


उत्तराखंड में UCC क़ानून के नियमों में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं।ताकी इसे प्रभावी और व्यवहारिक बनाया जा सके। 424 पेज की इस निमयावली में कई ऐसे प्रावधान हैं जो केंद्रीय क़ानूनों का दोहराव करते हैं जिन्हें हटाने और आवश्यक संशोधन करने पर मंथन जारी है।
गृह विभाग के नेतृत्व में इस नियमावली को अंतिम रूप देने की तैयारी की जा रही है। न्याय विभाग की समीक्षा में पाया गयाहै कि नियमावली के कई प्रावधान ऐसे हैं जो केंद्रीय क़ानूनों में मौजूद हैं। विषेश रूप से उत्तराधिकार और विवाह संबंधी विषयों में दोहराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

विभाग ने सिफ़ारिश की कि इन बिंदुओं को हटाकर नियमावली को आसान और स्पष्ट बनाया जाए ताकि आमजन के लिए इसका पालन भी सही हो। इसको लेकर वित्त विभाग के साथ इस पर विचार विमर्श किया जा रहा है। ताक़ि ये सुनिश्चित किया जा सके कि प्रस्तावित आर्थिक दंड विधि सम्मत हो और भविष्य में क़ानूनी विवादों का सामना न करना पड़े। तो आगे कुछ बताएँ उससे पहले ये बताते हैं कि आख़िर।
 

क्या है UCC ?

UCC का मतलब है समान नागरिक संहिता । UCC के तहत देश में सभी नागरिकों, हर धर्म, जाति, लिंग के लोगों के लिए एक ही क़ानून होगा। विवाह, तलाक़ बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बँटवारे जैसे तमाम विषयों में हर नागरिक के लिए एक क़ानून होगा

वहीं विशेषज्ञों का भी मानना है कि समान नागरिक संहिता नियमावली के ज़रिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढाँचे में लाया जाएगा।

बता दें की उत्तराखंड सरकार की इस पहल को देशभर में महत्वपूर्ण क़दम माना जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता को लागू करने का साहसिक निर्णय लिया है।सीएम धामी के इस बड़े कदम की संसद में अमित शाह ने भी जमकर तारीफ की है।और ऐलान कर दिया है कि पूरे देश की बीजेपी शासित राज्यों की सरकार UCC को लागू करेंगी। फिर चाहे विपक्ष कितना भी बवाल आए। उनका हिसाब तरीक़े से किया जाएगा  
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