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महाराष्ट्र में ईवीएम पर झूठ बोलकर फंसा विपक्ष, चुनाव आयोग ने खोल दी पोल
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ईवीएम पर विपक्ष लगातार घमासान कर रहा है.. विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. इस बीच चुनाव आयोग ने ईवीएम और वीवीपैट के सही मिलान होने का दावा किया है. जिससे विपक्ष की पोल खुल गई है
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विपक्ष ने चुनाव में हार के बाद जब जब चिल्लाते हुए EVM मशीन पर झूठी ख़बर फैलाई है हमेशा मुंह की ही खाई है। इस बा तो महाराष्ट्र में झूठ बोलना विपक्ष के नेताओं को इतना महंगा पड़ गया। कि चुनाव आयोग के एक्शन से मुँह दिखाने लायक नहीं बचा। दरअसल विपक्ष ने महाराष्ट्र चुनाव में हारते ही ठीकरा EVM और वीवीपैट पर फोड़ दिया। हर बार की तरह इस बार भी खिलियानी बिल्ली खंबा नोचे की तरह किया। और जमकर सरकार के ख़िलाफ़ झूठ फैलाते हुए नए नए आरोप लगाए।लेकिन इसी बीच चुनाव आयोग एक्शन में आया। और तुरंत सबूतों के साथ विपक्ष को आईना दिखाया। चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद साबित करते हुए ।
चुनाव आयोग ने रैंडम तरीक़े से EVM और वीवीपैट पर्ची का मिलान किया
EVM और वीवीपैट पर्ची का मिलान 100 फ़ीसदी सही निकला
यानी कहीं भी कोई अंतर देखने को नहीं मिला। जिससे विपक्ष तो उसके झूठ को जोरदार तमाचा पड़ा। क्योंकि जब भी विपक्ष हारता है। हमेशा मोदी सरकार और EVM के ख़िलाफ़ बौखलाता है। झूठा माहौल जनता के बीच में ये बनाता है कि EVM की वजह से चुनाव हार गए। राहुल गांधी हो या ममता बनर्जी की फ़ौज। या फिर अखिलेश यादव। सभी ने एक एक कर EVM पर सवाल उठाए हैं। और आज उनके सवालों ने ही सबूतों के साथ विपक्ष को आईना दिखाने का काम किया। ख़ुद महाराष्ट्र के एडिशनल मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. किरण कुलकर्णी ने खुलासा करते हुए बताया कि।"इन विधानसभा चुनावों में हमने 288 निर्वाचन क्षेत्रों में 1440 वीवीपैट का सत्यापन किया जो प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में विविपैट का 5 प्रतिशत है सभी वीवीपैट की काउंटिंग EVM के परिणामों से पूरी तरह मेल खाती है। जिससे सिस्टम की विश्वनियता को बल मिलता है"।
तो विपक्ष को आईना दिखाने में चुनाव आयोग के अधिकारी यहीं चुप नहीं हुए। जो जो बातें चुनाव आयोग की तरफ़ से कही।उससे नेता राजनेता हर कोई हैरान हो गया ।बता दें की चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना UBT कांग्रेस सबसे ज्यादा बौखलाई थी। शिवसेना यूबीटी के नेता आदित्य ठाकरे आने आरोप लगाया था कि । "हमने विधानसभा का बायकॉट किया है सदन में जश्न का माहौल बनाने की कोशिश हो रही है। ये EVM की सरकार है "।
इतना ही नहीं NCP शरद पवार ने तो EVM पर संदेह जताते हुए मतपत्रों का उपयोग कर पुनर्मतदान कराने की मांग कर रहे सोलापुर ज़िले के मरकडवा़ड़ी गांव के लोगों से मुलाक़ात तक की। झूठ फैलाया और माहौल बनाया। शरद पवार ने लोगों से कहा कि "हमने ईवीएम के बारे में कुछ आंकड़े एकत्र किये हैं। लोगों ने मतदान किया लेकिन अंत में परिणाम अप्रत्याशित थे।आपने इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाई और इस प्रक्रिया को बदलने की जरूरत है"।
अब शिवसेना UBT बोली है तो एनसीपी और कांग्रेस कैसे चुप बैठ सकती है। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले भी मैदान में आए। छूटते ही उन्होंने भी चुवान आयोग के साथ साथ बीजेपी को निशाने पर ले लिया। नाना पटोले ने तंज कसते हुए कहा कि "मेरा वोट मेरा अधिकार है। वोट खत्म करने के बाद हमारा कोई अधिकार ही नहीं बचता है। मेरा मतदान सही सलामत है या नहीं। अगर ऐसी शंका मन में आती है तो ये ही मेरी स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जाता है। जनता के बीच भावना है कि वोटिंग बैलट पेपर पर हो न की मशीन से "।
विपक्ष ने हारते ही इन आरोपों के साथ जमकर बवाल काटा। लेकिन जैसे ही चुनाव आयोग एक्शन मोड़ में आया। EVM वीवीपेट का मिलान करवाया। पिटारे ने एक झटके में आदित्य ठाकरे हो या नाना पटोले। या फिर शरद पवार सबकी बोलती बंद कर दी है। एक भी नेता अब सामने आकर इस मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि सबूत गवाह सब बता रहे हैं EVM भी ठीक है। वीवीपैट भी सही है। कमी है तो विपक्ष में जो बार बार अपनी हरकतों से हार जाता है। और झूठ फैलाकर खिसियाता है।जिसकी अंजाम उसे अब महँगा पड़ रहा है। बता दें की महायुति गठबंधन ने इस बार चुनाव में 288 में से 230 सीटें हासिल की थी। वहीं महाविकास अघाड़ी गठबंधन सिर्फ़ 46 सीटों पर सिमट गया था।
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