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वन नेशन वन इलेक्शन को मोदी कैबिनेट ने दी मंज़ूरी, संसद में जल्द हो सकता है पेश

केंद्र की मोदी सरकार ने वन नेशन वन इलेक्शन बिल को मंज़ूरी दे दी है अब सरकार इस बिल को संसद में पेश करेगी। अगर ये बिल दोनों सदनों में पास हो गया तो देश में एक साथ लोकसभा, विधानसभा और नगर निगम चुनाव कराने का रास्ता साफ़ हो जाएगा।

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पीएम मोदी एक के बाद एक मास्टर स्ट्रोक चल रहे हैं। जिससे विपक्ष बार बार चारों खाने चित हो जाता है। इस बार प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लिए ऐसा कदम उठाया है।कांग्रेस से लेकर सपा, बसपा, टीएमसी सबके हाथ पाँव फूल गए हैं।क्योंकि जिस वक़्त संसद में विपक्ष मोदी सरकार को घेरते हुए बवाल काट रहा था। उस वक़्त पीएम मोदी ने कैबिनेट मीटिंग बुलाई। और तगड़े बिल को मंज़ूरी दे दी। दरअसल 


मोदी कैबिनेट ने वन नेशन वन इलेक्शन को मंज़ूरी दे दी है।
अब संसद में वन नेशन वन इलेक्शन बिल को पेश किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक़ केंद्र सरकार ये विधायक संसद के इसी शीतकालीन सत्र में ही ला सकती है।

बता दें की पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में वन नेशन वन इलेक्शन के लिए कमेटी का गठन किया गया था। जिसकी रिपोर्ट हालही में में सौंपी गई थी। इसी रिपोर्ट के बाद अब मोदी। सरकार ने कैबिनेट बैठक में वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक को मंज़ूरी दी है। सूत्रों की मानें तो संसद में इसपर सभी दलों से सुझाव लेने के लिए JPC का भी गठन किया जा सकता है। JPC इस परिवर्तनकारी प्रस्ताव पर सामूहिक सहमति की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी।खैर हर बिल पर विपक्ष शोर मचाता है.. बिल को रोकने के लिए तमाम हथकंडे अपनाता है। ऐसा विपक्षी नेता वन नेशन वन इलेक्शन बिल को लेकर भी कर सकते हैं। क्योंकि पहले ही विपक्ष इस बिल का नाम सुनते ही विरोध में खड़ा हो चुका है।अब संसद में आएगा। विपक्ष माहौल ना बनाएगा तो ये कैसे हो सकता है।
इसलिए मोदी सरकार पूरी तैयारी के साथ आगे कदम उठा रही है। तो विपक्ष के लिए कैसे वन नेशन वन इलेक्शन बिल घातक होगा बताएँगे आगे। लेकिन उससे पहले ये बताते हैं कि आख़िर ।

 वन नेशन वन इलेक्शन बिल क्या है ?


वन नेशन वन इलेक्शन मतलब एक देश एक चुनाव से है।
इस क़ानून के तहत देशभर में समय समय पर होने वाले चुनाव एक साथ होंगे।
वन नेशन वन इलेक्शन से बार बार होने वाले चुनावी खर्चे से बचा जा सकेगा।

वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक अगर संसद से पास हो जाता है। तो इसका ना सिर्फ सरकार को फ़ायदा मिलेगा। बल्कि आम आदमी को भी फ़ायदा मिलेगा। समय बचेगा। बार बार वोटिंग के लिए नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन जितना आसान कैबिनेट में इस बिल को मंज़ूरी देना केंद्र के लिए हो गया। उतना आसान संसद से इसे पास करना नहीं होगा। क्योंकि इसके लिए उसे संविधान में संशोधन करने के लिए काम से कम छह विधेयक लाने होंगे। इसके लिए सरकार को संसद में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होने वाली हैं राज्यसभा में एनडीए के पास 112 और विपक्ष के पास 8 सीटें हैं। जबकि दो तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 164 वोटों की जरूरत होगी। इसी तरह लोकसभा में भी एनडीए के पास 292 सीटें हैं जबकि दो तिहाई का आँकड़ा 364 का है। इसी वजह से सरकार चाहती है कि सभी दलों से बैठकर इस पर चर्चा हो औऱ फिर उसके बाद ही इसे पास करवाया जाए। सिर्फ़ नेताओं से ही नहीं बल्कि देशभर के बुद्धिजीवियों और राज्यों की विधानसभा के अध्यक्षों के साथ भी वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर चर्चा हो सकती है। तो जल्द ही मोदी सरकार अब इस बिल को संसद में लाएगी। चर्चा करवाएगी। क्योंकि मोदी सरकार के लिए ये बिल काफ़ी अहम है। पीएम मोदी साफ़ शब्दों में कह चुके हैं कि बीजेपी बड़े और कड़े फ़ैसले बुलंदी से लेती है।
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