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Kadak Baat: ED के आगे मंत्री के PS ने खोला भयंकर राज, 35 करोड़ रूपए के जाल में फंसेंगे मंत्री?
झारखंड में ईडी ने नोटों का पहाड़ मिलने पर आलमगीर के निजी सचिव और नौकर को भी गिरफ्तार कर लिया है। उनसे पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं।
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झारखंड में नोटों से भरा कमरा मिलने से पूरे देश में हड़कंप मच गया है। ना सिर्फ जांच एजेंसियों के होश उड़े हुए हैं। बल्कि शासन प्रशासन तक दंग है।जैसे जैसे इस इस कैस में ईडी की जांच तेज हो रही है। वैसे ही ना सिर्फ राहुल। बल्कि सोनिया गांधी की धड़कनें भी बढ़ रही है। क्योंकि रांची में जिस मंत्री आलमगीर के पीएस के नौकर के घर से नोटों का ये ढेर बरामद हुआ है। वो ना सिर्फ कांग्रेस का कद्दावर नेता है। बल्कि राहुल गांधी का करीबी भी है। ऐसे में ईडी ने अब बड़ा एक्शन लेते हुए तुरंत ।
बता दें की नौकर के घर से अबतक 35 करोड़ रुपये कैश सोना चांदी जब्त किया जा चुका है। नोट गिनते गिनते मशीने तक खराब हो गई थी। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इस सहायक की सैलरी महज 15 हजार रुपए महीना है, लेकिन आप ये सोच रहे हैं कि उसके घर से सिर्फ नोट ही मिले हैं, तो ऐसा नहीं है. यहां नोटों की गड्डियों के अलावा, ट्रांसफर-पोस्टिंग के दस्तावेज भी मिले हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े राज्य के कुछ अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग कहां होना है, उनकी जगह पर किसे लाया जाना है इसकी पूरी जानकारी बाकायदा दस्तखत और तारीख के साथ मय सबूतों के ईडी के अधिकारियों को इसी घर में मिली। एक दस्तावेज पर लिखा था कि ”हटाना जरूरी है”। उसमें ग्रामीण विकास विभाग के अफसरों के ट्रांसफर से जुड़े पते दर्ज हैं। विभागीय मंत्री आलमगीर आलम का लेटर हेड भी बरामद हुआ है। अब समझ ही जाइए कि जब सचिव के पास पहुंचे सरकारी कागज नौकर के घर पहुंच सकते हैं। तो ये खेल किस किसकी मिलीभगत से हुआ होगा। यही सवाल नौकर से पूछताछ में किए गए हैं। सचिव का सामना सामना करवााया है। जिससे बड़े बड़े खुलासे ईडी के आगे हो गए हैं। वहीं इस मुद्दे पर झारखंड सरकार ने भी चुप्पी साध ली है।खुद के मंत्री पर जांच की आंच आ गई है। राज्य में करोड़ों का माल बरामद हो गया। लेकिन जब रिपोर्टरों ने झारखंड के मुख्यमंत्री से इस मामले पर सवाल किए। तो चंपाई सोरेन सवालों से भागते नजर आए।
सीएम साहब ही नहीं। जब खुद अपने पीएस की वजह से फंसे आलमगीर आलम से सवाल पूछा गया। तो वो सिर्फ ये कहते नजर आए कि पीएस एक सरकारी मुलाजिम है। अब जांच के निष्कर्ष सामने आएगा।
जैसे ही सीएम चंपाई सोरेन और आलमगीर आलम ने इस मुद्दे पर बचने की कोशिश की है। बीजेपी ने मोर्चा खोल दिया। मांग की कि ना सिर्फ आलमगीर आलम को बर्खास्त किया जाए। बल्कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए। जिससे जांच की आंच चंपाइ सोरेन तक भी पहुंचेगी । क्योंकि वो भ्रष्टाचार के आरोपियों के बचा रहे हैं।
बाबूलाल मरांडी के साथ साथ बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी झारखंड सरकार को भ्रष्ट बताया। और बीजेपी पर सवाल उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया।
एक तरफ हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद है। तो दूसरी तरफ नोटों का पहाड़ा झारखंड सरकार पर तमाम सवाल खड़े कर रहे हैं। अब कैसे ईडी रांची में आलमगीर के सचिव के नौकर कर घर तक पहुंची चलिए बताते हैं। दरअसल
वीरेंद्र राम पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। उन्होंने ईडी से ये भी कबूला था कि रिश्वत का पैसा मंत्री के घर पहुंचाया जाता है। ये पहली बार था जब ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल का इस मामले में नाम आया था और अब हुई कार्रवाई भी इसी खुलासे में अगला कदम है। खैर जिस तरीके से नोटों के बंडल नौकर के घर से मिले हैं। उससे जल्द ही मंत्री आलमगीर नपने वाले हैं।
खैर जबसे ईडी ने ये कार्रवाई की है तबसे आलमगीर आलम की धड़कनें बढ़ी हुई है। आने वाले वक्त में ईडी उनतक पहुंच सकती है। यही सोच सोचकर उसकी हालत खराब हो रही है। वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी सोनिया गांधी भी परेशान है। क्योंकि आलमगीर कांग्रेस नेता है । तो अब विपक्ष सवाल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सीधे सवाल कांग्रेस से कर रहा है।
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