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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से Kejriwal फिर फंस गए, AAP में मच गया हड़कंप

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे केजरीवाल को यहां से भी झटका लगा है

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 Arvind Kejriwal : दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal  चारों तरफ से बुरी तरह फंस गए हैं।इस बार सुप्रीम कोर्ट से ऐसा झटका लगा।आदमी आदमी पार्टी में बवाल ही मच गया ।दरअसल केजरीवाल हाईकोर्ट के जमानत पर स्टे के फैसले के खिलाफ गिड़गिड़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच थे।उम्मीद थी जल्द सुनवाई होगी और राहत मिल जाएगी। लेकिन एक झटके में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की सारी उम्मीदों को पानी फेर दिया। ऐसा फैसला सुना दिया।जिसने सीएम साहब की मुश्किलें और बढ़ गई है दरअसल।



सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई को 26 जून तक टाल दिया है।
SC ने केजरीवाल को हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट केजरीवाल की जमानत पर 25 जून को फैसला सुना सकता है।

केजरीवाल के वकील को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को पलट देगा।लेकिन यहां तो केजरीवाल के लिए ही खेल पलट गया।हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट पर भी टिप्पणी की औ कहा कि।

"आमतौर पर इस तरह के फैसले सुरक्षित नहीं रखे जाते हैं। बल्कि तभी सुना दिया जाता है. यहां जो हुआ वह अनोखा है"।

दरअसल केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्रायल कोर्ट फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे अभूतपूर्व करार दिया । सिंघवी ने कहा कि कोर्ट ने पहले स्टे दे दिया और फिर बाद में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आदेश एक दो दिन में आ जाएगा। इस पर सिंघवी ने सवाल उठाया कि क्या बेल को सूचीबद्ध करते समय ही स्टे किया जा सकता है।खैर सिंघवी दलील देते रहे।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इंतजार करने के लिए कह दिया। सिंघवी की जल्दबाजी दिखा रही है कि हाईकोर्ट में केजरीवाल का खेल बिगड़ सकता है। क्योंकि ईडी ने जो सबूत रखे हैं। वो सीधा सीधा दिखा रहे है कि केजरीवाल शराब घोटाले में शामिल रहे हैं। आरोपियों से उनका कनेक्शन रहा है। क्या है ये सबूत चलिए बताते हैं।


 ED का सुप्रीम कोर्ट में खुलासा ।
हमारे पास शराब नीति मामले में उस आदमी का बयान है जिसने कहा है कि हमने 100 करोड़ रुपये दिए हैं।
गवाहों के बयान में खुलासा हुआ कि केजरीवाल ने कहा कि मुझे 100 करोड़ रुपये दो।
शराब घोटाले में आई 100 करोड़ की रिश्वत अपराध की आय है।
हमने 45 करोड़ का पता लगा लिया है. हमने दिखाया है कि गोवा चुनाव में पैसों का इस्तेमाल कैसे किया गया।
फिर भी ट्रायल कोर्ट कहती है कि ED के पास दिखाने के लिए ठोस सबूत नहीं है।
हमारा केस यह है कि केजरीवाल दो मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के दोषी हैं।
केजरीवाल परोक्ष रूप से उत्तरदायी हैं क्योंकि AAP मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध की दोषी है।
AAP ने अपराध की कमाई से प्राप्त धन का उपयोग अपने उम्मीदवारों और उनके कार्यक्रमों के लिए चुनाव प्रचार में किया।
AAP के मामलों के संचालन के लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का दोषी होगा।
हमारे पास विनोद चौहान और केजरीवाल के बीच मोबाइल चैट हैं।
विनोद चौहान ने ही 100 करोड़ की रिश्वत में से 25 करोड़ सागर पटेल नाम के व्यक्ति को भेजे थे।
जमानत के क्रम में गवाहों के बयानों की विश्वनीयता पर विचार नहीं किया जा सकता है ।
जांच के महत्वपूर्ण पड़ाव पर केजरीवाल को रिहा करने से जांच पर असर पड़ेगा। क्योंकि केजरीवाल मुख्यमंत्री जैसे अहम पद पर हैं।


तो ईडी की ये वो दलील हैं। जिनके जाल में केजरीवाल बुरी तरह फंस गए हैं। और इन  सबूतों की वजह से ही हाईकोर्ट ने केजरीवाल की जमानत पर स्टे लगाया है। क्योंकि ईडी हाईकोर्ट में बार बार यही बोल रही थी। कि ट्रायल कोर्ट ने उसकी दलीलों पर गौर नहीं किया।और बिना सबूतों की फाइल पढ़े ही केजरीवाल को जमानत दे दी। खैर अब केजरीवाल और उनके वकील को इंतजार है हाईकोर्ट के फैसले का। अगर हाईकोर्ट केजरीवाल की जमानत खारिज कर देता है। तो ये लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे ।लेकिन हालात बता रहे हैं । कि केजरीवाल को राहत मिलने की उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है।
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