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Kadak Baat : Surjewala ने हरियाणा में Congress को बुरा फंसाया, देखती रह गई कुमारी शैलजा
हरियाणा में चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी तीन टुकड़ों में बंटती दिखाई दे रही है। हुड्डा और शैलजा की यात्रा के बीच अब रणदीप सुरजेवाला ने भी हरियाणा में यात्राएं करने का ऐलान कर दिया है।
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Congress : एक तरफ Congress के 99 सांसदों की सांसदी पर तलवार लटकी हुई है। अयोग्य घोषित करने के लिए हाईकोर्ट में मामला पहुंच गया है। और दूसरी तरफ हरियाणा कांग्रेस में घमासान मच गया है। जो कांग्रेस लोकसभा में हरियाणा में 5 सीटें जीत गई। वो उम्मीद में लगी थी कि इस बार सरकार बना पाएगी। लेकिन चुनाव के ऐलान से पहले ही कांग्रेस के नेताओं में आपस में ही महायुद्ध शुरू हो गया है।अभी तक कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा आमने सामने थे।मुख्यमंत्री पद के लिए नए नए जतन कर रहे थे।लेकिन अब इस लड़ाई में कांग्रेस का नया चेहरा मैदान में कूद पड़ा है। जिसने दिल्ली तक राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को हिलाकर रख दियाहै। और ये नया चेहरा है रणदीप सुरजेवाला का। चुनाव से पहले हरियाणा कांग्रेस में त्रिकोणीय लड़ाई शुरू हो गई है। अपने हाथों ने कांग्रेसी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर रहे हैं।दरअसल बड़ी खबर ये आई हैं कि।
रणदीप सुरजेवाला अब हरियाणा में परिवर्तन रैली करेंगे। 11 अगस्त को पानीपत, 17 अगस्त को नीलोखेड़ी और 18 अगस्त को जींद में रैली करेंगे। 3 रैलियों के जरिए सुरजेवाला पानीपत ,करनाल और जींद जिलों को कवर करेंगे।
सुरजेवाला ने अपनी रैली का ऐसे वक्त पर ऐलान किया है जब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेशाध्यक्ष उदयभान के नेतृत्व में हरियाणा मांगे हिसाब कार्यक्रम चल रहा है। औऱ तो और रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी प्रदेशभर में यात्रा निकाल रहे हैं। हुड्डा और कुमारी शैलजा के बाद अब सुरजेवाला भी फील्ड में उतर रहे हैं।जिसने कांग्रेस के अंदर सबकुछ ठीक नहीं होने की खबरों को हवा दे दी है। क्योंकि सुरजेवाला भी अब हाईकमान के साथ साथ हरियाणा के अन्य कांग्रेसी नेताओं को अपनी ताकत का अहसास कराने की तैयारी में लग गए हैं। खास बात तो ये है कि अभी तक कुमारी शैलजा की पदयात्रा से सुरजेवाला ने दूरी बनाए रखी है।
हालांकि जब सैलजा की यात्रा शुरू हुई थी तो दावा किया गया था कि चौधरी बीरेंद्र सिंह और सुरजेवाला दोनों मौजूद रहेंगे। लेकिन कोई दूर दूर तक दिखाई नहीं दिया। अब समझिए ये दूरी बनाने का एजेंडा सिर्फ एक था। कि सुरजेवाला खुद को भी मुख्यमंत्री की रेस में लेकर चल रहे हैं। खुद को दावेदार मान रहे हैं ।और यही रीजन है अपना जनसमर्थन जुटाने के लिए यात्राएं करने का ऐलान कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेसियों की अलग अलग रैली और यात्राएं। दिल्ली में बैठे खड़गे-राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ा रही है।
क्योंकि अगर यही चलता रहा तो कांग्रेस का वही हाल होगा जो छत्तीसगढ़ में हुआ। राजस्थान में हुआ। क्योंकि यहां भी कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दो दो दावेदार रहे हैं। राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत सरकार बनने से लेकर सरकार गिरने तक लड़ते रहे। बात करें छत्तीसगढ़ की तो यहां भूपेश बघेल और टीएस देव सिंह के बीच आखिर तक जंग चलती रही। आखिर में इस लड़ाई का नतीजा ये रहा कि ना तो कांग्रेस घर की रही ना घाट की। हार तो मिली ही। तमाम नेता पार्टी को आंख दिखाकर बीजेपी के साथ चले गए। अब हरियाणा में भी वही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। चुनाव से पहले यही बड़े बड़े नेता एक दूसरे के आमने सामने आ गए हैं। और हालात बता रहे हैं कि हरियाणा में कांग्रेस पार्टी में फूट सकती है।
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