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Kadak Baat : कोर्ट में CBI की दलीलें सुन भिड़ गए सिंघवी, AAP नेताओं ने ही खोला सीएम का राज?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत का सीबीआई ने सख्ती से विरोध किया है और खुलासा किया कि आप नेताओं ने ही केजरीवाल के खिलाफ सबूत किए।

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30 Jul 2024
( Updated: 10 Dec 2025
03:27 AM )
Kadak Baat : कोर्ट में CBI की दलीलें सुन भिड़ गए सिंघवी, AAP नेताओं ने ही खोला सीएम का राज?
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Kadak Baat : दिल्ली की सियासत में इस वक्त दो मुद्दे उबाल मार रहे हैं।एक सरकार की लापरवाही से तीन छात्रों की मौत और दूसरा केजरीवाल की जमानत में उनके ही नेताओं का फंसाया गया पेंच।दरअसल केजरीवाल की जमानत पर फैसला आना था लेकिन भागे भागे कोर्ट पहुंचे सीबीआई के वकील ने ऐसी बात जज साहब से बोल दी। जिसे सुनकर ना सिर्फ केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी बौखला उठे बल्कि कोर्ट में घंटों तक तीखी बहस चली।जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है लेकिन जिस तरीके से दलीलें रखी गई। उससे सीएम साहब बहुत बुरे फंस गए हैं। सबसे पहले तो छुटते ही CBI ने केजरीवाल को घोटाले का मास्टरमाइंड बताया। ये बात सुनते ही केजरीवाल के वकील ने जांच एजेंसी पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया कहा कि जांच एजेंसी के पास केजरीवाल के खिलाफ सबूत नहीं है।बस यहीं से सिंघवी ने केजरीवाल का खेल खराब करवा दिया। क्योंकि उसके बाद CBI ने जो सबूत खोले, सिंघवी की बोलती ही बंद हो गई।

सीबीआई ने कोर्ट में कहा -

  • अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी को नए सबूत मिले हैं
  • अब AAP के नेता कार्यकर्ता और उम्मीदवार बयान देने के लिए सामने आए, ये पहले नहीं आ रहे थे
  • केजरीवाल के खिलाफ हमें पंजाब से भी सबूत मिल हैं
  • केजरीवाल की गिरफ्तारी रेयर है लेकिन हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं
  • हमने इस केस में 44 करोड़ रुपये का पता लगाया है, ये पैसा गोवा गया
  • खुद केजरीवाल ने अपने उम्मीदवारों से कहा था कि पैसे की चिंता ना करें, चुनाव लड़ें
  • हमने पंजाब के दो अधिकारियों  के खिलाफ जांच की मंजूरी मांगी थी लेकिन राज्य सरकार ने इनकार कर दिया
  • केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद खुद पंजाब के अधिकारी आए और बयान दिए, इससे सीधा सबूत नहीं हो सकता
  • केजरीवाल शराब घोटाले के मास्टरमाइंड हैं सभी मंत्रियों की नियुक्ति उन्होने की 
  • विजय नायर भी इसका हिस्सा है वो मीडिया कॉर्डिनेटर थे
  • विजय नायर शराब घोटाले को लेकर केजरीवाल के संपर्क में थे
  • केजरीवाल कैबिनेट के मुखिया हैं उन्होने आबकारी नीति पर हस्ताक्षर किए, ये कोविड के दौरान हुआ

CBI ने भरपूर तरीके से केजरीवाल की जमानत का विरोध किया लेकिन एजेंसी के उन सबूतों ने आम आदमी पार्टी में भी तहलका मचा दिया है।जिसमें साफ साफ कहा गया कि आप नेता ही केजरीवाल के दुश्मन बने खुद सामने आकर सच्चाई बताई।अब ऐसे में सवाल ये है कि केजरीवाल के खिलाफ बोलने वाले नेता कौन है। आखिर किसने पार्टी का असली राज सामने आकर रखा। इसी के साथ सीबीआई ने केजरीवाल को जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट भेजने की भी दलील रखी लेकिन सीबीआई की इस दलील पर केजरीवाल के वकील सिंघवी भड़क उठे  अब भड़कने की वजह क्या थी ये भी सुन लीजिए- सीबीआई ने सीधे हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई का विरोध करते हुए कहा कि कुछ परिस्थितियों में ऐसा किया जा सकता है लेकिन हाईकोर्ट जमानत के लिए पहली अदालत नहीं हो सकती है सिंघवी को लगा की अब हाईकोर्ट में सीबीआई तथ्य़ों के उनका खेल बिगाड़ रही है। तो भटकाते हुए मुद्दों से अलग सुनवाई को ले गए।बार बार एक ही बात कहते दिखे कि केजरीवाल के खिलाफ एजेंसी के पास सबूत नहीं है।

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यह इंश्योरेंस अरेस्ट है सेक्शन 160, CRPC का संबंध गवाह से है और उन्हें सीबीआई ने इसी के तहत बुलाया था 2023 में गवाह के तौर पर बुलाया गया। फिर कोई समन नहीं कुछ नहीं और 2024 में गिरफ्तार कर लिया. केजरीवाल के खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है. विजय नायर का नाम लिया जाता है जिसे पहले ही जमानत मिल चुकी है।

इसी के साथ सिंघवी ने एक और चौॆंकाने वाली दलील कोर्ट में दे डाली।उस दलील को सुनकर ना सिर्फ जज साहब हैरान रह गए बल्कि  दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना के भी होश उड़ गए। सिंघवी ने आगे दलील देते हुए कहा -

CBI ने केजरीवाल को मास्टरमाइंड कहा लेकिन मास्टरमाइंड पर एक भी चीज का खुलासा नहीं। ये संस्थागत फैसला था कि केजरीवाल ने फाइल पर साइन किए।लेकिन हां 15 अन्य लोगों ने भी साइन किए एलजी ने भी। मैं एलजी को सह आरोपी नहीं बनाना चाहता था लेकिन सीबीआई की अपनी दलील के मुताबिक उन्हें आरोपी बनाना चाहिए। चीफ सेक्रेट्री समेत 50 नौकरशाहों को सह आरोपी बनाना चाहिए।

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जब सीबीआई की दलीलों का तोड़ सिंघवी नहीं निकाल पाए,तो उन्होंने ऐसे लोगों पर छींटे उछालनी शुरू कर दी।जिनकी वजह से शराब घोटाला उजागर हुआ है यानी की दिल्ली के एलजी.. लेकिन फिर भी केजरीवाल को बचा नहीं पाए। अब जमानत पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। देखना ये होगा की दिल्ली के मुख्यमंत्री को सीबीआई को राहत मिलती है, या फिर वो और बुरी तरह फंसते हैं।

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