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Kadak Baat : कर्नाटक हाईकोर्ट से सीएम सिद्धारमैया को झटका, जमीन घोटाले में अर्जी हुई खारिज

कर्नाटक हाईकोर्ट से सिद्धारमैया को बड़ा झटका लगा है कि MUDA केस में सिद्धारमैया की अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है हाईकोर्ट की ओर से कहा गया है कि जमीन घोटाले में सिद्धारमैया पर केस चलेगा. बता दें कि सिद्धारमैया ने हाईकोर्ट में राज्यपाल के फैसले को चुनौती दी थी ।

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Kadak Baat : एक तरफ़ राहुल गांधी चुनावी राज्यों में जीत के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ कांग्रेस के लिए बुरी ख़बर सामने आ गई है। कर्नाटक से सिद्धारमैया की कुर्सी जाने वाली है। बड़ी ख़बर ये है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को MUDA लैंड स्कैम में बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने सिद्धारमैया की अर्ज़ी ख़ारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि ज़मीन घोटाले में सिद्धारमैया पर केस चलेगा। सिद्धारमैया ने राज्यपाल के केस चलाने वाले आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यानी कि अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कुर्सी हिलती नज़र आ रही है। जैसे ही हाईकोर्ट का ये फ़ैसला आया, कांग्रेसियों की हालत ही ख़राब हो गई। दरअसल, इससे पहले सिद्धारमैया के ख़िलाफ़ जांच के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मंज़ूरी दी थी। राज्यपाल के फैसले के खिलाफ ही सिद्धारमैया गिड़गिड़ाते हुए हाईकोर्ट पहुंचे थे और आखिर में हाईकोर्ट से भी मुंह की खानी पड़ी। ऐसे में अब सिद्धारमैया के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तुरंत बीजेपी ने उनके इस्तीफे की मांग कर दी है।


अब बीजेपी ने भी सिद्धारमैया की कुर्सी हिलाना शुरू कर दिया है। जाहिर सी बात है, घोटाले के आरोप काफी गंभीर हैं। ऐसे में अगर सिद्धारमैया दोषी करार दिए जाते हैं या जेल पहुंच जाते हैं, तो उनकी कुर्सी जाना तय है। वहीं दूसरी तरफ़ डीके शिवकुमार की लॉटरी लग सकती है, क्योंकि काफी वक्त से वो कुर्सी की लड़ाई लड़ रहे हैं। ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले को लेकर आलाकमान तक कुर्सी के विवाद को लेकर पहुंच चुके हैं। ऐसे में अगर सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं, तो डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

तो आगे कुछ बताएं, उससे पहले सिद्धारमैया पर लगे आरोप और घोटाले क्या हैं, चलिए बताते हैं।

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क्या है MUDA घोटाला?

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मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण या MUDA कर्नाटक की एक राज्य स्तरीय विकास एजेंसी है। MUDA का काम शहरी विकास को बढ़ावा देना, गुणवत्तापूर्ण शहरी बुनियादी ढांचे को उपलब्ध कराना और किफायती आवास उपलब्ध कराना है। MUDA शहरी विकास के दौरान अपनी ज़मीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में ज़मीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी, जिसे 2020 में बीजेपी की सरकार ने बंद कर दिया था। योजना बंद होने के बाद भी MUDA ने 50:50 योजना के तहत ज़मीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा।

आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया। आरोप है कि सिद्धारमैया की पत्नी की 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि MUDA ने अधिग्रहित की थी, इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की थीं। आरोप है कि MUDA ने इस ज़मीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी। मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री की पत्नी ने आवेदन किया, जिसके आधार पर MUDA ने विजयनगर III और IV फेज में 14 साइटें आवंटित कीं। जिन 14 साइटों का आवंटन मुख्यमंत्री की पत्नी के नाम पर हुआ, उसी में घोटाले के आरोप लग रहे हैं।

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तो इसी घोटाले में अब मुख्यमंत्री की जान गले में आ गई है। ना सिर्फ सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है, बल्कि मुख्यमंत्री की कुर्सी भी हिल सकती है। 

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