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Kadak Baat : पीएम मोदी के खिलाफ बदजुबानी कर फंसे शशि थरूर, हाईकोर्ट ने दिया झटका

कांग्रेस सांसद शशि झरूर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. पीएम मोदी के खिलाफ टिप्पणी करने के मामले में कोर्ट ने थरुर के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया है. और दोनों पक्षों को 10 सितंबर को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने का निर्देश दिया है।

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Kadak Baat : जब जब कांग्रेसियों की जुबान फिसली, तब तब कांग्रेस पर बड़ा भूचाल आया है। पहले राहुल गांधी की सांसदी चली गई, उसके बाद नए नवेले 99 सांसदों की कुर्सी दांव पर लग गई। लेकिन इस बीच कांग्रेस के ऐसे सांसद अपनी फिसली जुबान की वजह से फंसे हैं, जिससे गांधी परिवार भी सदमे में चला गया है। कांग्रेस के ये सांसद कोई और नहीं, बल्कि शशि थरूर हैं। मोदी के खिलाफ बदजुबानी करने पर शशि थरूर के खिलाफ कोर्ट भी सख्त हो गया है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ मानहानि केस को खारिज करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर पिछली रोक भी हटा दी है।


यानी की अब शशि थरूर के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ेगी। कोर्ट सबूत भी देखेगा, गवाहों को भी सुनेगा और शशि थरूर का हिसाब-किताब भी होगा। अब क्यों फंसे हैं शशि थरूर, चलिए विस्तार से मामला भी बताते हैं। दरअसल,कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने साल 2018 के बैंगलोर साहित्य महोत्सव में पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी की थी।

  • शशि थरूर ने पीएम मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से की थी।
  • शशि थरूर के खिलाफ मानहानि का केस बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने करवाया था।
  • इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने शशि थरूर को तलब किया था।
  • कोर्ट ने इस मामले में 2019 में शशि थरूर को जमानत दे दी थी।
  • IPC की धारा 499 (मानहानि) और 500 (मानहानि के लिए सजा) के तहत शिकायत दर्ज की गई है।

अब इस मामले पर हाईकोर्ट ने जज ने सुनवाई करते हुए साफ शब्दों में कहा कि इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करने का कोई आधार नहीं मिला है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के 10 सितंबर को निचली अदालत में पेश होने का भी निर्देश दिया है। दरअसल, शशि थरूर ने निचली अदालत के 27 अप्रैल 2019 के आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करवाया था और कोर्ट ने थरूर को आरोपी के तौर पर पेश होने के लिए कहा था। दरअसल, थरूर के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में बब्बर ने आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि -

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कांग्रेस नेता के बयान से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मैं भगवान शिव का भक्त हूं, हालांकि आरोपी ने करोड़ों शिव भक्तों की भावनाओं की पूरी तरह से अवहेलना की, ऐसा बयान जिससे भारत और देश के बाहर सभी भगवान शिव भक्तों की भावनाएं आहत हुईं।

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हालांकि 2018 में थरूर ने दावा किया था कि एक RSS नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से की थी। उन्होंने इसे असाधारण रूपक बताया था। लेकिन इस मामले में कोर्ट से थरूर को जमानत जरूर मिल गई थी, लेकिन आफत और बढ़ गई है। शशि थरूर की अब सांसदी भी दांव पर लग सकती है। क्यों? क्योंकि IPC की धारा 499 के तहत आपराधिक मानहानि एक गैर-जमानती अपराध है। अगर कोई व्यक्ति आपराधिक मानहानि का दोषी पाया जाता है, तो उसे दो साल तक की कैद या जुर्माना लगाया जा सकता है। और धारा 500 के तहत आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है। तो ऐसे में अगर कोर्ट इस मामले पर सुनवाई के बाद शशि थरूर को आरोपी घोषित कर देता है और दो साल की सजा सुनाई जाती है, तो शशि थरूर की सांसदी जा सकती है। अब देखना ये होगा कि कोर्ट आगे क्या फैसला इस मामले पर सुनाता है।


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