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Kadak Baat : स्पेशल स्टेशल की मांग पर नीतीश को मोदी ने दे दिया झटका, RJD ने बुरी तरह घेरा
केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से इनकार कर दिया है जिसपर सियासत शुरू हो गई है
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Narendra Modi : Narendra Modi तीसरी बार सत्ता में तो आ गए। लेकिन कुर्सी पाने के लिए सहयोगी का साथ लेना पड़ा। अकेले बीजेपी 240 सीटों पर ही सिमट गई। बहुमत का आंकड़ा छू नहीं पाई। टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सासंदों ने सरकार बनाने में साथ दिया । लेकिन जिस वक्त सरकार बनी उस वक्त नीतीश कुमार के साथ साथ आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तरफ से कई मांगे मोदी के आगे रखी गई। क्योंकि दोनों ही किंगमेकर की भूमिका थे। उम्मीद थी दवाब बनाएंगे आंख दिखाएंगे तो मांग पूरी हो जाएगी। दिलासा भी कुछ ऐसा ही दिया गया था। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे बड़ी मांग थी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की। लेकिन मोदी शाह ने एक मिनट में ही नीतीश कुमार को झटका दे दिया। संसद के पहले दिन नितीश कुमार को बता दिया किसी का दवाब काम नहीं आएगा। नियमों से हर फैसला लिया जाएगा। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब दिया है और कहा कि।"अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता। यह रुख बिहार में भाजपा के सहयोगियों द्वारा पिछड़े राज्य के लिए दर्जा मांगे जाने के एक दिन बाद आया है"।
जेडीयू की मांग पर लोकसभा में बकायदा लिखित जवाब दिया गया। दरअसल इस बार पीएम मोदी के साथ आते ही नीतीश कुमार ने विशेष राज्य के दर्जे की जोरों शोरों से मांग की। सर्वदलीय बैठक में भी अपनी मांग को उठाया। कार्यकरिणी की बैठक में भी इस मुद्दे को जमकर भुनाया। लेकिन हाथ खाली के खाली रह गए। केंद्र का लिखित जवाब तो विपक्षियों को मानों नीतीश कुमार को घेरने के लिए संजिवनी मिल गई हो। लालू की पार्टी ने तुरंत इस मुद्दे पर नीतीश कुमार को घेरना शुरू कर दिया है। आगे पीछा का गणित जोड़ा नहीं। माइक थामा और घेर लिया। आरजेडी नेता मनोज झा ने तंज कसते हुए क्या कुछ कहा ।
जैसे ही आरजेडी ने इस मांग को उठाकर नीतीश पर सवाल उठाए। बीजेपी को घेरने की कोशिश की। वैसे ही सांसद गिरिराज सिंह ने आरजेडी को आईना दिखा दिया।जिससे लालू की पार्टी के नेताओं की बोलती बंद हो गई।
तो चलिए ये भी बताते हैं कि आखिर बिहार क्यों विशेष राज्य के दर्जे की मांग करता आया है। दरअसल 2000 में बिहार का बंटवारा कर झारखंड बना था बिहार का दावा है कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और उसके अलग होने से उसकी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। बिहार देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दावा करते हैं कि आज भी बिहार की बड़ी आबादी तक स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे की पहुंच नहीं है। तो ऐसे में पुराने वक्त से विशेष राज्य के दर्जे की मांग की जा रही है। लेकिन एक बार फिर इस मांग पर पानी फिर गया है । लेकिन अब जेडीयू की तरफ से कहा जा रहा है कि एक मांग खारिज हुई है लेकिन पीएम मोदी कोई बड़ा ऐलान भी बिहार के लिए जल्द कर सकते हैं। तो चलिए बिहार की मांग खारिज होने पर जेडीयू नेता क्या कुछ बोले सुनवाते हैं।
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