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Kadak Baat : खतरे में कपिल सिब्बल की कुर्सी, कोलकाता रेप केस में बयान देने पर मिली चेताववी

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन विवादों में घिरती नजर आ रही है क्योंकि कपिल सिब्बल ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप केस के बाद एक प्रस्ताव जारी किया जिसमें घटना को बड़ी बीमारी बताया. अब कपिल सिब्बल पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भड़क गए हैं।

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Kadak Baat : बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी की घटना पर बंगाल से लेकर बाहर तक बवाल मचा हुआ है। आरोपी ने कैसे डॉक्टर को मौत के घाट उतारा पॉलीग्राफी टेस्ट में भयंकर खुलसा हो गया है। जिसके बाद जांच की आंच कॉलेज के प्रिंसिपल से लेकर तमाम लोगों तक पहुंच रही है।इस मुद्दे पर जहां एक और सियासत कर ममता बनर्जी फंस गई है, वहीं दूसरी तरफ कपिल सिब्बल में घिनौना बयान देकर अपनी फजीहत करवा ली है। ऐसा क्या हुआ की ममता के साथ साथ कपिल सिब्बल में कोलकाता की घटना पर फंस गए। चलिए बताते हैं कि दरअसल कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर एक प्रस्ताव जारी किया था ।प्रस्ताव में उन्होंने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई रेप की घटना को बड़ी बीमारी बताया था।

कोलकाता रेप केस पर टिप्पणी कर फंसे कपिल सिब्बल

एक बेटी की आबरू को लूटकर उसकी सांसों को रोक दिया गया। उसके लाखों सपनों को दरिंदगी दिखाकर चूकनाचूर कर दिया गया। इस बेटी के मां बाप इंसाफ के लिए खून के आंसू बहा रहे हैं और कपिल सिब्बल जैसे नेता इस घटना को बड़ी बीमारी बताकर कहीं ना कहीं आरोपी को बचाने का काम कर रहे हैं। लेकिन कपिल सिब्बल को इस तरह का बयान देना इतना महंगा पड़ गया है कि वकीलों ने उनके खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है।  सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने कपिल सिब्बल को पत्र लिखा है और कपिल सिब्बल को मांफी मांगने को कहा है ।ऐसा ना करने पर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चेतावनी दी है।यानी की अगर कपिल सिब्बल मांफी नहीं मांगते है उनकी कुर्सी हिलना लाजमी है। अग्रवाल ने अपने पत्र में साफ साफ लिखा - 

कपिल सिब्बल द्वारा जारी प्रस्ताव सप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की एक्जीक्यूटिव कमेटी द्वारा अप्रूव नहीं था. इस तरह से ये प्रस्ताव अवैध है. कपिल सिब्बल ने अपने पद का दुरुपयोग किया है। इस तरीके से वो घटना को कमतर करके दिखा रहे हैं  इस तरह का बयान शरारतपूर्ण, खतरनाक, असंवेदनशील और बलात्कार हत्या पीड़िता और लाखों डॉक्टरों, प्रशिक्षुओं और छात्रों के साथ घोर अन्याय है। यह लोग अभी भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सुरक्षित कामकाजी माहौल की मांग कर रहे हैं तो ऐसे में कपिल सिब्बल इस प्रस्ताव को वापस लें. और 72 घंटे के अंदर सार्वजनिक रूप से मांफी मांगे। ऐसा नहीं करने पर सिब्बल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।

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तो कपिल सिब्बल की कुर्सी अब खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है और अगर उन्होंने अपने प्रस्ताव पर मांफी नहीं मांगी तो कोर्ट में ही कपिल सिब्बल बुरी तरह फंस जाएंगे। क्योंकि जिस तरीके की टिप्पणी कपिल सिब्बल की ओर से की गई है वो वाकइ चौंकाने वाली है। बेशक वो ये कहने की कोशिश कर रहे थे कि रेप की घटनाओं को अंजाम देने वाले लोग मानसिक रुप से बीमार होते हैं, लेकिन उनका बयान कहीं ना कहीं कोलकाता की घटना को सोफ्ट करना था। बता दें कि कपिल सिब्बल ही नहीं, इस घटना पर ममता बनर्जी भी लगातार राजनीति कर चारों तरफ से फंस गई है खुद के राज्य में घटना हुई और मेडम साहिबा उलटा प्रदर्शन करने उतर आई। सवाल ये उठा कि आखिर वो किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में ममता बनर्जी पीएम मोदी को चिट्ठी लिखने भी बैठ गई।रेप के आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई के लिए कानून बनाने की भी मांग कर डाली। लेकिन जिस तरीके से कॉलेज का प्रिंसिपल पकड़ा गया। और पूछताछ में खुलासे हुए छापेमारी में सबूत मिटाए गए. उससे ममता बनर्जी और बंगाल पुलिस फंसती हुई दिखाई दे रही है।

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