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Kadak Baat : 3 नए अपराधिक कानून से चिढ़ गए चिदंबरम, उपराष्ट्रपति ने कांग्रेस की निकाल दी हेकड़ी

नए अपराधिक कानून पर टिप्पणी करना कांग्रेस नेता पी चिंदबरम को महंगा पड़ गया. उपराष्ट्रपति ने चिदंबरम की जमकर क्लास लगाई

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Modiप्रधानमंत्री Modi 100 दिनों के रोडमैप पर तेजी से एक्शन ले रहे है। इसी एक्शन के चलते सबसे पहले तीसरी बार सरकार बनते ही देश में तीन आपराधिक कानून लागू किए गए। लेकिन अब विपक्ष को ये कानून इतनी बुरी तरह चुभ गए हैं। कि सड़क से लेकर संसद तक विपक्षियों ने माहौल बनाना। बवाल काटना शुरू कर दिया। इस बीच कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने ऐसी हरकत कर डाली ।कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गुस्से में बुरी तरह भड़क उठे। क्योंकि पी. चिदंबरम ने तीनो अपराधिक कानून को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि ।

तीन नए आपराधिक कानून अकुशल लोगों ने तैयार किए। केंद्र ने एक जुलाई से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानून बनाने में विधि आयोग की अनदेखी की।


बस इतनी बात सुनते ही उपराष्ट्रपति भड़क गए और उन्हें एक मिनट में चिदंबरम की हेकड़ी निकाल दी। सबसे पहले तो उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने चिदंबरम के बयान को अक्षम्य करार दिया। और इस आपत्तिजनक बयान को वापस लेने के लिए कहा। जगदीप धनखड़ ने कहा कि ।

वह सुबह एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र में चिदंबरम का साक्षात्कार पढ़कर दंग रह गए, जिसमें उन्होंने कहा है कि "नए कानून अकुशल लोगों ने तैयार किए हैं। मैं इस मंच से उनसे अपील करता हूं कि कृपया संसद सदस्यों के बारे में इस आपत्तिजनक, मानहानिकारक और निंदनीय टिप्पणी को वापस लें। मुंझे आशा है कि वो ऐसा करेंगे। जब जानकार लोग जानबूझकर आपको गुमराह करते हैं तो हमें सतर्क रहने की जरूरत है जो इस देश का वित्त मंत्री रह चुका है लंबे समय तक सांसद रहा है वर्तमान में राज्यसभा का सदस्य है ने मुझे स्तब्ध कर दिया।


तो जिस तरीके से चिदंबरम ने संसद से पास हुए बिल को अकुशल लोगों के जरिए तैयार किया बिल बताया। सांसदों की मजाक उड़ाया। उससे बीजेपी नेता काफी गुस्से में है। तो चलिए अब उन तीन कानूनों के बारे में भी बताते हैं कि आखिर इनके लागू होने से क्या सख्ती बढ़ी है।और क्यों विपक्ष तिलमिला रहा है।


 नए अपराधिक कानून की महत्वपूर्ण बातें ?
FIR, जांच और सुनवाई की समय सीमा तय की गई है, 3 दिन के अंदर FIR और 45 दिन के अंदर फैसला देना होगा।
नए कानून के जरिए अब FIR किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जा सकती है।
जिस राज्य में अपराध हुआ है FIR उस राज्य में कहीं भी दर्ज करवाई जा सकती है।
 FIR दर्ज करने के बाद पुलिस को सिस्टम मेंटेन करना होगा और उस FIR से जुड़ी तमाम जानकारी को PCR के साथ साझा करना होगा।
साथ ही मामले से जुड़ी जानकारी और जांच के संदर्भ में कौन से कदम उठाए गए हैं, ये सारी डीटेल्स 90 दिनों के भीतर पीड़ित को देना होगा । 
इस नए कानून के तहत जांच प्रक्रिया को भी 180 दिनों के अंदर पूरा करना होगा। 
चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट के पास चार्ज फ्रेम करने के लिए 60 दिनों का समय होगा और ट्रायल शुरू करना होगा।
जांच की सत्यता को बनाए रखने के लिए किसी भी तरह का संदेह नहीं हो उसके लिए पुलिस को जांच के दौरान वीडियो बनाना होगा।

तमाम तरह के बदलाव कानून व्यवस्था में सुधार के लिए किए गए हैं।  लेकिन ये सुधार विपक्ष को चुभ रहे हैं।अब विपक्ष चीखे चिल्लाए माहौल बनाए कुछ होने वाला नहीं है। क्योंकि अभी तो पीएम मोदी और बड़े एक्शन ले सकते हैं।

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