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संभल हिंसा मामले में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका, दर्ज FIR रद्द करने वाली याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट में संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा मामले में सुनवाई की गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे के दौरान हिंसा के लिए लोगों को भड़काने के मामले में आरोपी सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क को झटका दिया है. बर्क की FIR रद्द करने की माँग वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है इसके साथ ही तुरंत गिरफ़्तारी पर रोक लगाते हुए बर्क को थोड़ी राहत दी है

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एक तरफ़ संभल मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट तहलका मचा रही है। सवाल उठा रही है कि जब कोर्ट में बंद लिफ़ाफ़ा खुलेगा। तो ना जाने क्या राज खुलेगा। सर्वे रिपोर्ट के तहलके के बीच संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर बड़ी आफ़त आ पड़ी है। क्योंकि इस बार सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर सीधा सीधा गिरफ़्तारी की तलवार लटक गई। दरअसल पुलिस की FIR के बाद अब ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसद जियाउर्रहमान बर्क को बहुत बड़ा झटका दिया है । हाईकोर्ट ने सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क की FIR रद्द करने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले ने FIR रद्द नहीं होगी, पुलिस की जांच जारी रहेगी।


हालांकि हाईकोर्ट की तरफ़ से एक राहत भी जियाउर्रहमान बर्क को दी गई है। जिसमें फ़िलहाल उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी है। लेकिन ये रोक हमेशा के लिए नहीं है। जैसे जैसे इस केस की जाँच आगे बढ़ेगी और कोई भी पुख़्ता सबूत मिलेंगे तो आने वाले वक़्त में जियाउर्रहमान बर्क की गिरफ़्तारी हो सकती है। क्योंकि कोर्ट ने आगे कहा है कि ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा-  जिन धाराओं में सांसद जियाउर्रहमान बर्क के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई है उसमें सात साल से कम की सजा होती है। इस मामले में पुलिस सांसद बर्क को नोटिस जारी करेगी. नोटिस जारी कर उन्हें पूछताछ के लिए बुला सकती है सांसद को पुलिस की जाँच में सहयोग करना होगा। अगर पुलिस के नोटिस देने पर बयान दर्ज कराने के लिए सांसद बर्क नहीं आएंगे और पुलिस की जाँच में सहयोग नहीं करेंगे तभी उनकी गिरफ़्तारी होगी। 

तो ऐसे में जियाउर्रहमान बर्क के पुलिस अब जब भी बुलाई। उन्हें पूछताछ में सहयोग करने के लिए हाज़िर होना होगा। बता दें की संभल में 24 नवंबर को मस्जिद सर्वे को लेकर भड़की हिंसा मामले में पुलिस ने बर्क को आरोपी नंबर एक बनाया है। उनके ख़िलाफ़ कई धाराओं में FIR दर्ज की गई थी। क्योकि बर्क पर हिंसा के लिए लोगों को भड़काने का आरोप लगा।  हालाँकि अपने ऊपर हुई FIR को रद्द कराने के लिए ही बर्क इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचे। और राहत के के लिए गिड़गिड़ा रहे थे। लेकिन एक झटके में ही हाईकोर्ट ने जियाउर्रमान बर्क को की नींद उड़ा दी है। तो सिर्फ़ यही सांसद जियाउर्रहमान बर्क की मुश्किलें ख़त्म नहीं हुई। इसके साथ ही उनके ख़िलाफ़ अवैध निर्माण को लेकर हंटर चला है. जिससे पूरे बर्क परिवार में हड़कंप मच गया है।

अवैध निर्माण के मामले में जियाउर्रहमान बर्क को तीसरा नोटिस जारी किया गया है। नोटिस जारी कर प्रशासन ने बर्क की आपत्तियों को ख़ारिज कर दिया है।

दरअसल बर्क ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि कोई नया निर्माण नहीं किया गया। ये मरम्मत कार्य था, लेकिन प्रशासन ने भी बर्क के जवाब पर आपत्ति जताई और कहा कि ये मरम्मत का काम नहीं है बल्कि ये झूठ बोलकर अवैध निर्माण किया जा रहा है.. बर्क को ज़ारी किए गए तीसरे नोटिस में कहा गया है।

यदि संभल के सांसद निर्माण कार्य नहीं रोकते हैं तो अधिनियम की धारा 9(1) के अंतर्गत सज़ा जुर्माना 10,000 रुपये तक किया जाएगा। इसके बाद भी यदि निर्माण जारी रहता है तो प्रतिदिन 500 रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन एक्ट 1958 की धारा 6 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रशासन की अनुमति लिए बिना निर्माण कार्य कराना अवैध है। साथ ही निर्माण कार्य का नक़्शा स्वीकृत कराना भी ज़रूरी है।निर्माण के फोटोग्राफ की जांच से स्पष्ट है कि मकान में किया गया निर्माण सिर्फ मरम्मत कार्य न होकर नव निर्माण की प्रकृति का है।

तो अब सांसद पर दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ़ हिंसा वाले केस में गिरफ़्तारी का डर दिख रहा है। दूसरी तरफ़ अवैध निर्माण का केस उनके लिए जी का जंजाल बन गया है। जिससे सपा में भी हड़कंप मचा हुआ है।
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