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केशव प्रसाद मौर्य के बयान से हैरान हो गए सीएम योगी, क्या लाइन पर आ गए केशव ?

यूपी बीजेपी में चली उठापटक के बीच अचानक केशव प्रसाद मौर्य के सुर बदल गए हैं. केशव प्रसाद मौर्य योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए नजर आए हैं

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यूपी में एक खबर ने पिछले दिनों काफी तहलका मचाया कि योगी आदित्यनाथ को हटाया जाएगा और केशव को पावर में लाया जाएगा।ये खबरें तब तूल पकड़ी जब केशव प्रसाद मौर्य ने भरे मंच से खडे़ होकर चेतावनी दी, सगंठन सरकार से बड़ा होता है।उसके बाद दनादन दिल्ली के दौरे लगाए, योगी की बैठकों से दूरी बनाई अलग गुट बनाते दिखाई दिए, लेकिन आखिर में योगी दिल्ली पहुंचे, ना सिर्फ मोदी- शाह को समझा दिया बल्कि केशव को भी एक झटके में ठिकाने लगा दिया। इसी का नतीजा है कि केशव प्रसाद मौर्य का रौब एक झटके में ढीला हो गया। अब महीने भर बाद केशव प्रसाद मौर्य का एक ऐसा बयान सुनाई पड़ा जिसने ना सिर्फ सीएम योगी की जमीन हिला दी है, बल्कि दिल्ली तक सभी को हैरान कर दिया है, केशव प्रसाद मौर्य योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते सुनाई दिए हैं। 

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पीएम मोदी को दुनिया का सबसे अच्छा नेता बता रहे हैं और सीएम योगी को देश का सबसे सर्वश्रेष्ठ  लीडर, जिससे समझा जा सकता है कि केशव प्रसाद मौर्य लाइन पर आ गए हैं। उन्हें समझ में आ गया है कि योगी को यूपी से हटाना मुश्किल ही नहीं नाममुकिन है, और ऐसी कोशिश भी करने पर उनका ही बुरी हाल होगा। ये गुटबाजी उन्हें ही ले डूबेगी जैसे की अब उनके साथ हुआ है। दिल्ली से भी हड़काया गया और यूपी में भी सबक सिखाया गया।  यही रीजन है कि केशव प्रसाद मौर्य लाइन पर आ गए और योगी के साथ मिलकर चलने लगे। लेकिन उससे पहले तो केशव लगातार संगठन को सरकार से बड़ा बताकर बार बार आंख दिखा रहे थे। 

जिस वक्त केशव प्रसाद मौर्य ये बयान दे रहे थे उनके हाव में भी अकड़ थी। भाव में भी ऐंठन थी, वो ये दिखाने की कोशिश में थे कि दिल्ली तक उनकी पहुंच है और अब योगी के साथ खेल कर पावर में आ जाएंगे। लेकिन दिल्ली में बैठे लोग भी जानते हैं योगी को हाथ लगाने का नुकसान क्या होगा, यही वजह है कि केशव को ही ठिकाने लगा दिया और केशव प्रसाद मौर्य के सुर बता रहे हैं। काम तरीके से होगा वैसे भी लोकसभा चुनाव में इस अंदरुनी कलह का बीजेपी को काफी नुकसान उठा पड़ा सीटें कम हो गई।  तो ऐसे में अब राज्य में उपचुनाव है योगी आदित्यनाथ 10 सीटों को किसी भी तरह जीतना चाहते हैं। इसलिए वो बाग नेताओं को सबक सिखाने के पूरे मूड में है। सभी 10 सीटों की जिम्मेदारी अलग अलग नेताओं को बांट दी गई है, जो दिखा रही है कि उपचुनाव के नतीजे अब आगे नेताओं का भविष्य तय करेंगे। 
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