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आंबेडकर पर सियासत कर रही कांग्रेस पर सीएम धामी का निशाना, कहा- बाबा साहेब के नाम पर पाखंड कर रही कांग्रेस

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंबेडकर पर सियासत कर शाह को घेर रही कांग्रेस पर जमकर हमला बोला,. और कहा जब बाबा साहेब को संविधान सभा का सदस्य बनाया गया था, तब कई कांग्रेस नेताओं ने उनका विरोध किया था। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अंबेडकर का अपमान करने का काम किया है। कांग्रेस ने कभी उनका सम्मान नहीं किया।

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आंबेडकर का जब जब नाम आया। कांग्रेस ने सबसे ज़्यादा शोर मचाया। क्योंकि साहब यहां बात वोट बैंक की है। इसी का नतीजा है कि जब संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने आंबेडकर का नाम दोहराया।  कांग्रेस ने ग़लत तरीक़े से क्लिप वायरल कर जमकर शाह के ख़िलाफ़ बवाल मचाया। ख़ुद को ना सिर्फ़ आंबेडकर बल्कि दलितों को मसीहा भी दिखाया। लेकिन कांग्रेस आंबेडकर की विरासत पर सियासत कर अब इस कदर फ़ंसी है। ना हड्डी निकली जा रही है ना उगली। क्योंकि बीजेपी ने भी मौक़े पर चौंका मार इतिहास के पन्नों को खोल दिया है। वो पन्ने जो राहुल गाँधी के लिए ही फ़ज़ीहत बन गए हैं। इस बार राहुल गांधी को इतिहास का पाठ पढ़ाया है बीजेपी के धाकड़ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने। जिन्होंने आंबेडकर पर अमित शाह के बयान के ख़िलाफ़ छेड़छाड़ करने वाली कांग्रेस पर तंज कसा। 


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यहीं नहीं रुके। आगे सीएम धामी ने कांग्रेस को ऐसा इतिहास पढ़ाया। किताबों का वो राज उखाड़कर आईना दिखाया। राहुल गांधी से लेकर प्रियंका गांधी तक की बोलती बंद हो गई। सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस ने ही आंबेडकर का समय समय पर अपमान किया। 

सीएम धामी ने आंबेडकर की विरासत पर सियासत कर रही कांग्रेस को उसी के तीर से घायल करने का काम किया है। सीएम धामी के तगड़े प्रहार से कांग्रेस के हाथ पाँव फूल गए हैं। क्योंकि धामी ने इतिहास के पन्नों को खोदकर गहरी चोट देने का काम किया है।  तो चलिए अब इतिहास के पन्ने भी पलटते है। क्योंकि जो लोग अभी आंबेडकर के अपमान की बात कर रहे हैं। उस कांग्रेस ने तो आंबेडकर को अपनी कैबिनेट के लायक़ भी नहीं समझा था। ये तो सिर्फ़ शुरूआत है।क्योंकि ये लोग तो ऐसे है जो अक्सर यही कहते थे की संविधान आंबेडकर ने नहीं नेहरू ने दिया था। सैम पित्रौदा के हालही के ट्वीट ने कांग्रेस की असलियत उजागर कर दी। कांग्रेस का इतिहास ही आंबेडकर को अपमानित करने का रहा है। कांग्रेस ने आंबेडकर को जीते जी इतना अपमानित किया। कि उन्हें चुनाव में हराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। 1952 में देश के पहले लोकसभा चुनाव हुए थे इस दौरान कांग्रेस ने आंबेडकर को हराने के लिए पूरी जीजान लगा दी। खुद नेहरु उनके ख़िलाफ़ प्रचार के लिए मैदान में उतरे।और आंबेडकर चुनाव हार गए। इसके बाद 1954 में महाराष्ट्र की भंडारा सीट पर उपचुनाव हुए फिर से कांग्रेस ने ताक़त दिखाकर उन्हें हरा दिया। आप सोचिए जिस व्यक्ति ने देश को संविधान दिया। वो महान आदमी इस देश में कांग्रेस की वजह से चुनाव नहीं जीत पा रहे थे। कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती। आगे और बताएँगे। तो आप भी हैरान हो जाएगा। नेहरू किस कदर आंबेडकर के ख़िलाफ़ थे। कि उन्होंने दबाव की वजह से आंबेडकर को नेहरू की कैबिनेट से इस्तीफ़ा देना पड़ा था। आंबेडकर को परेशान करने में उनका अपमान करने में।  कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। और आज कांग्रेस आंबेडकर के मान के लिए लड़कर दिखावा कर रही है। ये सिर्फ़ वोटबैंक की राजनीति कर रही है। ये बात खुलकर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सबके सामने रख दी है।
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