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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने सरकारी आवास से तुड़वा दिया मंदिर, मचा गया बवाल
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश विवादों में आ गए हैं. क्योंकि चीफ़ जस्टिस सुरेश कुमार कैत पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने सरकारी आवास में बना हनुमान मंदिर को हटवा दिया है.. जिससे बार एसोसिएशन के लोग भड़क गए हैं.. चीफ़ जस्टिस सुरेश कुमार के ख़िलाफ़ CJI से शिकायत की है कार्रवाई की माँग की है
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देशभर में हिंदू समाज मस्जिदों के अंदर मिल रहे मंदिरों की रक्षा के लिए कोर्ट जा रहा है। सनातन के लिए आवाज़ उठा रहा है। संभल से लेकर बदायूं तक में मंदिर की खोज में खुदाई चल रही है। हिंदू समाज उत्साहित है। लेकिन हमारे देश में एक हिंदू शख़्स ऐसा भी है। जो एक अहम पद पर आसीन है। लेकिन मंदिरों के ख़िलाफ़ ही एक्शन ले रहा है। ये शख़्स कोई नहीं बल्कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस सुरेश कुमार कैत हैं। जिनके घर पर वर्षों तक मुस्लिम जजों ने मंदिर की रक्षा की। लेकिन जब ये घर हिंदू जज सुरेश कुमार कैत को मिला ।वो हुआ जिसकी शायद ही कोई हिंदू उम्मीद कर सकता है। क्योंकि जज साहब ने अपने सरकारी आवास में मौजूद हनुमान मंदिर पर ही बुलडोज़र चलवा दिया। जज साहब ने ना कुछ सोचा ना कुछ समझा। और बिना देरी करते हुए मंदिर तोड़वा दिया। इस मामले के सामने आने के बाद देश में तहलका मच गया।
हिंदू समाज तो जज सुरेश कुमार के विरोध में उतरा ही। लेकिन मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन भी भड़क उठा। मंदिर तोड़ने की घटना को सनातन धर्म के अनुयायियों का अपमान बताया..बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को तुरंत पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने और जिम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग की है। CJI को लिखे पत्र में कहा गया है कि "मुख्य न्यायधीश के बंगले में स्थित मंदिर ऐतिहासिक है। और उच्च न्यायलय के कई पूर्व मुख्य न्यायाधीश वहां पूजा अर्चना करते थे, जिनमें न्यायमूर्ति एस.ए. बोबड़े, ए.एम खानविलकर और हेमंत गुप्ता शामिल हैं, जो बाद में सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत हुए, मुख्य न्यायधीश के आवास पर काम करने वाले कर्मचारी मंदिर में पूजा अर्चना करते थे। वो बंगला और मंदिर सरकारी संपत्ति है उस पर पुननिर्माण भी समय समय पर सरकारी पैसे से किया जाता रहा है। क्योंकि बंगले में सनातन धर्म को मानने वाले अधीकांश मुख्य न्यायाधीश और कर्मचारी रहते हैं। मुस्लिम जजों ने कभी आपत्ति नहीं जताई इसलिए सरकार की अनुमति के बिना या किसी वैधानिक आदेश को पारित किए बिना इसे ध्वस्त नहीं किया जा सकता था। ऐसा कृत्य सनातन धर्म के अनुयायियों का अपमान है"
ये चिट्ठी उस एक शिकायत के बाद लिखी गई है जहां एक वक़ील ने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सीजेआई और केंद्रीय क़ानून मंत्री से जस्टिस कैत के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की थी। इसके साथ ही उनके ख़िलाफ़ जनहित याचिका भी दायर की गई है। चारों तरफ़ से जज साहब अपनी हरकतों की वजह से बुरे फंसते दिखाई दे रहे हैं। खैर अब देखना ये होगा कि चीफ़ जस्टिस सुरेश कुमार के ख़िलाफ़ CJI क्या एक्शन लेते हैं। या फिर कोर्ट में दायर पीआईएल जज साहब को क्या सबक़ सिखाया जाता है। क्योंकि ये मामला काफ़ी हाई प्रोफाइल होता जा रहा है। जिस तरीक़े से देशभर में मंदिरों की खोज की जा रही है। हिंदू समाज उत्साहित नज़र आ रहे है उसी बीच चीफ़ जस्टिस की मंदिर तुड़वाने वाली हरकत ने सबको हैरान कर दिया है।
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