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वक्फ बोर्ड को बड़ा झटका, संसदीय समिति ने माँगा क़ब्ज़े वाली वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों का ब्योरा

वक्फ संशोधन बिल पर विचार कर रही संसदीय समिति ने राज्य सरकारों से अनाधिकृत कब्जे वाली वक्फ संपत्तियों का ब्योरा मांगा है। सच्चर कमेटी ने इन संपत्तियों पर अवैध कब्जा बताया था। समिति ने वक्फ अधिनियम की धारा 40 के तहत राज्यों से वक्फ बोर्ड द्वारा दावा की गई संपत्तियों की जानकारी भी मांगी है। जिससे कट्टरपंथी मुसलमानों में हड़कंप मच गया है

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एक तरफ़ वक़्फ़ संशोधन बिल आने से वक़्फ़ बोर्ड इतना बौखलाया हुआ है कि किसी के भी घर मक़ान दुकान खेल खलियान सबपर दावा ठोक रहा है। तो दूसरी तरफ सरकार हंटर चलाकर वक़्फ़ बोर्ड के कारनामों की हवा निकाल रही है। इसी बीच वक़्फ़ बोर्ड पर एक और ऐसा हंटर चला है सुनकर कट्टरपंथी मुसलमान और उनके मसीहा बनने वाले नेता राजनेता काँप उठे है। क्योंकि ख़बर ये आ रही है कि वक़्फ़ बोर्ड की क़ब्ज़ाई हुई सारी संपत्तियों को अब ज़ब्त करने की तैयारी चल रही है दरअसल।


वक़्फ़ संशोधन बिल पर विचार कर रही संसदीय समिति ने राज्य सरकारों से अनाधिकृत कब्जे वाली वक़्फ संपत्तियों का ब्योरा मांगा है। खच्चर कमेटी ने वक़्फ़ बोर्ड का इन संपत्तियों पर अवैध क़ब्ज़ा बताया था। समिति ने वक्फ अधिनियम की धारा 40 के तहत राज्यों से वक्फ बोर्ड द्वारा दावा की गई संपत्तियों की जानकारी भी मांगी है।

दरअसल अधिनियम की धारा 40 के तहत वक़्फ़ बोर्डों को अधिकार दिया गया था कि  वो तय कर सकते हैं कि संपत्ति वक़्फ़ की है या नहीं। यही वजह है कि वक़्फ़ बोर्ड जब मन आता है किसी भी संपत्ति पर अपना दावा ठोक जाता है। फिर चाहे वो सरकारी संपत्ति हो। सड़क मंदिर घर कुछ भी हो। और सबसे हैरानी की बात तो ये है कि वक़्फ़ पर उसकी तानाशाही पर कोई एक्शन भी नहीं ले सकता। यही वजह है कि वक़्फ़ की तानाशाही पर नकेल कसने के लिए। कांग्रेस के पाप का हिसाब करने के लिए मोदी सरकार संशोधन बिल लेकर आई। तो मौलानाओं को तकलीफ़ होने लगी। सबसे बड़ी बात तो ये है कि प्रस्तावित क़ानून मौजूदा क़ानून में कई अन्य बदलाव कर इस अधिकार को सीमित करने का प्रयास करता है। और इसी के तहत समिति ने वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों का हिसाब किताब माँग लिया है। इसके साथ ही 

समिति ने राज्य सरकारों से उन मामलों की भी जानकारी मांगी है जहां सरकारी विभागों का संपत्ति के स्वामित्व या क़ब्ज़े को लेकर वक़्फ़ बोर्ड के साथ क़ानूनी विवाद चल रहा है। बीजेपी सांसद जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता वाली इस समिति को पता चला है कि 2005-06 में सच्चर समिति को दी गई रिपोर्ट में दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओड़िशा में अनधिकृत क़ब्ज़े वाली वक़्फ़ संपत्तियों की जानकारी दी गई थी।समिति ने इन राज्यों में मौजूदा स्थिति का ब्योरा मांगा था।

बता दें कि 20 साल पहले 2005 में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए तत्कालीन संप्रग सरकार ने सच्चर समिति का गठन किया था। और हालही में लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन विधेयक पर विचार कर रही इस समिति का कार्यकाल बढ़ाने की मंज़ूरी दी गई थी। अब विधेयक पर चर्चा के लिए बनी समिति वक़्फ़ बोर्ड के एक एक कारनामे का हिसाब-किताब करेगी। यही वजह है जब जब समिति के आगे एक्शन के लिए कदम उठाया सबसे ज़्यादा तकलीफ विपक्ष के नेताओं को। औवैसी साहब को हुई है। यही वजह है कि वक़्फ़ बोर्ड समिति की बैठक में इन लोगों ने जमकर बवाल काटा है। बैठक में चर्चा कम युद्ध की स्थिति ज़्यादा देखने को मिली है। टीएमसी सांसद ने तो बैठक में फोड़फोड़ भी मचा दी थी। जिससे उन्हें सस्पेंड किया गया। और ओवैसी जमकर जमकर इस बिल को लेकर मोदी सरकार पर बरसते नज़र आए।

वक़्फ़ बोर्ड बिल लाकर मोदी सरकार इसकी तानाशाही पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। ताकी कभी भी किसी भी संपत्ति पर क़ब्ज़े से रोका जा सके।और क़ानून तरीक़े से चीजें की जा सके। लेकिन क़ानून का पाठ पढ़ाने वाले ओवैसी साहब नियम क़ानून से चलने के लिए तैयार नहीं है। जब भी वक़्फ़ बोर्ड पर कोई एक्शन के लिए कदम उठाया जा रहा है। सबसे ज़्यादा तकलीफ़ ओवैसी साहब को ही हो रही है। यही वजह है कि जब आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड को भंग करने का आदेश सुनाया। ओवैसी सबसे ज़्यादा परेशान हो गए। बीजेपी पर आरोप लगाने बैठ गए। चंद्रबाबू नायडू सरकार ने कहा सरकार ने कहा है कि सुशासन को बढ़ावा देने, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और वक्फ बोर्ड के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। जल्द ही नए वक्फ बोर्ड का गठन किया जाएगा।
जिस तेज़ी से मोदी सरकार के बाद राज्य सरकार वक़्फ़ बोर्ड को लेकर कामकाज में जुट गईं है। उससे साफ़ हो रहा है कि वक़्फ़ बोर्ड ने जितनी अवैध संपत्ति क़ब्ज़ाई है।जितना उसके पास ख़ज़ाना है सबकी जाँच पड़ताल की जाएगी।




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