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बरेली कोर्ट ने राहुल गांधी-ओवैसी की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने जारी कर दिया दूसरा नोटिस

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ओर से बरेली के जिला जज न्यायालय से जारी समन का कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में दोनों के खिलाफ अब दूसरा समन जारी कर कोर्ट ने राहुल गांधी को 18 जनवरी और असदुद्दीन ओवैसी को 19 जनवरी को याचिका पर सुनवाई के दौरान पेश होने के आदेश दिए हैं।

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संसद में बीजेपी सांसदों के साथ धक्कामुक्की करने वाले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मुश्किलें कम हुई नहीं थी। कि एक और बड़ी आफ़त राहुल पर आ पड़ी है।राहुल गांधी के साथ साथ अब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी बुरे फंस गए हैं। क्योंकि दोनों नेताओं के ही ख़िलाफ़ बरेली कोर्ट का ऐसा हंटर चला है। कि आगे दोनों की गिरफ़्तारी भी हो सकती है। राहुल गांधी और ओवैसी की बड़बोली ज़ुबान ने दोनों को बुरी तरह क़ानूनी जाल में फँसा दिया है। दरअसल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी को बरेली कोर्ट ने पेशी के लिए समन जारी किया था। नोटों मिलने के बाद भी दोनों ही नेता कोर्ट में पेश नहीं हुए, ना ही नोटिस का जवाब दिया। अब कोर्ट ने दोनों नेताओं के खिलाफ दायर रिवीज़न याचिकाओं को अपर सत्र न्यायधीश कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया है। राहुल गांधी और ओवैसी के ख़िलाफ़ कोर्ट ने फिर से दूसरा नोटिस जारी किया है। दूसरा समन जारी कर कोर्ट ने राहुल गांधी को 18 जनवरी और असदुद्दीन ओवैसी को 19 जनवरी को पेश होने के लिए कहा है।


अगर दूसरे नोटिस पर राहुल गांधी और ओवैसी कोर्ट में पेश नहीं हुए तो अगला एक्शन कांग्रेस और AIMIM में हड़कंप मचा सकता है। तो चलिए अब ये भी बताते हैं कि राहुल गांधी पर बरेली कोर्ट ने क्यों सख़्ती दिखाई है। दरअसल राहुल गांधी ने कहा था "अगर इंडिया गठबंधन की सरकार आई तो हम आर्थिक सर्वेक्षण कराएँगे। इस सर्वे के आधार पर संपत्ति का बँटवारा होगा। जिसकी भागीदारी अधिक होगी अगर उसकी संपत्ति कम है तो जिसकी ज्यादा संपत्ति है उससे लेकर कम संपत्ति वालों को दी जाएगी"

राहुल गांधी एक ख़ास समुदाय को अपनी ओर आरक्षित करने के लिए ये सब बोल गए। लेकिन उन्हें मालूम नहीं था।कि वो जो बात बोल रहे हैं। वो उनकी नाक के लिए नकेल बन जाएगी। क्योंकि पहली बात तो ये है कि अमीरों का पैसा लेकर ग़रीबों को देना संभव नहीं है। दूसरा ये कि अमीरों ने भी मेहनत कर कमाई की है। यही वजह है कि बिना सोचे समझे राहुल गांधी आर्थिक सर्वे पर बोल गए। ये बोल ही उन्हें अब कोर्ट से ले गए हैं। जिसके तुरंत बाद हिंदूवादी संगठनों की ओर से इसका तीखा विरोध किया गया।

इसी मामले में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के मंडल अध्यक्ष पंकज पाठक की ओर से बरेली के कोर्ट में अर्जी दी गई थी।एमपी-एमएलए कोर्ट ने उस वक्त अर्जी को खारिज कर दिया था। इस आदेश के संबंध में पंकज पाठक ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील कर दी। 

राहुल गांधी के इसी बयान के ख़िलाफ़ कोर्ट ने राहुल गांधी को पहला समन जारी करते हुए सात जनवरी को पेश होने के लिए कहा था। लेकिन कोर्ट के नोटिस को दरकिनार करते हुए राहुल गांधी पेश नहीं हुए। ऐसा ही कुछ ओवैसी साहब के साथ भी हुआ। दरअसल ओवैसी न संसद में शपथ लेते के बाद जय फिलीस्तीन का नारा लगाया था।जिसके बाद ओवैसी के ख़िलाफ़ अधिवक्ता वीरेंद्र गुप्ता की ओर से याचिका लगाकर कार्रवाई की माँग की गई।ओवैसी को भी 7 जनवरी को पेश होने के लिए कहा गया।लेकिन ओवैसी ने भी नोटिस को ठुकरा दिया जिसके बाद कोर्ट ने दोबारा नोटिस जारी कर सख़्ती दिखा दी है। अब दोनों की नेताओं को कोर्ट में पेश होना होगा। अगर इस बार नोटिस को दरकिनार किया तो दोनों को जेल भी जाना पड़ सकता है।

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