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'सफेद कब्रिस्तान नहीं, अयोध्या जा रहे युवा...', कुमार विश्वास ने बिना नाम लिए ताजमहल पर किया कटाक्ष

कुमार विश्वास ने ताजमहल का नाम लिए बिना उसे कब्रिस्तान बताते हुए कहा कि देश के युवाओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं. उनके मुताबिक अब युवा आगरा की बजाय अयोध्या और वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों की ओर ज्यादा जा रहे हैं, जो सांस्कृतिक परिवर्तन का संकेत है.

Kumar Vishwas (File Photo)
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मशहूर कवि और वक्ता कुमार विश्वास एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने ताजमहल, अयोध्या, महात्मा गांधी और दिल्ली प्रदूषण जैसे कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. उनके बयान न सिर्फ तालियों से गूंजे, बल्कि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गए.

बिना नाम लिए किया ताजमहल का जिक्र 

कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने आगरा स्थित ताजमहल का नाम लिए बिना उसे कब्रिस्तान बताते हुए कहा कि अब देश के युवाओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं. उन्होंने कहा कि नए साल पर पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि युवा आगरा में मौजूद कब्रिस्तान को देखने के बजाय अयोध्या और वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. उनके मुताबिक यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है, बल्कि यह लंबे समय से चल रही सांस्कृतिक चेतना का परिणाम है. उन्होंने कहा कि परिवर्तन हो रहा है, बदलने में समय लगता है और तर्क का उत्तर दिया जा सकता है, कुतर्क का नहीं.

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धर्मनिरपेक्षता पर भी रखी बात 

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कुमार विश्वास ने धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह सवाल उठाते हैं कि सेक्युलर देश में रामनवमी क्यों मनाई जाती है और राम का नाम क्यों लिया जाता है. उनका तर्क था कि यही देश की धर्मनिरपेक्षता है, जहां हर आस्था को स्थान मिलता है. इसी मंच से उन्होंने यह भी कहा कि अटल जयंती जैसे आयोजनों में देश की सांस्कृतिक और वैचारिक धारा साफ दिखाई देती है.

कोर्ट को लेकर कुमार विश्वास ने बताया रोचक बात 

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राम मंदिर मुद्दे पर बोलते हुए कुमार विश्वास ने देश की न्यायिक प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश अद्भुत है. उन्होंने कहा कि राम हुए या नहीं हुए, इस पर सुप्रीम कोर्ट में करीब 30 साल तक केस चला और आखिरकार न्याय के मंदिर में यह तय हुआ कि राम का जन्म वहीं हुआ, जहां उनका मंदिर था. उन्होंने इसे भारत की अनोखी लोकतांत्रिक और न्यायिक परंपरा बताया. उन्होंने हल्के व्यंग्य के साथ यह भी कहा कि जब मामले की अंतिम सुनवाई चल रही थी, उसी दौरान रामनवमी की छुट्टी पड़ गई और सुप्रीम कोर्ट बंद रहा. कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि दिल्ली में नगर निगम, राज्य सरकार और केंद्र सरकार तीनों जगह भाजपा की सरकार है, इसके बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के मुताबिक दिल्ली की हवा में कुछ देर बैठना सौ सिगरेट पीने के बराबर है. इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ठहाके भी लगाए, लेकिन संदेश गंभीर था.

कांग्रेस पर किया कटाक्ष 

महात्मा गांधी और सरदार पटेल को लेकर भी कुमार विश्वास ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने ही परिवार में उलझी रही, जबकि सरदार पटेल जैसे नेता बाहर बैठे थे और उन्हें दूसरे लोग ले गए. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि गांधी जी आयुर्वेद, खादी, स्वदेशी और गीता की बात करते थे, लेकिन आज उनकी बातें भी किसी को खास तौर पर याद नहीं हैं.

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बताते चलें कि इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. कुल मिलाकर कुमार विश्वास के बयान एक बार फिर यह दिखाते हैं कि उनके शब्दों में कविता के साथ-साथ राजनीति और सामाजिक टिप्पणी का तीखा असर भी साफ नजर आता है.

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