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सोनम वांगचुक के मुहीम के पीछे की असली कहानी जानकर हो जाओगे हैरान, सामने आया सच ?

सोनम वांगचुक को आप थ्री इडियट्स के असली फुंसुक वांगडु के रुप में जानते हैं। ये वही बड़े पर्यावरण कार्यकर्ता हैं जिन्होंने एक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा कर लद्दाख से दिल्ली तक जलवायु को बचाने की मुहीम चलाई। लेकिन इनकी मुहीम के पीछे की असली कहानी कुछ और है। जो सबको चौंका देगी। ये असली कहानी हम आपको अपनी पूरी रिपोर्ट में दिखाएंगे और बताएंगे।

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सोनम वांगचुक एक ऐसा नाम जो बीते दिनों से देश की सियासत में सबसे ज़्यादा गूंज रहा है। जिन्हें आप जलवायु कार्यकर्ता के रुप में जानते हैं। जिन्हें आप थ्री इडियट्स के असली फुनसुख वांगडू के रुप में जानते हैं। ये वही बड़े पर्यावरण कार्यकर्ता हैं जिन्होंने एक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा कर लद्दाख से दिल्ली तक जलवायु को बचाने की मुहीम चलाई। इनके महान काम की मीडिया ने कहानी आपको खूब सुनाई। बीते दिनों तो वांगचुक के लिए कुछ राजनेता सड़कों पर उतर आए। खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता। इन्होंने जमकर उनके गुणगान गाए। ताकी मोदी सरकार को वांगचुक के जरिए घेरा जा सके। लेकिन जरा ठहरिए। ये वांगचुक की पूरी सच्चाई नहीं है।अब हम आपको इनकी पूरी सच्चाई बताएंगे हैं। आपकी आंखों पर डला पर्दा उठाएंगे। इस बात को गौर से सुनिएगा और समझिएगा। क्योंकि आज जो हम आपको बताएंगे। शायद उसे जानकार आप भी हैरान हो जाएंगे।


लद्दाख जिसका नाम सुनते ही इसकी खूबसूरत वादियों की छवियां हमारे जहन में छा जाती हैं। ये 45 हजार वर्ग किलो मीटर में फैसा भारत का सबसे बड़ा और सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है। और सबसे बड़ी बात तो ये है कि ये भारत का बेहद ही महत्वपूर्ण इलाका है। क्योंकि यहीं से LAC यानी लाइन ऑफ कंट्रोल गुजरती है। जो भारत और चीन को अलग करती है। यानी की बॉर्डर क्षेत्र। चीन ने LAC के दूसरी तरफ भारी इंफ्रास्ट्रक्चर बना लिया। लेकिन भारत की ओर ऐसा नहीं हुआ। खासकर कांग्रेस सरकार के समय। अब सवाल ये है कि जब कांग्रेस सरकार चीन के साथ गुपचुप समझौते कर रही थी। तो लद्दाख आप लद्दाख में विकास की उम्मीद कैसे कर सकते थे। क्योंकि कांग्रेस को अपना फायदा देखना था ना कि लद्दाख का जम्मू कश्मीर का। जो उस वक्त जम्मू कश्मीर में ही शामिल था। लेकिन अब अलग हो गया है। जब कांग्रेस के हाथों से देश की सत्ता चली गई। तो मोदी सरकार के आने पर लद्दाख में बहार आई। 

15 जून 2020 लद्दाख के गलवान में भारत औ चीनी सैनिकों के बीच संघर्ष हुआ।  इसके बाद भारत ने लद्दाख में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर शुरू किए।जून 2021में सरकार ने सिंधू नदी पर 8 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की घोषणा की। 2022 में भारत का पहला जियोथर्मल पावर प्लांट लद्दाख में लॉन्च किया। जुलाई 2023 में NTPC ने लद्दाख में हाइड्रोजन प्रोजेक्ट शुरू किया। फरवरी 2023 में लिथियम की खोज शुरू हुई, जिससे लद्दाख में बड़े लिथियम के भंडार मिलने की उम्मीद हैं।अक्टूबर 2023 में केंद्र सरकार ने 13 गीगावाट का सोलर पावर प्लांट मंजूर किया. जो जम्मू कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली को बिजली देगा।

इससे पहले 2019 में लद्दाख में 9 MW क्षमता की पनबिजली परियोजना शुरू की। खुद गृहमंत्री अमित शाह ने इसका ऐलान किया।

दिसंबर 2023 में 29 हाइवे प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। ताकी सीमावर्ती क्षेत्र को चीन के मुकाबले मजबूत किया जा सके.लाखों करोड़ों के ये प्रोजेक्ट ना केवल लद्दाख के विकास के लिए हैं। बल्कि ये सभी पर्यावरण अनुकूल हैं। ताकी लद्दाख की प्रकृति को भी संरक्षित रखा जा सके। और लोगों तक भी साख सुविधाओं के साथ साथ विकास पहुंच सके। लेकिन जैसे हर बड़े प्रोजेक्ट में हमने देखा है। चाहे वो नर्मदा बांध हो। या तूतीकोरिन प्रोजेक्ट। उसपर सियासत या फिर साजिश ना हो तो वो अधूरा रह जाता है। ऐसे ही कुछ लद्दाख के प्रोजेक्ट को भी गृहण लगाने की कोशिश शुरू हुई। क्योंकि इन प्रोजेक्ट के हाईलेवल पर जाने से रमन मैगसेसे अवॉर्ड विजेता एक्टिविस्ट की एंट्री हो जाती है। लद्दाख में इतनी तरक्की हो रही थी। लेकिन इसमें अड़चन डालना। इसे रोकना कुछ तत्वों के लिए बेहद जरूरी था। और इसी चैप्टर से शुरू होती है सोनम वांगुच की कहानी। जो पर्यावरण को बचाने मैदान में कूदे। लेकिन पर्यावरण और लद्दाख के प्रोजेक्ट को विकास की राह पर ले जा रहे प्रोजेक्ट को ही कूचलने के काम कम पर लग गए।

26 जनवरी 2023 को सोनम वांगचुक ने अपनी पहली भूख हड़ताल शुरू की। इसके बाद मार्च 2024 में फिर मौका देखते ही वांगचुग भूख हड़ताल पर बैठ गए। लेकिन उनके असल एजेंडा पर ध्यान दीजिए।  ये सारे प्रोजेक्ट रुकवाना। उनके एजेंडे का हिस्सा है। यही वजह है कि आजकल वांगचुक अपनी टीम के साथ दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। और सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर को रोकने की मांग कर रहे हैं। और वांगचुक के इस अभियान में कांग्रेसी आम आदमी पार्टी इकोसिस्टम पूरा साथ दे रहा है। अब जरा इनका दोगलापन भी देख लीजिए। जो खुद अपनी बिल्डिंग में सोलर पैनल लगाते हैं। यही वांगचुग अब लद्दाख में ग्रीन पैनल के विरोध में खड़े हैं। असल में सोनम वांगचुक का पूरा एजेंडा एक ही है लद्दाख के सारे इन्फ्रास्ट्रक्चर को रुकवाना। और चीन को इस क्षेत्र में फायदा पहुंचाना। तो ये है सोनम वांगचुग और लद्दाख के प्रोजेक्ट के पीछे रुकवाने की साजिश तार बुनने वालों की असली कहानी।

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