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Yogi के Action से अफसरों में हड़कंप, 11 बजे नहीं अब सुबह 8 बजे ही करना पड़ता है काम

ये योगी हैं । योगी।जिनकी पहचान हार से नहीं माफियाओं के दिलों में हाहाकार पैदा करने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर है। इसीलिये चुनावी नतीजों के बाद एक बार फिर योगी अपनी उसी पुरानी रफ्तार में लौट आए हैं। कहीं गुंडे बदमाशों और माफियाओं के ताबड़तोड़ एनकाउंटर हो रहे हैं । तो कहीं अफसरों की ताबड़तोड़ बैठक ले रहे हैं।इसी बीच खबर आ रही है कि कभी अखिलेश राज में अफसरशाही का भौकाल टाइट करने वाले अफसरों की योगी आदित्यनाथ के राज में नींद हराम हो गई है।

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योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश में इस बार मोदी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।  साल 2014 में 71 और साल 2019 के चुनाव में 62 सीटें जीतने वाले मोदी को इस बार के चुनाव में महज 33 सीटें ही मिल पाईं । जिसके बाद ये कहा जाने लगा कि इस हार के बाद मोदी के साथ साथ योगी की रफ्तार भी कम हो जाएगी। लेकिन ऐसी सोच रखने वाले लोगों को एक बात याद रख लेनी चाहिए। ये योगी हैं । योगी । जिनकी पहचान हार से नहीं माफियाओं के दिलों में हाहाकार पैदा करने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर है ।इसीलिये चुनावी नतीजों के बाद एक बार फिर योगी अपनी उसी पुरानी रफ्तार में लौट आए हैं ।कहीं गुंडे बदमाशों और माफियाओं के ताबड़तोड़ एनकाउंटर हो रहे हैं। तो कहीं अफसरों की ताबड़तोड़ बैठक ले रहे हैं। इसी बीच खबर आ रही है कि कभी अखिलेश राज में अफसरशाही का भौकाल टाइट करने वाले अफसरों की योगी आदित्यनाथ के राज में नींद हराम हो गई है।


दरअसल चुनावी नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में जबरदस्त सियासी हलचल मची हुई है। जिस यूपी में कभी मोदी और योगी का भौकाल हुआ करता था। उस यूपी में बीजेपी 33 सीटों पर ही सिमट गई । जिसके बाद से दिल्ली और यूपी में जहां बैठकों का दौर शुरू हो गया है ।तो वहीं इसी बीच कभी योगी आदित्यनाथ की बायोग्राफी लिखने वाले दिग्गज लेखक शांतनु गुप्ता का एक ऐसा बयान सामने आया है। जिसने बता दिया कि योगी राज में अफसरों से कैसे काम लिया जाता है।

दरअसल इंडिया टीवी पर एक कार्यक्रम में लेखक शांतनु गुप्ता ने बताया।

"योगी आदित्यनाथ की कर्मठता ही उनके नेतृत्व की धार है, योगी आदित्यनाथ सुबह 4 बजे उठ जाते हैं और उनके अफसर बताते हैं सात साढ़े सात बजे कॉल आनी शुरू हो जाती है, कई अफसरों ने तो रिकॉर्ड में बताया कि अखिलेश के समय पहली कॉल 11 बजे 12 बजे के बाद आती थी अब तो हमें भी अपनी दिनचर्या बदलनी पड़ती है कि साढ़े सात बजे तक हमें भी फाइलों के साथ तैयार रहना पड़ता है क्योंकि आठ बजे सीएम योगी का जनता दरबार लगता है, 9 बजे उनकी मीडिया वाली टीम शुरू होती 10 बजे तक उनकी बैठकें शुरू हो जाती हैं, उनके लिए एक-एक दिन में 8-9 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करना तो उनके लिए बड़ी कॉमन बात है "

सीएम योगी की जिंदगी पर किताब लिख चुके लेखक शांतनु गुप्ता से बेहतर भला योगी के कामकाज के बारे में कौन जा सकता है।उन्होंने खुद देखा है कैसे सीएम योगी काम करते हैं।यही वजह है कि उन्होंने बताया ।

"सीएम योगी को डीएम-एसपी ही नहीं सीएमओ के नाम भी पता होते हैं, यहां तक कि हर जिले के जो 5-7 अधिकारी होते हैं उनके नाम और प्रोग्रेस के बारे में भी योगी को पता होता है ये उनके काम करने का तरीका है, जब मैं किताब लिख रहा था तो एक मीटिंग में मुझे बैठने का मौका मिला जहां मैंने देखा एक अधिकारी ने कहा एयरपोर्ट कम हैं उत्तर प्रदेश में, जब इसका पूरा प्रजेंटेशन हो गया तो उसके बाद सीएम योगी पूरे दस मिनट एयरपोर्ट के मुद्दे पर बोले जिन्हें देख कर अधिकारी दंग रह गये "

जो लोग ये समझते थे कि योगी तो साधु संत महंत हैं। वो क्या सरकार चला पाएंगे। उन्हें सीएम योगी पर किताब लिखने वाले शांतनु गुप्ता की ये बातें गौर से सुन लेनी चाहिए। और समझ लेनी चाहिए कि।  एक योगी जब सत्ता संभालता है तो शासन में कितनी सख्ती और अनुशासन नजर आता है। अखिलेश राज में जिन अफसरों पर कभी अफसरशाही झाड़ने के आरोप लगते थे। वही अफसर योगी राज में सुबह आठ बजे ही फाइल लेकर तैनात मिलते हैं। क्योंकि उनके मुखिया योगी आदित्यनाथ खुद सुबह चार बजे ही उठ जाते हैं। और आठ बजे से काम करना शुरू कर देते हैं। ऐसे में जब सूबे का मुख्यमंत्री आठ बजे काम शुरू कर देता है तो अफसर कैसे लापरवाही बरत सकते हैं। उन्हें भी सुबह सुबह तैयार रहना पड़ता है। 
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