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Yogi या Keshav Maurya: चुनावी मैदान में कौन सबसे 'ताकतवर'

चुनावी नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में विवाद है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ये विवाद तो अब इस स्तर पर पहुंच गया है कि लोग यहां तक कहने लगे हैं कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने योगी सरकार के खिलाफ बगावत कर दी है।और जल्द ही योगी को सत्ता से भी हटाया जा सकता है। इन तमाम अटकलों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि राजनीति के मैदान में सबसे ज्यादा तकतवर कौन है।

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Narendra Modi  : लोकसभा चुनाव भी हो गये। लगातार तीसरी बार बीजेपी सरकार भी बन गई।और Narendra Modi प्रधानमंत्री भी बन गये। लेकिन इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में 33 सीटें आने के बाद जो विवाद शुरू हुआ है। वो विवाद है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ये विवाद तो अब इस स्तर पर पहुंच गया है कि लोग यहां तक कहने लगे हैं कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने योगी सरकार के खिलाफ बगावत कर दी है।  और जल्द ही योगी को सत्ता से भी हटाया जा सकता है। इन तमाम अटकलों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि राजनीति के मैदान में सबसे ज्यादा ताकतवर कौन है। योगी या केशव मौर्य। 



साल 2014 और साल 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस उत्तर प्रदेश ने बीजेपी को कभी सत्तर से ज्यादा। तो कभी साठ से ज्यादा सीटें दी। उसी उत्तर प्रदेश ने इस बार बीजेपी को तैंतीस सीटों पर समेट दिया।  और अब इस हार के बाद योगी और केशव मौर्य के बीच कथित विवाद की खबरें आने लगीं।  तो वहीं बात जब राजनीति के मैदान में सबसे ज्यादा ताकतवर नेता की बात आती है।  तो आपको बता दें ।इसी साल जब लोकसभा चुनाव हुआ तो।


योगी का जलवा
योगी आदित्यनाथ की कर्म भूमि गोरखपुर में बीजेपी ने जीत हासिल की और यहां तक कि गोरखपुर के आसपास की महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर और बांसगांव लोकसभा सीट पर भी बीजेपी ने जीत का भगवा गाड़ दिया।

तो वहीं ।

नहीं चला केशव का जादू
जिस कौशांबी जिले में केशव प्रसाद मौर्य ने जन्म लिया उस कौशांबी लोकसभा सीट पर बीजेपी इस बार बुरी तरह से चुनाव हार गई, इतना ही नहीं कौशांबी के आसपास की प्रयागराज और प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर भी बीजेपी को बुरी हार का सामना करना पड़ा।

बीजेपी केशव प्रसाद मौर्य को ओबीसी समाज के बड़े चेहरे के रूप में पेश करती रही है लेकिन इसके बावजूद केशव मौर्य बीजेपी को इन सीटों पर बीजेपी को जीत नहीं दिला पाए। बात यहीं खत्म नहीं होती।  दो साल पहले यूपी में जब विधानसभा चुनाव हो रहा था। उस वक्त केशव प्रसाद मौर्य अपने घर यानि सिराथू सीट से विधायकी का चुनाव लड़ रहे थे। और जब चुनावी नतीजे आए तो केशव मौर्य अपने ही घर में चुनाव हार गये।  जबकि दूसरी तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी कर्मभूमि गोरखपुर में विधायकी का चुनाव लड़े।  और एक लाख से भी ज्यादा वोटों से जीत हासिल की।  इसी बात से समझ सकते हैं कि चुनावी मैदान में योगी और केशव मौर्य में कौन सबसे आगे है। वैसे एक बात और आपको बता दें कि केशव मौर्य यूपी में अबतक चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन सिर्फ एक बार साल 2012 में जीत हासिल की थी। जबकि एक बार फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद बने।


 तो वहीं दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ आजतक एक भी चुनाव नहीं हारे हैं।  1998 से 2014 तक लगातार पांच बार गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे तो वहीं पहली बार गोरखपुर सदर सीट से विधायकी का चुनाव लड़े और यहां भी जीत का परचम लहरा दिया। इतना ही नहीं।  साल 2017 में भले ही योगी आदित्यनाथ को अचानक मुख्यमंत्री बना दिया गया हो। लेकिन अगले पांच सालों में अपनी सरकार काम के दम पर योगी ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता भी दिलाई और सबसे बड़ी परीक्षा में खुद को साबित करके दिखाया।  यही वजह है कि केशव और योगी के झगड़े के बीच आज भी लोग योगी को ही पसंद करते हैं।  यकीन नहीं तो यूपी के लोगों को सुन लीजिये।

चुनावी मैदान में तो योगी आदित्यनाथ सबसे आगे नजर आते ही हैं।  जनता के दिलों में भी उन्होंने अपने काम के दम पर किस तरह से गहरी जगह बना ली है। जनता की ये आवाज उसी का सबूत है।  जो बता रहा है कि योगी को कुर्सी से हटाना मोदी और शाह के लिए इतना भी आसान नहीं है। तो फिर भला केशव प्रसाद मौर्य कैसे योगी को रिप्लेस कर सकते हैं। वैसे आपको क्या लगता है। क्या योगी को कुर्सी से हटा कर केशव प्रसाद मौर्य को यूपी का मुख्यमंत्री बना देना चाहिए।  
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