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योगी सरकार की बड़ी पहल, आयुष्मान भारत योजना में क्लेम पेंडेंसी घटी, एक साल में 4,649 करोड़ का भुगतान

योगी सरकार की नीतियों से क्लेम पेंडेंसी में कमी, समयबद्ध भुगतान और मजबूत ऑडिट व्यवस्था ने अस्पतालों का विश्वास बढ़ाया है. इसका सीधा लाभ गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें अब इलाज के लिए कर्ज और संपत्ति बेचने की मजबूरी से पूरी तरह से मुक्ति मिल गई है.

Image Credits_IANS
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योगी सरकार गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज कराने वाले परिवारों के लिए जहां कैशलेस उपचार सुनिश्चित किया गया है, वहीं योजना से जुड़े अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित कर व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. 

इसी का नतीजा है कि पिछले एक वर्ष में आयुष्मान योजना के क्लेम निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

एक साल में बड़ी गिरावट आई क्लेम पेंडेंसी में

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स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत क्लेम के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं. जनवरी 2025 में जहां क्लेम की पेंडेंसी 10 लाख 75 हजार तक पहुंच गई थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर मात्र 3 लाख रह गई है. इसे भी जल्द ही निस्तारित कर दिया जाएगा.

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हर महीने आते हैं 2 लाख से अधिक क्लेम

उन्होंने बताया कि प्रदेश में योजना के तहत प्रति माह औसतन 2 लाख से अधिक क्लेम अस्पतालों से प्राप्त होते हैं. इतनी बड़ी संख्या में आने वाले क्लेम का समयबद्ध निस्तारण एक बड़ी चुनौती है. इसके बावजूद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुराने लंबित मामलों के साथ-साथ नए क्लेम का भी नियमित और सुव्यवस्थित तरीके से निस्तारण हो. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सूचीबद्ध अस्पताल बिना हीलाहवाली के आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज सुनिश्चित करें.

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मेडिकल ऑडिट और क्लेम प्रोसेसिंग व्यवस्था हुई मजबूत

साचीज की एसीईओ पूजा यादव ने बताया कि क्लेम निस्तारण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है. इसी क्रम में मेडिकल ऑडिटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है. इससे क्लेम की जांच प्रक्रिया तेज हुई है. इसके साथ ही क्लेम प्रोसेसिंग डेस्क (सीपीडी) की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है. योजना के तहत अस्पतालों द्वारा प्रस्तुत क्लेम्स का भुगतान 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा यानी टर्न अराउंड टाइम (टीएटी) के भीतर किया जाए. इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एजेंसी स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और लंबित मामलों की सतत निगरानी की जा रही है.

एक साल में 4,649 करोड़ रुपये का भुगतान

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साचीज की सीईओ ने बताया कि जनवरी 25 से दिसंबर 25 की अवधि के दौरान आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश के सूचीबद्ध अस्पतालों को क्लेम्स के सापेक्ष कुल 4,649 करोड़ रुपए की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि योगी सरकार न सिर्फ इलाज की व्यवस्था कर रही है, बल्कि अस्पतालों के आर्थिक हितों की भी पूरी तरह से रक्षा कर रही है, ताकि वे गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें. 

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योगी सरकार की नीतियों से क्लेम पेंडेंसी में कमी, समयबद्ध भुगतान और मजबूत ऑडिट व्यवस्था ने अस्पतालों का विश्वास बढ़ाया है. इसका सीधा लाभ गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें अब इलाज के लिए कर्ज और संपत्ति बेचने की मजबूरी से पूरी तरह से मुक्ति मिल गई है.

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