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योगी सरकार का मेगा एजुकेशन प्लान, डिजिटल क्लास से स्मार्ट कैंपस तक, 150 मॉडल स्कूल का ऐलान

CM Yogi: सरकार ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए 77,622 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि तय की है. यह अब तक की सबसे बड़ी व्यवस्थाओं में से एक मानी जा रही है. इससे साफ है कि सरकार गांव-देहात से लेकर शहर तक बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था को बेहतर बनाना चाहती है, ताकि हर बच्चे को अच्छी और समान शिक्षा मिल सके.

Image Source: Social Media
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CM Yogi Education Model: विधानसभा में पेश किए गए वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. सरकार ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए 77,622 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि तय की है. यह अब तक की सबसे बड़ी व्यवस्थाओं में से एक मानी जा रही है. इससे साफ है कि सरकार गांव-देहात से लेकर शहर तक बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था को बेहतर बनाना चाहती है, ताकि हर बच्चे को अच्छी और समान शिक्षा मिल सके.

स्कूलों का ढांचा और पढ़ाई की गुणवत्ता होगी बेहतर

इस बजट का मुख्य उद्देश्य सरकारी और परिषदीय स्कूलों की इमारत, कक्षाओं, शौचालय, पेयजल, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाना है. साथ ही बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी जोर दिया जाएगा. शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इतने बड़े बजट से स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध होंगे और पढ़ाई का स्तर पहले से बेहतर होगा. सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों की तरह अच्छी सुविधाओं से लैस हों.

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बच्चों को मुफ्त यूनिफॉर्म और जरूरी सामान

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कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को मुफ्त यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते-मोजे और स्टेशनरी देने के लिए 650 करोड़ रुपये रखे गए हैं. इसका मकसद यह है कि गरीब या जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पैसों की कमी की वजह से न रुके. सरकार चाहती है कि कोई भी बच्चा सिर्फ इसलिए स्कूल न छोड़े क्योंकि उसके पास जरूरी सामान नहीं है.

हर जिले में बनेंगे मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल

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सरकार की योजना है कि प्रदेश के हर जिले में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय खोले जाएं. इस तरह 75 जिलों में कुल 150 नए मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे. इन स्कूलों में डिजिटल क्लास, आधुनिक लैब, स्मार्ट बोर्ड और बेहतर शिक्षण सुविधाएं होंगी. इसके अलावा हर जिले में एक मुख्यमंत्री अभ्युदय विद्यालय भी बनाया जाएगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को एक जैसी अच्छी शिक्षा मिल सके.

बेटियों की पढ़ाई पर खास ध्यान

जिन विकास खंडों में अभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां नए आवासीय स्कूल खोलने के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूर-दराज और पिछड़े इलाकों की बेटियों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई का मौका मिलेगा. सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी लड़की शिक्षा से वंचित न रहे और उसे आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले.

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शिक्षकों को मिलेगी कैशलेस इलाज सुविधा

सरकार ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों, कर्मचारियों और संविदा कर्मियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा शुरू करने की योजना बनाई है. इसके लिए 358 करोड़ रुपये रखे गए हैं. इससे शिक्षकों को इलाज के लिए आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे निश्चिंत होकर अपना काम कर सकेंगे.

स्कूल बनेंगे स्मार्ट और सुरक्षित

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समग्र शिक्षा योजना के तहत सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. स्कूलों में डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक से पढ़ाई कराई जाएगी, ताकि बच्चे नई तकनीक से जुड़ सकें. इसके अलावा सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में सुरक्षा ऑडिट के बाद जिन स्कूलों में कमियां पाई गई हैं, उनके सुधार और मजबूती के लिए भी 300 करोड़ रुपये रखे गए हैं.

सरकार का लक्ष्य: हर बच्चे तक अच्छी शिक्षा

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बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि यह बजट सिर्फ पैसों का बंटवारा नहीं, बल्कि हर बच्चे तक अच्छी, समान और संस्कारयुक्त शिक्षा पहुंचाने का संकल्प है. सरकार का मानना है कि शिक्षा ही सामाजिक बराबरी और बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है. इस बजट के जरिए प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.

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